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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पी. हरीश की पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी: सीमा पार आतंकवाद के होंगे परिणाम

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पी. हरीश की पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी: सीमा पार आतंकवाद के होंगे परिणाम

सारांश

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान को दो टूक चेतावनी दी — सीमा पार आतंकवाद के परिणाम भुगतने होंगे। पी. हरीश ने पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र चार्टर-समर्थन के दावों को खोखला बताया और 1948 के प्रस्ताव 47 की अनुपालन विफलता का हवाला दिया।

मुख्य बातें

हरीश ने 27 मई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद पर कड़ी चेतावनी दी।
भारत ने कहा कि पाकिस्तान को हर तरह के आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह और हमेशा के लिए बंद करना होगा।
जम्मू-कश्मीर को भारत ने कानूनी और स्थायी रूप से अपना अभिन्न अंग बताया।
भारत ने याद दिलाया कि 21 अप्रैल 1948 के प्रस्ताव 47 की शर्तें पाकिस्तान ने कभी पूरी नहीं कीं।
पाकिस्तान के 'हिंदुत्व' पर हमले वाले बयान को भारत ने कोई महत्व नहीं दिया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 27 मई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि सीमा पार आतंकवाद को प्रश्रय देने के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का पूर्ण अधिकार है और पाकिस्तान को हर प्रकार के आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह और हमेशा के लिए बंद करना होगा।

सुरक्षा परिषद में भारत का पक्ष

यह बैठक संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को सुदृढ़ करने के विषय पर आयोजित की गई थी। पी. हरीश ने पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद के भारत-विरोधी वक्तव्यों का खंडन करते हुए कहा, 'पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल और भारत को 'हजार घाव देकर कमजोर करने' की नीति उसके खोखले दावों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति उसकी कथित प्रतिबद्धता को उजागर करती है।' उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान अपने गठन के समय से ही आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता, हिंसक उग्रवाद और भारत-विरोधी बयानबाजी को लगातार बढ़ावा देता रहा है।

जम्मू-कश्मीर पर भारत का अटल रुख

पी. हरीश ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर कानूनी और स्थायी रूप से भारत का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कई युद्ध छेड़कर, बिना उकसावे के भारत पर हमला कर और निरंतर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देकर संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। गौरतलब है कि यह भारत की उस दीर्घकालिक स्थिति की पुनरावृत्ति है जो कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा मानती है, न कि बहुपक्षीय।

पाकिस्तान का दावा और उसकी वास्तविकता

आसिम इफ्तिखार अहमद ने सुरक्षा परिषद में दावा किया कि करीब आठ दशकों से जम्मू-कश्मीर मुद्दा अनसुलझा है और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव कश्मीरी लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार देने की बात करते हैं। हालाँकि, भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए इतिहास का हवाला दिया। 21 अप्रैल 1948 को पारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 में पाकिस्तान से कहा गया था कि वह कश्मीर से अपने सभी कबायली लड़ाकों, छिपे हुए सैनिकों और नागरिकों को वापस बुलाए — एक शर्त जिसे पाकिस्तान ने कभी पूरा नहीं किया। इसी कारण कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका धीरे-धीरे समाप्त होती गई।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और भारत का जवाब

बैठक समाप्त होने से ठीक पहले पाकिस्तान ने जवाब देने के अधिकार का प्रयोग करते हुए एक पूर्व-तैयार बयान पढ़ा, जिसमें 'हिंदुत्व' पर भी निशाना साधा गया। भारत ने इन टिप्पणियों को कोई महत्व नहीं दिया और उनका जवाब देना आवश्यक नहीं समझा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है और भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के आतंकवाद-समर्थन को लगातार उजागर करता रहा है।

आगे की स्थिति

भारत के इस कड़े रुख से स्पष्ट है कि नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र सहित हर वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की नीति पर अडिग है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह कूटनीतिक आक्रामकता पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें भारत पाकिस्तान को हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर घेरने की कोशिश कर रहा है। पी. हरीश का प्रस्ताव 47 का संदर्भ चतुर है — यह पाकिस्तान के आत्मनिर्णय के तर्क को उसी की अनुपालन विफलता से काटता है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य, जिनमें चीन भी शामिल है, भारत के इस रुख को ठोस समर्थन देंगे। बिना बहुपक्षीय दबाव के, ये चेतावनियाँ कूटनीतिक रिकॉर्ड में तो दर्ज होती हैं, लेकिन पाकिस्तान की नीति पर उनका व्यावहारिक असर सीमित रहता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को क्या चेतावनी दी?
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 27 मई को सुरक्षा परिषद में कहा कि पाकिस्तान को हर तरह के आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह और हमेशा के लिए बंद करना होगा, अन्यथा उसे सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को ऐसे आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है।
यह बैठक किस विषय पर आयोजित की गई थी?
यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को मजबूत करने के विषय पर आयोजित की गई थी। इसी बैठक में पाकिस्तान के प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने भारत के खिलाफ टिप्पणियाँ कीं, जिनका भारत ने कड़ा जवाब दिया।
कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 47 क्या था और पाकिस्तान ने उसका पालन क्यों नहीं किया?
21 अप्रैल 1948 को पारित प्रस्ताव 47 में पाकिस्तान से कहा गया था कि वह कश्मीर से अपने सभी कबायली लड़ाकों, छिपे हुए सैनिकों और नागरिकों को वापस बुलाए। पाकिस्तान ने इन शर्तों का पालन नहीं किया, जिससे जनमत संग्रह की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और संयुक्त राष्ट्र की कश्मीर में भूमिका धीरे-धीरे समाप्त होती गई।
भारत ने पाकिस्तान के 'हिंदुत्व' वाले बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
बैठक समाप्त होने से पहले पाकिस्तान ने जवाब देने के अधिकार का प्रयोग करते हुए 'हिंदुत्व' पर हमला बोला। भारत ने इन टिप्पणियों को कोई महत्व नहीं दिया और उनका जवाब देना आवश्यक नहीं समझा।
भारत-पाकिस्तान के बीच इस कूटनीतिक टकराव का आगे क्या असर होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत की यह कूटनीतिक आक्रामकता पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। हालाँकि, इसका व्यावहारिक असर काफी हद तक सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के रुख पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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