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संयुक्त राष्ट्र मंच पर भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब, कश्मीर को बताया पूर्णतः आंतरिक मामला

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संयुक्त राष्ट्र मंच पर भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब, कश्मीर को बताया पूर्णतः आंतरिक मामला

सारांश

संयुक्त राष्ट्र की एक अनौपचारिक बैठक में पाकिस्तान ने सह-अध्यक्ष पद का इस्तेमाल कश्मीर मुद्दा उठाने के लिए किया — भारत ने तुरंत पलटवार किया। स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा: कश्मीर भारत का आंतरिक मामला था, है और रहेगा। साथ ही प्रस्ताव 47 की अनदेखी के लिए पाकिस्तान को ही कटघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी.
हरीश ने 24 जून को संयुक्त राष्ट्र की अनौपचारिक बैठक में पाकिस्तान पर मंच के राजनीतिकरण का आरोप लगाया।
पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त रूप से इस बैठक की सह-अध्यक्षता की; पाकिस्तानी राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने कश्मीर मुद्दा उठाया।
भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना पूर्णतः आंतरिक मामला बताते हुए किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को खारिज किया।
भारत ने कहा कि पाकिस्तान ने अप्रैल 1948 के सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 47 का पालन नहीं किया, जो उससे कब्जे वाले क्षेत्रों से सेना हटाने को कहता है।
हरीश ने यूएन-80 समीक्षा के तहत सुरक्षा परिषद के जनादेशों और अध्याय-6 के मध्यस्थता ढाँचों की पुनर्समीक्षा का आह्वान किया।

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने मंगलवार, 24 जून को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बैठक में पाकिस्तान पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उसने सह-अध्यक्ष के पद का दुरुपयोग कर मंच का राजनीतिकरण किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश भारत का पूर्णतः आंतरिक मामला है — यह हमेशा भारत का हिस्सा था, है और रहेगा।"

बैठक का स्वरूप और विषय

यह बैठक अरिया फॉर्मूला के तहत आयोजित की गई थी — सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक संवाद व्यवस्था, जिसका नाम वेनेजुएला के राजनयिक डिएगो अरिया के नाम पर रखा गया है। बैठक का विषय था: "कार्यान्वयन की खाई को पाटना: सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा का संरक्षण"। इस बैठक की सह-अध्यक्षता चीन और पाकिस्तान के राजदूतों ने संयुक्त रूप से की।

पाकिस्तान की भूमिका पर भारत की आपत्ति

पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने बैठक के दौरान कश्मीर मुद्दा उठाया — जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की परिचित रणनीति रही है। इस पर पी. हरीश ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह आश्चर्यजनक है कि एक सह-अध्यक्ष, जिससे संतुलित और निष्पक्ष आचरण की अपेक्षा की जाती है, उसने इस मंच का राजनीतिकरण करने का विकल्प चुना।" भारत का आरोप है कि पाकिस्तान ने एक बहुपक्षीय मंच की गरिमा का उल्लंघन कर उसे द्विपक्षीय एजेंडे के लिए भुनाया।

प्रस्ताव 47 और पाकिस्तान की जवाबदेही

भारत ने यह भी रेखांकित किया कि सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा स्वयं पाकिस्तान रहा है। भारत के अनुसार, पाकिस्तान ने अप्रैल 1948 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 47 का पालन नहीं किया, जिसमें उससे कश्मीर के उन क्षेत्रों से अपनी सेना, सुरक्षा बलों और नागरिकों को हटाने को कहा गया था जिन पर उसने कब्जा किया था। साथ ही भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर क्षेत्रों में जनता के विरोध प्रदर्शनों को वहाँ की सुरक्षा एजेंसियाँ बलपूर्वक दबाने का प्रयास कर रही हैं।

यूएन-80 समीक्षा और व्यापक सुधार का आह्वान

पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर चल रही यूएन-80 समीक्षा प्रक्रिया के तहत सुरक्षा परिषद के जनादेशों की समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उनका तर्क था कि जब महासभा के सभी जनादेशों की समीक्षा हो रही है, तो सुरक्षा परिषद के जनादेशों को इससे अलग रखने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय-6 के तहत मध्यस्थता और वार्ता प्रावधानों की पुनर्समीक्षा का सुझाव भी दिया, यह कहते हुए कि ये उपाय तत्कालीन परिस्थितियों के अनुरूप बने थे और इनकी वैधता अनिश्चितकालीन नहीं हो सकती।

फिलिस्तीन का उदाहरण और आगे की राह

हरीश ने फिलिस्तीन का उदाहरण देते हुए कहा कि दशकों की मध्यस्थता के बावजूद समाधान नहीं निकल सका, जो पुराने ढाँचों की सीमाओं को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि पुराने और अप्रासंगिक मध्यस्थता ढाँचों की समीक्षा के लिए ठोस आधार मौजूद है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के बाद कूटनीतिक मोर्चे पर दोनों देश एक-दूसरे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरने की कोशिश में लगे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आक्रामक रूप से प्रस्ताव 47 की जवाबदेही पाकिस्तान पर डाल दी — जो आमतौर पर भारत की रक्षात्मक भाषा से अलग है। यूएन-80 समीक्षा के बहाने पुराने सुरक्षा परिषद जनादेशों पर सवाल उठाना एक सुविचारित कदम है, क्योंकि इससे कश्मीर से जुड़े पुराने प्रस्तावों को भी 'कालातीत' घोषित करने का कूटनीतिक रास्ता खुलता है। मुख्यधारा की कवरेज इस रणनीतिक आयाम को अक्सर नजरअंदाज कर देती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान की आलोचना क्यों की?
भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बैठक में सह-अध्यक्ष के पद का दुरुपयोग करते हुए कश्मीर मुद्दा उठाया और मंच का राजनीतिकरण किया। भारत का कहना है कि एक सह-अध्यक्ष से निष्पक्ष और संतुलित आचरण की अपेक्षा होती है, जिसका पाकिस्तान ने उल्लंघन किया।
अरिया फॉर्मूला बैठक क्या होती है?
अरिया फॉर्मूला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक संवाद व्यवस्था है, जिसका नाम वेनेजुएला के राजनयिक डिएगो अरिया के नाम पर रखा गया है। यह परिषद की औपचारिक प्रक्रियाओं से इतर खुली चर्चा का मंच प्रदान करती है।
भारत ने सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 47 का उल्लेख क्यों किया?
भारत ने यह दर्शाने के लिए प्रस्ताव 47 का हवाला दिया कि सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन न करने वाला देश स्वयं पाकिस्तान है। अप्रैल 1948 के इस प्रस्ताव में पाकिस्तान से कब्जे वाले कश्मीर क्षेत्रों से अपनी सेना और नागरिकों को हटाने को कहा गया था, जिसे पाकिस्तान ने आज तक लागू नहीं किया।
भारत ने यूएन-80 समीक्षा में सुरक्षा परिषद के जनादेशों की समीक्षा की माँग क्यों उठाई?
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने तर्क दिया कि संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ पर चल रही समीक्षा प्रक्रिया में महासभा के साथ-साथ सुरक्षा परिषद के जनादेशों की भी समीक्षा होनी चाहिए। उनका मानना है कि पुराने और बदले हालात में अप्रासंगिक हो चुके मध्यस्थता ढाँचों को अनिश्चितकाल तक वैध नहीं माना जा सकता।
पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर पर भारत ने क्या आरोप लगाए?
भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर क्षेत्रों में जनता के विरोध प्रदर्शनों को वहाँ की सुरक्षा एजेंसियाँ बलपूर्वक दबाने का प्रयास कर रही हैं। यह आरोप पाकिस्तान के उस दावे के विपरीत है जिसमें वह कश्मीरियों के अधिकारों की पैरवी करने का दम भरता है।
राष्ट्र प्रेस
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