ओआईसी बैठक में भारत विरोधी टिप्पणी: विदेश मंत्रालय ने कहा — 'तथ्यहीन, अस्वीकार्य, पाकिस्तान का एजेंडा'
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 19 अक्टूबर 2026 को बगदाद में आयोजित इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के विदेश मंत्रियों की बैठक में की गई भारत-विरोधी टिप्पणियों को दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण और तथ्यहीन करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान ने अपने संकीर्ण और कट्टरपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए एक बार फिर इस बहुपक्षीय मंच का दुरुपयोग किया है। यह बैठक 17-18 अक्टूबर 2026 को आयोजित हुई थी।
मुख्य घटनाक्रम
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि ओआईसी को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। बयान में जोर देकर कहा गया, 'जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। राजनीतिक उद्देश्यों से फैलाया गया दुष्प्रचार इस वास्तविकता को नहीं बदल सकता।'
भारत ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में उल्लेखनीय आर्थिक विकास हुआ है और बुनियादी ढाँचे, पर्यटन तथा संपर्क सुविधाओं के विस्तार से वहाँ की जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
पाकिस्तान पर पलटवार
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) की स्थिति पर तीखे सवाल उठाए। बयान में आरोप लगाया गया कि पाकिस्तान ने वहाँ नागरिक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा, दमन और बर्बरता का सहारा लिया है। भारत ने कहा, 'इस दौरान महिलाओं और बच्चों सहित कई लोगों की जान गई। मीडिया पर पाबंदियों के बावजूद मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन को छिपाया नहीं जा सका।'
भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित केवल दो मुद्दे अभी भी लंबित हैं — पहला, पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए क्षेत्रों को खाली करना, और दूसरा, सीमा पार आतंकवाद को दिया जाने वाला निरंतर समर्थन बंद करना।
इस्लामोफोबिया के आरोप भी नकारे
विदेश मंत्रालय ने ओआईसी प्रस्तावों में भारत के विरुद्ध लगाए गए इस्लामोफोबिया से संबंधित आरोपों को भी सिरे से खारिज किया। भारत का कहना है कि ये आरोप पाकिस्तान द्वारा अपने ही देश में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न, सांप्रदायिक हिंसा, शासन की विफलताओं और राजनीतिक अस्थिरता से अंतरराष्ट्रीय ध्यान भटकाने की हताश कोशिश हैं।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भारत ने ओआईसी की टिप्पणियों को अस्वीकार किया हो। भारत ओआईसी का सदस्य नहीं है और इस मंच पर पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दे को बार-बार उठाए जाने को नई दिल्ली लगातार खारिज करती रही है।
ओआईसी की विश्वसनीयता पर सवाल
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'पाकिस्तान की ओर से फैलाए जा रहे दुर्भावनापूर्ण प्रचार का ओआईसी द्वारा बार-बार समर्थन किया जाना संगठन की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।' भारत ने उम्मीद जताई कि ओआईसी के सदस्य देश संगठन की कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाएँगे।
आगे की स्थिति
यह राजनयिक टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बहुपक्षीय मंचों पर इस तरह की कूटनीतिक नोकझोंक से दोनों देशों के बीच संवाद की संभावनाएँ और सिकुड़ती हैं। भारत की यह दृढ़ प्रतिक्रिया संकेत देती है कि नई दिल्ली आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।