8 नवंबर 2026
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जम्मू-कश्मीर पर OIC की टिप्पणी खारिज, विदेश मंत्रालय ने कहा — भारत का आंतरिक मामला

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जम्मू-कश्मीर पर OIC की टिप्पणी खारिज, विदेश मंत्रालय ने कहा — भारत का आंतरिक मामला

सारांश

भारत ने UNGA सत्र के इतर OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप की जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणी को 'तथ्यों से परे और गैर-जरूरी' बताकर नकार दिया। MEA ने दो-टूक कहा — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं, और OIC को पाकिस्तान को आतंकवाद पर लगाम लगाने की सलाह देनी चाहिए।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 23 सितंबर 2026 को OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप के जम्मू-कश्मीर संबंधी संयुक्त बयान को पूरी तरह खारिज किया।
MEA ने कहा — ' जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं।' OIC की बैठक UNGA के 81वें सत्र के इतर आयोजित हुई थी।
भारत ने पाकिस्तान को अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों से पनप रहे आतंकवाद से निपटने की सलाह दी।
MEA ने OIC पर ऐसे बयानों को बार-बार समर्थन देने से उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की चेतावनी दी।

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 23 सितंबर 2026 को इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के कॉन्टैक्ट ग्रुप द्वारा जम्मू-कश्मीर पर जारी संयुक्त बयान को पूरी तरह खारिज करते हुए उसे 'गैर-जरूरी और तथ्यों के लिहाज से गलत' करार दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और OIC को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

बुधवार, 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के इतर OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप की एक बैठक आयोजित हुई, जिसमें समूह ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी की। इसी के जवाब में MEA ने त्वरित और कड़ा बयान जारी किया।

भारत का आधिकारिक रुख

MEA ने अपने बयान में कहा, 'भारत, जम्मू-कश्मीर पर तथाकथित OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप के संयुक्त बयान में भारत के बारे में की गई गैर-जरूरी और तथ्यों के लिहाज से गलत टिप्पणियों को पूरी तरह से खारिज करता है।' मंत्रालय ने आगे कहा कि 'OIC के पास उन मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार या आधार नहीं है जो पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है।'

मंत्रालय ने यह भी जोड़ा कि 'राजनीतिक मकसद से किए जा रहे दुष्प्रचार को बार-बार दोहराने से यह सच्चाई नहीं बदल सकती।' MEA ने चेताया कि 'ऐसे मकसद वाले बयानों का बार-बार समर्थन करने से OIC की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं।'

पाकिस्तान को भी फटकार

भारत ने इस अवसर पर पाकिस्तान को भी आड़े हाथों लिया। MEA ने कहा कि 'पाकिस्तान को अपना मनगढ़ंत और गलत मकसद से प्रेरित दुष्प्रचार फैलाने के लिए मंच देने के बजाय, OIC के लिए बेहतर होगा कि वह पाकिस्तान को सलाह दे कि वह आत्म-मंथन करे और अपने नियंत्रण वाले इलाकों से पनप रहे आतंकवाद के लगातार खतरे से निपटे।' मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान का आतंकवाद को समर्थन और प्रयोजित करने का इतिहास पुराना है।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप वर्षों से जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर बयानबाजी करता आया है और भारत हर बार ऐसी टिप्पणियों को दृढ़ता से अस्वीकार करता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब UNGA के वार्षिक सत्र में कई देश कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिश करते हैं। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से भारत का यह स्पष्ट और अटल रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है।

आगे की संभावनाएँ

भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया UNGA सत्र के दौरान कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनने की संभावना है। विश्लेषकों के अनुसार, नई दिल्ली की ओर से इस तरह की त्वरित और स्पष्टवादी प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि भारत बहुपक्षीय मंचों पर भी अपने संप्रभु अधिकारों से समझौते के लिए तैयार नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि OIC के अधिकांश सदस्य देशों के भारत के साथ मजबूत द्विपक्षीय आर्थिक और कूटनीतिक संबंध हैं — जो इन बयानों की व्यावहारिक प्रासंगिकता को सीमित करते हैं। भारत की तीखी और तत्काल प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि नई दिल्ली बहुपक्षीय मंचों को 'सामान्य शोर' मानकर अनदेखा करने की रणनीति छोड़ चुकी है और अब सार्वजनिक रूप से जवाबी कथा गढ़ने को प्राथमिकता दे रही है। असली सवाल यह है कि क्या यह कूटनीतिक स्पष्टवादिता OIC के भीतर अलगाव पैदा करती है — या भारत के बढ़ते वैश्विक कद के चलते ये बयान खुद ही निर्थक होते जाएँगे।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप ने जम्मू-कश्मीर पर क्या कहा था?
OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप ने 23 सितंबर 2026 को UNGA के 81वें सत्र के इतर आयोजित बैठक में जम्मू-कश्मीर से जुड़े भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया। भारत ने इसे 'गैर-जरूरी और तथ्यों से परे' बताकर तुरंत खारिज कर दिया।
विदेश मंत्रालय ने OIC के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
MEA ने कड़ा बयान जारी कर कहा कि OIC को भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी करने का कोई अधिकार या आधार नहीं है। मंत्रालय ने यह भी चेताया कि ऐसे बयानों का बार-बार समर्थन OIC की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
भारत ने पाकिस्तान को OIC के संदर्भ में क्या कहा?
MEA ने OIC को सलाह दी कि वह पाकिस्तान को मनगढ़ंत दुष्प्रचार के लिए मंच देने के बजाय उसे अपने नियंत्रण वाले इलाकों से पनप रहे आतंकवाद से निपटने की नसीहत दे। मंत्रालय ने पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन और प्रायोजित करने के पुराने इतिहास का भी उल्लेख किया।
क्या जम्मू-कश्मीर पर OIC की टिप्पणी पहले भी आती रही है?
हाँ, OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से नियमित रूप से जम्मू-कश्मीर पर बयान जारी करता रहा है। भारत हर बार इन्हें अपने संप्रभु अधिकारों में अनुचित हस्तक्षेप बताकर खारिज करता आया है।
OIC क्या है और इसमें कितने देश हैं?
इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) 57 सदस्य देशों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो मुस्लिम-बहुल देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है। भारत इसका सदस्य नहीं है और कश्मीर पर इसकी किसी भी टिप्पणी को आधिकारिक रूप से अस्वीकार करता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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