30 जुलाई 2026
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पीओके हिंसा पर यूके संसद में उठी आवाज़: 40 से अधिक मौतों पर स्वतंत्र जांच की मांग

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पीओके हिंसा पर यूके संसद में उठी आवाज़: 40 से अधिक मौतों पर स्वतंत्र जांच की मांग

सारांश

यूके संसद में पीओके हिंसा पर एकजुट आवाज़ — लेबर सांसद लियाम बायर्न से लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल तक सभी ने पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग की, जिसमें 40 से अधिक नागरिकों की मौत की रिपोर्टें हैं। संचार बंदी ने जमीनी सच्चाई को और धुंधला कर दिया है।

मुख्य बातें

पीओके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 40 से अधिक नागरिकों की मौत और दर्जनों के घायल होने की रिपोर्टें सामने आई हैं।
लेबर सांसद लियाम बायर्न ने संचार पाबंदियों और मानवाधिकार उल्लंघनों को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया।
ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन कश्मीर ने लंदन में पाकिस्तानी हाई कमीशन से तत्काल बातचीत और यूके विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की।
सांसद अदनान हुसैन ने घटना को 'त्रासदी' बताते हुए 'पूर्ण, स्वतंत्र और पारदर्शी' जांच की मांग की।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने रावलाकोट की रिपोर्टों को पाकिस्तान के 'गैरकानूनी' पैटर्न का हिस्सा बताया और इंटरनेट पाबंदी हटाने की माँग की।

ब्रिटिश संसद में 30 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर कई सांसदों ने गहरी चिंता जताई, जिसमें 40 से अधिक नागरिकों की मौत और दर्जनों के गंभीर रूप से घायल होने की रिपोर्टें सामने आई हैं। सांसदों ने एकजुट होकर घटनाओं की पूर्ण, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग उठाई।

ब्रिटिश सांसदों की प्रमुख मांगें

लेबर पार्टी के सांसद लियाम बायर्न ने पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने की रिपोर्टों को 'चिंता का विषय' बताया। उन्होंने क्षेत्र में संचार सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों और मानवाधिकार उल्लंघनों को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' करार दिया।

बायर्न ने कहा, 'यूके संसद के क्रॉस-पार्टी समूह ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन कश्मीर ने दो मांगें रखी हैं — पहली, लंदन में पाकिस्तान के हाई कमीशन से तत्काल बातचीत की जाए; दूसरी, विदेश मंत्रालय के मंत्रियों से मिलकर यह सुनिश्चित किया जाए कि वे पाकिस्तान सरकार के सामने पूरी शिद्दत से अपनी बात रखें।' उन्होंने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्तावों के प्रति किए गए वादों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन फिलहाल 'हिंसा रुकवाना सर्वोच्च प्राथमिकता' है।

सांसद अदनान हुसैन की अपील

एक अन्य ब्रिटिश सांसद अदनान हुसैन ने पीओके में नागरिकों की हत्या को 'त्रासदी' बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा किसी भी अत्यधिक या गैरकानूनी बल प्रयोग की 'पूर्ण, स्वतंत्र और पारदर्शी' जांच होनी चाहिए।

हुसैन ने सभी पक्षों से संयम बरतने, नागरिक जीवन की रक्षा करने और शांतिपूर्ण संवाद में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'स्थायी समाधान केवल शांत, रचनात्मक बातचीत से ही संभव है, न कि हिंसा या तनाव बढ़ाने से।' उन्होंने विशेष रूप से उन मतदाताओं के प्रति संवेदना व्यक्त की जिनके परिजन इस क्षेत्र में हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशनल की चेतावनी

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने कहा कि पीओके के रावलाकोट से आ रही रिपोर्टें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तान के पुराने 'गैरकानूनी' पैटर्न को ही दर्शाती हैं। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग की तुरंत, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच के आदेश दिए जाने चाहिए।'

कैलामार्ड ने पाकिस्तानी अधिकारियों से इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर लगी पाबंदियाँ हटाने की माँग की और क्षेत्र में मीडिया तथा स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को प्रवेश देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब तक संचार पाबंदियाँ जारी रहेंगी, जमीनी स्थिति का सही आकलन संभव नहीं होगा।

पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पीओके में कथित तौर पर विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया चल रही थी। गौरतलब है कि क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग, संचार बंदी और मीडिया पर पाबंदी की यह पहली घटना नहीं है — मानवाधिकार संगठनों के अनुसार यह एक दोहराए जाने वाले पैटर्न का हिस्सा है।

ब्रिटिश संसद में उठी यह आवाज़ अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यूके सरकार पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक स्तर पर किस हद तक यह मुद्दा उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी व्यावहारिक सीमाएँ भी हैं — ब्रिटिश सरकार के लिए पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को देखते हुए सार्वजनिक दबाव को ठोस कार्रवाई में बदलना आसान नहीं होगा। एमनेस्टी इंटरनेशनल का यह कहना कि यह पाकिस्तान के 'पुराने गैरकानूनी पैटर्न' की पुनरावृत्ति है, एक गंभीर संस्थागत विफलता की ओर इशारा करता है जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय बार-बार रेखांकित करता है, पर जवाबदेही तय करने में चूक जाता है। संचार बंदी के बीच '40 से अधिक मौतें' की संख्या अभी भी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है — यही वह रिक्तता है जिसे पाकिस्तान कथित तौर पर अपने पक्ष में इस्तेमाल करता रहा है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके में क्या हुआ जिसने यूके संसद का ध्यान खींचा?
रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 40 से अधिक नागरिकों की मौत हुई और दर्जनों घायल हुए। इसके साथ ही क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ बंद कर दी गईं और मीडिया की पहुँच प्रतिबंधित कर दी गई।
यूके के ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन कश्मीर की क्या मांगें हैं?
समूह ने दो प्रमुख मांगें रखी हैं — लंदन स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन से तत्काल बातचीत, और यूके के विदेश मंत्रालय से यह सुनिश्चित करना कि वह पाकिस्तान सरकार के सामने यह मुद्दा प्रभावी ढंग से उठाए। समूह ने हिंसा को तत्काल रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पीओके मामले पर क्या कहा?
एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने रावलाकोट से आ रही रिपोर्टों को पाकिस्तान के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 'गैरकानूनी' पैटर्न का हिस्सा बताया। उन्होंने तत्काल, स्वतंत्र जांच, इंटरनेट पाबंदी हटाने और क्षेत्र में मीडिया व स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को प्रवेश देने की माँग की।
पीओके में हिंसा किस पृष्ठभूमि में हुई?
यह घटनाक्रम कथित तौर पर पीओके में विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया के दौरान हुआ। प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और संचार बंदी को मानवाधिकार संगठन क्षेत्र में पहले भी दोहराए जाने वाले पैटर्न का हिस्सा बताते हैं।
क्या यूके सरकार पाकिस्तान पर कोई ठोस कदम उठाएगी?
अभी तक यूके सरकार की ओर से कोई आधिकारिक कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है। ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन कश्मीर ने विदेश मंत्रालय के मंत्रियों से मिलने की माँग की है ताकि पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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