जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा, MEA ने साझेदार देशों से सही नाम इस्तेमाल करने को कहा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) ने 31 जुलाई 2026 को एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश सहित संपूर्ण जम्मू-कश्मीर क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। मंत्रालय ने सभी साझेदार देशों और संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि वे इस क्षेत्र के लिए वही नाम और पहचान अपनाएँ, जो भारत की आधिकारिक स्थिति के अनुरूप है।
MEA प्रवक्ता का स्पष्ट बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से जब यह पूछा गया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जारी अशांति पर रिपोर्टिंग के दौरान कुछ विदेशी मीडिया संस्थान उस क्षेत्र की कानूनी स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, "हमारी स्थिति बिल्कुल साफ है कि जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्र — यानी जम्मू, कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख — भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। यही भारत का रुख है।"
जायसवाल ने आगे कहा, "ये इलाके पहले भी भारत का हिस्सा थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। हम अपने सभी साझेदारों और संबंधित पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे इस क्षेत्र के लिए वही सही नाम और पहचान इस्तेमाल करें, जैसा भारत इसे मानता है।"
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट पर आपत्ति
यह प्रतिक्रिया उस संदर्भ में आई जब अमेरिका के प्रमुख समाचारपत्र 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने पीओजेके में चल रही अशांति पर रिपोर्ट करते हुए उस क्षेत्र का गलत उल्लेख किया। 29 जुलाई को अमेरिका में भारतीय दूतावास ने उस रिपोर्ट के शीर्षक पर आपत्ति जताते हुए इसे 'भ्रामक और गलत' करार दिया।
दूतावास ने कहा कि पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है और अब वहाँ के लोगों के खिलाफ हिंसा का सहारा ले रहा है।
दूतावास की एक्स पर पोस्ट
अमेरिका में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "'पाकिस्तानी कश्मीर' नाम की कोई चीज नहीं है — केवल पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से थे, हैं और हमेशा रहेंगे। पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा कर रखा है और अब वहाँ रहने वाले लोगों पर हिंसा कर रहा है।"
पीओजेके में हिंसा की स्थिति
रिपोर्टों के अनुसार, पीओजेके में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) की ओर से निकाले गए लंबे मार्च के दौरान 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो — जिनमें जेएएसी जैसी स्थानीय पार्टियों के साझा किए गए वीडियो भी शामिल हैं — में आम नागरिकों के खिलाफ पाकिस्तानी बलों की कथित सख्ती और हिंसा दर्शाई गई है। गौरतलब है कि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
यह ऐसे समय में आया है जब पीओजेके में बढ़ती अशांति अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियाँ बन रही है और भारत लगातार इस क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता की स्थिति को वैश्विक मंच पर रेखांकित कर रहा है।