पीओके हिंसा पर यूके संसद में उठी आवाज़: 40 से अधिक मौतों पर स्वतंत्र जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
ब्रिटिश संसद में 30 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर कई सांसदों ने गहरी चिंता जताई, जिसमें 40 से अधिक नागरिकों की मौत और दर्जनों के गंभीर रूप से घायल होने की रिपोर्टें सामने आई हैं। सांसदों ने एकजुट होकर घटनाओं की पूर्ण, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग उठाई।
ब्रिटिश सांसदों की प्रमुख मांगें
लेबर पार्टी के सांसद लियाम बायर्न ने पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने की रिपोर्टों को 'चिंता का विषय' बताया। उन्होंने क्षेत्र में संचार सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों और मानवाधिकार उल्लंघनों को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' करार दिया।
बायर्न ने कहा, 'यूके संसद के क्रॉस-पार्टी समूह ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन कश्मीर ने दो मांगें रखी हैं — पहली, लंदन में पाकिस्तान के हाई कमीशन से तत्काल बातचीत की जाए; दूसरी, विदेश मंत्रालय के मंत्रियों से मिलकर यह सुनिश्चित किया जाए कि वे पाकिस्तान सरकार के सामने पूरी शिद्दत से अपनी बात रखें।' उन्होंने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्तावों के प्रति किए गए वादों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन फिलहाल 'हिंसा रुकवाना सर्वोच्च प्राथमिकता' है।
सांसद अदनान हुसैन की अपील
एक अन्य ब्रिटिश सांसद अदनान हुसैन ने पीओके में नागरिकों की हत्या को 'त्रासदी' बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा किसी भी अत्यधिक या गैरकानूनी बल प्रयोग की 'पूर्ण, स्वतंत्र और पारदर्शी' जांच होनी चाहिए।
हुसैन ने सभी पक्षों से संयम बरतने, नागरिक जीवन की रक्षा करने और शांतिपूर्ण संवाद में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'स्थायी समाधान केवल शांत, रचनात्मक बातचीत से ही संभव है, न कि हिंसा या तनाव बढ़ाने से।' उन्होंने विशेष रूप से उन मतदाताओं के प्रति संवेदना व्यक्त की जिनके परिजन इस क्षेत्र में हैं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की चेतावनी
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने कहा कि पीओके के रावलाकोट से आ रही रिपोर्टें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तान के पुराने 'गैरकानूनी' पैटर्न को ही दर्शाती हैं। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग की तुरंत, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच के आदेश दिए जाने चाहिए।'
कैलामार्ड ने पाकिस्तानी अधिकारियों से इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर लगी पाबंदियाँ हटाने की माँग की और क्षेत्र में मीडिया तथा स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को प्रवेश देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब तक संचार पाबंदियाँ जारी रहेंगी, जमीनी स्थिति का सही आकलन संभव नहीं होगा।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पीओके में कथित तौर पर विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया चल रही थी। गौरतलब है कि क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग, संचार बंदी और मीडिया पर पाबंदी की यह पहली घटना नहीं है — मानवाधिकार संगठनों के अनुसार यह एक दोहराए जाने वाले पैटर्न का हिस्सा है।
ब्रिटिश संसद में उठी यह आवाज़ अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यूके सरकार पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक स्तर पर किस हद तक यह मुद्दा उठाती है।