13 जुलाई 2026
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जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग — भाजपा-विपक्ष एकजुट, पीओके वापसी की माँग तेज़

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जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग — भाजपा-विपक्ष एकजुट, पीओके वापसी की माँग तेज़

सारांश

चीन-पाकिस्तान के संयुक्त बयान में कश्मीर के उल्लेख पर भारत ने कड़ा जवाब दिया — और इस बार सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों एक सुर में बोले। कांग्रेस से लेकर भाजपा तक, सबने कहा: जम्मू-कश्मीर भारत का है, और पीओके भी वापस लेना होगा।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 27 मई 2025 को चीन-पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के 'अनुचित उल्लेखों' को स्पष्ट रूप से खारिज किया।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा — जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का एक-एक इंच भारत का है; पीओके भी वापस मिलना चाहिए।
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने का हवाला देते हुए कश्मीर पर भारत के अटल रुख को दोहराया।
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा — भारतीय सशस्त्र बल किसी भी आक्रामकता का कड़ा जवाब देने को तैयार हैं।
यह बयान बीजिंग में हुई चीन-पाकिस्तान नेताओं की बैठक के बाद आया, जिसमें कश्मीर का उल्लेख किया गया था।

विदेश मंत्रालय द्वारा चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के 'अनुचित उल्लेखों' को सिरे से खारिज किए जाने के बाद, 27 मई 2025 को देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता एक स्वर में सामने आए और दोहराया कि जम्मू-कश्मीर तथा केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। यह एकजुटता ऐसे समय में सामने आई जब बीजिंग में चीन और पाकिस्तानी नेताओं की बैठक के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में कश्मीर का उल्लेख किया गया था।

विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'भारत चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के अनुचित उल्लेखों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'भारत का रुख सुसंगत है और संबंधित पक्षों को सर्वविदित है। जम्मू व कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे। किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।'

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भारत ने इस मुद्दे पर अपना दृढ़ रुख दोहराया हो — पिछले कई वर्षों में कई बहुपक्षीय मंचों पर भारत ऐसे किसी भी बयान को अस्वीकार करता रहा है जो कश्मीर को विवादित क्षेत्र के रूप में चित्रित करे।

विपक्ष और सत्ता पक्ष — एकजुट आवाज़

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, 'हम बस इतना कहना चाहते हैं कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का एक-एक इंच भारत का है। अगर कोई विवाद है, तो वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के हिस्से को लेकर है। हमें वह हिस्सा वापस मिलना चाहिए। वह भारत के नक्शे का हिस्सा होना चाहिए। यही 'अखंड भारत' का सपना है।'

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने विदेश मंत्रालय के बयान का समर्थन करते हुए कहा, 'यह बिल्कुल सही कहा गया है कि जम्मू व कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया। जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।'

सशस्त्र बलों की तैयारी पर ज़ोर

उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भारतीय सशस्त्र बलों की सज्जता पर ज़ोर देते हुए कहा, 'यह निश्चित है कि अगर कोई विदेशी देश भारत के खिलाफ आक्रामकता दिखाने या कार्रवाई करने की कोशिश करता है, तो हमारे सशस्त्र बल कड़ा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव का माहौल बना हुआ है।

पृष्ठभूमि: चीन-पाक संयुक्त बयान का विवाद

मंगलवार, 27 मई को बीजिंग में चीन और पाकिस्तान के नेताओं की बैठक के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश का उल्लेख किया गया, जिसे भारत ने 'अनुचित संदर्भ' करार देते हुए तत्काल खारिज कर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। आलोचकों का कहना है कि चीन द्वारा इस बयान में कश्मीर का उल्लेख पाकिस्तान को कूटनीतिक समर्थन देने की रणनीति का हिस्सा है।

आगे की राह

भारत का यह सर्वदलीय एकजुट रुख दर्शाता है कि कश्मीर पर किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को देश की राजनीतिक जमात एकमत होकर नकारती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में भारत इस मुद्दे को द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर और अधिक सशक्त ढंग से उठा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह एकता केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहेगी या नीतिगत दबाव में भी तब्दील होगी। पीओके वापसी की माँग दशकों पुरानी है — अनुच्छेद 370 हटने के बाद इसे नई ऊर्जा मिली, पर ज़मीनी कूटनीति अभी भी इस लक्ष्य से कोसों दूर है। चीन का इस बयान में शामिल होना एक नई चुनौती है — यह भारत-चीन सीमा विवाद और भारत-पाक तनाव को एक साथ जोड़ता है, जो भारतीय विदेश नीति के लिए दोहरा मोर्चा खड़ा करता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने चीन-पाकिस्तान के संयुक्त बयान को क्यों खारिज किया?
भारत ने बीजिंग में जारी चीन-पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के 'अनुचित उल्लेखों' को इस आधार पर खारिज किया कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 27 मई 2025 को स्पष्ट किया कि जम्मू व कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे। भारत का यह रुख सुसंगत है और संबंधित पक्षों को सर्वविदित है।
कांग्रेस का इस मुद्दे पर क्या रुख है?
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का एक-एक इंच भारत का है और पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) भी भारत को वापस मिलना चाहिए। यह 'अखंड भारत' के सपने की पूर्ति होगी।
पीओके वापसी की माँग कितनी व्यावहारिक है?
पीओके वापसी की माँग भारतीय राजनीति में दशकों से उठती रही है और अनुच्छेद 370 हटने के बाद इसे नई गति मिली है। हालाँकि, कूटनीतिक और सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार यह एक जटिल भू-राजनीतिक प्रश्न है जिसके लिए दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता होगी।
इस विवाद में चीन की भूमिका क्या है?
चीन ने पाकिस्तान के साथ जारी संयुक्त बयान में कश्मीर का उल्लेख कर पाकिस्तान को कूटनीतिक समर्थन दिया, जिसे भारत ने अस्वीकार्य बताया। आलोचकों का कहना है कि यह चीन की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह भारत पर कूटनीतिक दबाव बनाए रखना चाहता है।
राष्ट्र प्रेस
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