पीओके हिंसा: बर्मिंघम में पाक वाणिज्य दूतावास के बाहर ब्रिटिश कश्मीरियों का प्रदर्शन, 100+ मौतों का दावा
सारांश
मुख्य बातें
बर्मिंघम में 29 जुलाई को पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर ब्रिटिश कश्मीरियों ने बड़ा प्रदर्शन किया — पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई के विरोध में। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के समर्थन में हुए इस प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए और पीओके की आज़ादी की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में पिछले दो दिनों की कार्रवाई में कम से कम 40 लोगों की मौत हुई है और कई घायल हुए हैं। वहीं, यूकेपीएनपी (UK Pakistan National Party) ने आरोप लगाया है कि 5 जून से अब तक 100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, कई सौ गंभीर रूप से घायल हैं और सैकड़ों लोगों को कथित तौर पर जबरन गायब किया गया है।
कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रावलाकोट, मीरपुर और अन्य इलाकों में हिंसक प्रदर्शनों के चलते मृतकों और घायलों की कुल संख्या 100 से अधिक हो सकती है। ये सभी आँकड़े कथित तौर पर विभिन्न संगठनों के दावों पर आधारित हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सके हैं।
ब्रिटिश सांसदों की प्रतिक्रिया
ब्रिटिश सांसद नाज़ शाह ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने को 'बर्बर' बताया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'जो लोग शांतिपूर्वक अपने राजनीतिक विचार रख रहे थे, उन पर सीधे गोली चलाना बर्बरता है।' उन्होंने जवाबदेही तय करने और तत्काल शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में कदम उठाने की माँग की।
एक अन्य ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन ने कहा कि पीओके से गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों की चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। एक वीडियो संदेश में उन्होंने बताया कि वे ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त से संपर्क कर ब्रिटिश कश्मीरियों की चिंताओं को सामने रखेंगे। उन्होंने ब्रिटेन सरकार के मंत्रियों से भी अपील की कि वे कूटनीतिक माध्यमों से तनाव कम कराने और बातचीत पुनः शुरू कराने की कोशिश करें।
यूकेपीएनपी की माँगें
यूकेपीएनपी ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ अत्यधिक या गैरकानूनी बल का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन हो सकता है।
संगठन ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की — नागरिकों की सुरक्षा, घटनाओं की निष्पक्ष जाँच और मानवाधिकार नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए।
आम जनता पर असर
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बर्मिंघम स्थित पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर कश्मीरी प्रदर्शनकारी अपने जूते उतारते और गुस्सा जाहिर करते दिखाई दे रहे हैं — जो पाकिस्तान के प्रति उनकी तीव्र नाराज़गी का प्रतीक है। यह ऐसे समय में हुआ है जब ब्रिटेन में बसे कश्मीरी समुदाय पीओके में अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में हैं।
क्या होगा आगे
ब्रिटिश सांसदों के कूटनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की माँगों के बीच यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है। पीओके में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बताई जा रही है और स्वतंत्र पत्रकारों की पहुँच सीमित होने के कारण ज़मीनी हालात की पूरी तस्वीर सामने आना अभी बाकी है।