पीओके में अत्याचार पर दुनिया का ध्यान जाए — नॉर्वे-पाक बैठक के बाद भारत का कड़ा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय ने 14 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी अत्याचारों और सीमा पार आतंकवाद पर ध्यान केंद्रित करें। यह बयान इस्लामाबाद में नॉर्वे और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बैठक के बाद आया, जिसमें कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की सूचना मिली थी।
भारत का स्पष्ट रुख
नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। जिन मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता करनी चाहिए, वे हैं पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में अभी हो रहे अत्याचार और पीओके का इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद के लिए।' जायसवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भारत की स्थिति अटल है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।
नॉर्वे-पाकिस्तान बैठक की पृष्ठभूमि
इस्लामाबाद में गुरुवार को नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इश्क डार के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों पक्षों द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि बैठक में कश्मीर सहित क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। यह बयान ऐसे समय में आया जब पीओके में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और वहाँ दशकों का सबसे बड़ा जन-आंदोलन चल रहा है।
पीओके में जारी संकट
रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में इन दिनों जानलेवा हिंसा, इंटरनेट पर पाबंदी और पुलिस की बर्बरता की घटनाएँ सामने आ रही हैं। यह विरोध प्रदर्शन शुरू में बिजली और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन अब ये एक व्यापक आंदोलन का रूप ले चुके हैं, जिसमें राजनीतिक सुधार, जवाबदेही और प्रतिनिधि सरकार की माँगें शामिल हो गई हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) समेत कई संगठनों से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल पर ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें कथित तौर पर पीओके के कोटली में एक शांतिपूर्ण रैली पर पुलिस कार्रवाई दिखाई गई है।
बांग्लादेश को डीजल आपूर्ति पर भारत का रुख
ब्रीफिंग में रणधीर जायसवाल ने बांग्लादेश को डीजल आपूर्ति के सवाल पर भी स्पष्टता दी। उन्होंने कहा, 'डीजल की सप्लाई के लिए बांग्लादेश के साथ हमारा एक मौजूदा इंतजाम है। यह अभी की अपील के लिए भी जारी है। हमारी अपनी जरूरत, हमारी रिफाइनिंग कैपेसिटी और हमारे देश में डीजल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए इसकी जाँच की जाएगी।' ढाका की ओर से अतिरिक्त डीजल आपूर्ति की माँग की गई थी, जिस पर भारत ने घरेलू प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए समीक्षा का आश्वासन दिया।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी तीसरे देश की पाकिस्तान के साथ कश्मीर पर बातचीत के बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी हो। भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और किसी भी बाहरी मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है। पीओके में बिगड़ते हालात अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की कूटनीतिक रणनीति का एक अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।