31 जुलाई 2026
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जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा, MEA ने साझेदार देशों से सही नाम इस्तेमाल करने को कहा

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जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा, MEA ने साझेदार देशों से सही नाम इस्तेमाल करने को कहा

सारांश

भारत ने दोहराया — जम्मू, कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न हिस्से हैं। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की 'भ्रामक' रिपोर्ट पर भारतीय दूतावास ने एक्स पर कड़ी आपत्ति जताई। पीओजेके में जेएएसी के मार्च के दौरान 40 से अधिक मौतें, सैकड़ों घायल।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 31 जुलाई को दोहराया कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं।
MEA ने सभी साझेदार देशों से इस क्षेत्र के लिए सही नाम और पहचान इस्तेमाल करने का आग्रह किया।
29 जुलाई को अमेरिका में भारतीय दूतावास ने 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट को 'भ्रामक और गलत' बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई।
दूतावास ने एक्स पर स्पष्ट किया कि 'पाकिस्तानी कश्मीर' जैसी कोई संज्ञा नहीं — केवल पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) है।
पीओजेके में जेएएसी के लंबे मार्च के दौरान कथित तौर पर 40 से अधिक लोगों की मौत और सैकड़ों घायल होने की रिपोर्ट है।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 31 जुलाई 2026 को एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश सहित संपूर्ण जम्मू-कश्मीर क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। मंत्रालय ने सभी साझेदार देशों और संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि वे इस क्षेत्र के लिए वही नाम और पहचान अपनाएँ, जो भारत की आधिकारिक स्थिति के अनुरूप है।

MEA प्रवक्ता का स्पष्ट बयान

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से जब यह पूछा गया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जारी अशांति पर रिपोर्टिंग के दौरान कुछ विदेशी मीडिया संस्थान उस क्षेत्र की कानूनी स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, "हमारी स्थिति बिल्कुल साफ है कि जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्र — यानी जम्मू, कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख — भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। यही भारत का रुख है।"

जायसवाल ने आगे कहा, "ये इलाके पहले भी भारत का हिस्सा थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। हम अपने सभी साझेदारों और संबंधित पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे इस क्षेत्र के लिए वही सही नाम और पहचान इस्तेमाल करें, जैसा भारत इसे मानता है।"

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट पर आपत्ति

यह प्रतिक्रिया उस संदर्भ में आई जब अमेरिका के प्रमुख समाचारपत्र 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने पीओजेके में चल रही अशांति पर रिपोर्ट करते हुए उस क्षेत्र का गलत उल्लेख किया। 29 जुलाई को अमेरिका में भारतीय दूतावास ने उस रिपोर्ट के शीर्षक पर आपत्ति जताते हुए इसे 'भ्रामक और गलत' करार दिया।

दूतावास ने कहा कि पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है और अब वहाँ के लोगों के खिलाफ हिंसा का सहारा ले रहा है।

दूतावास की एक्स पर पोस्ट

अमेरिका में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "'पाकिस्तानी कश्मीर' नाम की कोई चीज नहीं है — केवल पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से थे, हैं और हमेशा रहेंगे। पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा कर रखा है और अब वहाँ रहने वाले लोगों पर हिंसा कर रहा है।"

पीओजेके में हिंसा की स्थिति

रिपोर्टों के अनुसार, पीओजेके में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) की ओर से निकाले गए लंबे मार्च के दौरान 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो — जिनमें जेएएसी जैसी स्थानीय पार्टियों के साझा किए गए वीडियो भी शामिल हैं — में आम नागरिकों के खिलाफ पाकिस्तानी बलों की कथित सख्ती और हिंसा दर्शाई गई है। गौरतलब है कि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

यह ऐसे समय में आया है जब पीओजेके में बढ़ती अशांति अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियाँ बन रही है और भारत लगातार इस क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता की स्थिति को वैश्विक मंच पर रेखांकित कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय महत्वपूर्ण है — पीओजेके में बढ़ती हिंसा जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह बना रही है, तब नामकरण की लड़ाई कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा बन जाती है। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' जैसे प्रभावशाली माध्यम पर सार्वजनिक रूप से एक्स के जरिये आपत्ति जताना भारत की बदलती कूटनीतिक शैली को दर्शाता है — परंपरागत राजनयिक चैनलों से आगे बढ़कर सोशल मीडिया को हथियार बनाना। हालाँकि, असली सवाल यह है कि क्या नामकरण की यह कोशिश पीओजेके में जारी कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर वैश्विक ध्यान दिलाने में सहायक बनती है, या केवल संप्रभुता की घोषणा तक सीमित रहती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की जम्मू-कश्मीर पर आधिकारिक स्थिति क्या है?
भारत की स्थिति यह है कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश सहित संपूर्ण जम्मू-कश्मीर क्षेत्र उसका अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 31 जुलाई को इसे पुनः स्पष्ट किया।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट पर भारत ने आपत्ति क्यों जताई?
अमेरिका में भारतीय दूतावास ने 29 जुलाई को 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की उस रिपोर्ट के शीर्षक को 'भ्रामक और गलत' बताया, जिसमें पीओजेके के लिए गलत नाम का इस्तेमाल किया गया था। दूतावास ने स्पष्ट किया कि 'पाकिस्तानी कश्मीर' जैसी कोई संज्ञा नहीं — यह क्षेत्र पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है।
पीओजेके में इस समय क्या हो रहा है?
रिपोर्टों के अनुसार, पीओजेके में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के लंबे मार्च के दौरान 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पाकिस्तानी बलों की कथित हिंसा दिखाई गई है, हालाँकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
MEA ने साझेदार देशों से क्या आग्रह किया है?
MEA ने सभी साझेदार देशों और संबंधित पक्षों से आग्रह किया है कि वे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के लिए वही नाम और पहचान इस्तेमाल करें, जो भारत की आधिकारिक स्थिति के अनुरूप है। मंत्रालय ने इसे भारत का अटल रुख बताया।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को भारत किस दृष्टि से देखता है?
भारत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को अवैध कब्जे वाला क्षेत्र मानता है। भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों पर अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है और अब वहाँ के लोगों के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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