31 जुलाई 2026
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पीओके हिंसा पर 50 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने यूके विदेश मंत्री को लिखा पत्र, तत्काल तनाव कम करने की मांग

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पीओके हिंसा पर 50 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने यूके विदेश मंत्री को लिखा पत्र, तत्काल तनाव कम करने की मांग

सारांश

पीओके में कथित तौर पर कम से कम 30 मौतों और संचार ब्लैकआउट की खबरों के बाद 50 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने यूके विदेश मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल राजनयिक हस्तक्षेप माँगा। ब्रिटिश कश्मीरी समुदाय में गहरी बेचैनी, और संसद में एकजुट आवाज — यह मुद्दा अब द्विपक्षीय कूटनीति के दायरे में आ गया है।

मुख्य बातें

50 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने 31 जुलाई को यूके विदेश मंत्री को पत्र लिखकर पीओके में तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
कश्मीर एपीपीजी के चेयरमैन इमरान हुसैन ने एक्स पर पोस्ट कर पत्र की पुष्टि की; कहा — गोलीबारी से मौतों की खबरें 'गहरी चिंता' का विषय।
रिपोर्टों के अनुसार इस सप्ताह कम से कम 30 लोगों की मौत; संचार ब्लैकआउट के कारण स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं।
सांसद लियाम बर्न ने दो माँगें रखीं — लंदन में पाकिस्तानी हाई कमीशन से तत्काल बातचीत और यूके विदेश मंत्रालय द्वारा उच्चतम स्तर पर पाकिस्तान को संदेश।
सांसद जारा सुल्ताना और नादिया व्हिटोम ने स्वतंत्र जाँच, संचार बहाली और जवाबदेही की माँग की।
विरोध प्रदर्शन जून से जारी हैं; अधिकारियों ने कड़े संचार प्रतिबंध लागू किए।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर 50 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने 31 जुलाई को यूनाइटेड किंगडम के विदेश मंत्री को औपचारिक पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की। सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी, संचार ब्लैकआउट और आवाजाही पर पाबंदियों की खबरों के बीच यह राजनयिक दबाव बढ़ता दिख रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

ब्रैडफोर्ड से सांसद और कश्मीर पर ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (एपीपीजी) के चेयरमैन इमरान हुसैन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने 50 से अधिक सांसदों के साथ मिलकर यूके के विदेश मंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा, "हम तनाव के गंभीर रूप से बढ़ने को लेकर बहुत चिंतित हैं, खासकर हालिया खबरों को लेकर जिनमें गोलीबारी से लोगों की मौत और घायल होने की बात कही गई है।"

हुसैन ने यह भी रेखांकित किया कि कई ब्रिटिश कश्मीरी अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर गहरी बेचैनी में हैं, जिससे ब्रिटेन के कश्मीरी समुदायों में व्यापक चिंता फैली हुई है।

सांसदों की प्रमुख माँगें

लेबर पार्टी के सांसद लियाम बर्न ने पीओके में संचार ब्लैकआउट और मानवाधिकारों के उल्लंघन को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' करार दिया। उन्होंने दो ठोस माँगें रखीं — पहली, लंदन में पाकिस्तान के हाई कमीशन के साथ तत्काल बातचीत, और दूसरी, यूके के विदेश मंत्रालय के मंत्रियों से भेंट ताकि पाकिस्तान सरकार के सामने उच्चतम स्तर पर यह मुद्दा उठाया जा सके। बर्न ने कहा, "असल में, जरूरत इस बात की है कि बरसों पहले यूएन के प्रस्तावों में किए गए लंबे समय के वादों का सम्मान किया जाए, लेकिन अभी के लिए हमें हिंसा को रोकने की जरूरत है।"

सांसद जारा सुल्ताना ने एक्स पर लिखा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा घातक बल प्रयोग की खबरें और वीडियो फुटेज 'बेहद परेशान करने वाले' हैं। उन्होंने माँग की कि हिंसा तत्काल बंद हो, संचार व्यवस्था बहाल की जाए, स्वतंत्र जाँच की अनुमति दी जाए और मानवाधिकार उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए।

ज़मीनी हालात और संचार ब्लैकआउट

सांसद नादिया व्हिटोम के अनुसार, जून में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद अधिकारियों ने कड़े संचार प्रतिबंध लागू कर दिए। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की और इस सप्ताह कम से कम 30 लोगों की मौत की खबरें आई हैं — हालाँकि संचार ब्लैकआउट के कारण इन आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। व्हिटोम ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर दबाव बनाने की माँग की ताकि नाकाबंदी खत्म हो और हिंसा रुके।

यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में जून से जारी विरोध प्रदर्शन क्रमशः तीव्र होते गए और अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी सख्त होती चली गई।

कूटनीतिक आयाम

इमरान हुसैन ने स्पष्ट किया कि यूके सरकार को तनाव कम करने और बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए सभी उचित कूटनीतिक माध्यमों का उपयोग करना चाहिए, और इस प्रक्रिया के केंद्र में कश्मीरियों के बुनियादी मानवाधिकार होने चाहिए। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ब्रिटिश संसद में पीओके के हालात को लेकर आवाज उठी हो, लेकिन 50 से अधिक सांसदों का एकजुट होकर विदेश मंत्री को पत्र लिखना इस मुद्दे की राजनयिक गंभीरता को रेखांकित करता है।

आने वाले दिनों में यूके विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया और लंदन स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन के साथ संभावित वार्ता पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसकी अभी तक कोई रूपरेखा नहीं है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके में क्या हो रहा है और ब्रिटिश सांसद क्यों चिंतित हैं?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जून से जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर गोलीबारी की गई है, जिसमें कम से कम 30 लोगों की मौत की खबरें हैं। संचार ब्लैकआउट और आवाजाही पर पाबंदियों के कारण ब्रिटेन में रह रहे कश्मीरी अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे, जिससे वहाँ के समुदायों में गहरी बेचैनी है।
ब्रिटिश सांसदों ने यूके सरकार से क्या माँगें की हैं?
सांसदों ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — लंदन में पाकिस्तानी हाई कमीशन के साथ तत्काल बातचीत, यूके विदेश मंत्रालय द्वारा पाकिस्तान सरकार के सामने उच्चतम स्तर पर मुद्दा उठाना, और स्वतंत्र जाँच की अनुमति के साथ संचार व्यवस्था की बहाली। सांसद इमरान हुसैन ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के केंद्र में कश्मीरियों के बुनियादी मानवाधिकार होने चाहिए।
पीओके में कितने लोगों की मौत की खबर है और क्या इसकी पुष्टि हुई है?
रिपोर्टों के अनुसार इस सप्ताह कम से कम 30 लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। हालाँकि, संचार ब्लैकआउट के कारण इन आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है — यही कारण है कि सांसदों ने स्वतंत्र जाँच की माँग को प्राथमिकता दी है।
एपीपीजी (ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप) कश्मीर क्या है?
एपीपीजी ब्रिटिश संसद का एक सर्वदलीय समूह है जो कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देता है। इसके वर्तमान चेयरमैन ब्रैडफोर्ड के सांसद इमरान हुसैन हैं, जिन्होंने इस पत्र की पहल की और 50 से अधिक सांसदों को एकजुट किया।
यूके सरकार का इस पर क्या रुख है और आगे क्या होगा?
अभी तक यूके विदेश मंत्रालय की औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सांसद लियाम बर्न ने माँग की है कि विदेश मंत्रालय के मंत्री पाकिस्तानी हाई कमीशन और पाकिस्तान सरकार से उच्चतम स्तर पर बात करें। आने वाले दिनों में यूके की राजनयिक प्रतिक्रिया और पाकिस्तान के साथ संभावित वार्ता पर सभी की नजर रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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