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भारत-पाक वार्ता पर 117 बुद्धिजीवियों की अपील का स्वागत, शेख बशीर बोले- संवाद ही एकमात्र रास्ता

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भारत-पाक वार्ता पर 117 बुद्धिजीवियों की अपील का स्वागत, शेख बशीर बोले- संवाद ही एकमात्र रास्ता

सारांश

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय सचिव शेख बशीर ने 117 प्रमुख नागरिकों की भारत-पाक संवाद अपील का समर्थन किया। 36 वर्षों की हिंसा झेल चुके जम्मू-कश्मीर की पीड़ा का हवाला देते हुए उन्होंने केंद्र सरकार से 11 साल के ठोस कदमों का हिसाब माँगा।

मुख्य बातें

शेख बशीर (प्रांतीय सचिव, नेशनल कॉन्फ्रेंस) ने 1 जुलाई को 117 बुद्धिजीवियों की भारत-पाक वार्ता अपील का स्वागत किया।
उनके अनुसार जम्मू-कश्मीर पिछले 36 वर्षों से आतंकवाद और हिंसा का दंश झेल रहा है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत को भी पहले भारत-पाक संवाद की ज़रूरत पर बोलते सुना गया है, यह शेख बशीर ने रेखांकित किया।
केंद्र सरकार से माँग — पिछले 11 वर्षों में भारत-पाक संबंध सुधारने के ठोस प्रयासों का ब्यौरा दें।
अमरनाथ यात्रा को आस्था के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोज़गार के लिए भी महत्वपूर्ण बताया।

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय सचिव शेख बशीर ने 1 जुलाई को भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सामान्य बनाने की माँग करने वाले 117 प्रमुख नागरिकों और बुद्धिजीवियों के संयुक्त पत्र का खुलकर स्वागत किया। उनका कहना है कि युद्ध कभी भी किसी विवाद का स्थायी हल नहीं बन सकता और दोनों पड़ोसी देशों के बीच सभी लंबित मुद्दों का समाधान केवल बातचीत की मेज़ पर ही संभव है।

जम्मू-कश्मीर सबसे अधिक प्रभावित

शेख बशीर ने कहा, 'भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से संबंध तनावपूर्ण रहे हैं, जिसका सबसे अधिक असर जम्मू-कश्मीर के लोगों पर पड़ा है। बीते 36 वर्षों से यह क्षेत्र आतंकवाद और हिंसा की मार झेल रहा है।' उन्होंने कहा कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान निकलेगा, लेकिन अपेक्षित बदलाव देखने को नहीं मिला।

बुद्धिजीवियों की अपील को सकारात्मक पहल

शेख बशीर ने कहा कि 'देश के 117 प्रमुख नागरिकों द्वारा दोनों देशों के रिश्ते सुधारने और संवाद शुरू करने की अपील करना स्वागतयोग्य पहल है।' उन्होंने तर्क दिया कि यदि युद्ध जैसी परिस्थितियों के बाद भी शांति और संवाद की कोशिश की जाती है, तो इसे सकारात्मक रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि भारी जानमाल के नुकसान के बावजूद अंततः समाधान की तलाश बातचीत के ज़रिए ही की जा रही है।

वैश्विक संदर्भ और भागवत का ज़िक्र

शेख बशीर ने ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सैन्य कार्रवाई किसी भी विवाद का स्थायी समाधान नहीं बन सकती। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को भी वे पहले भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद की आवश्यकता पर बोलते हुए सुन चुके हैं। उनका कहना है कि यदि बातचीत से समस्याओं का समाधान संभव है, तो इस दिशा में ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।

सरकार से जवाबदेही की माँग

शेख बशीर ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग की कि पिछले 11 वर्षों में भारत-पाकिस्तान संबंधों को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद BJP को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और वर्तमान सरकार सहयोगी दलों के समर्थन से बनी है।

अमरनाथ यात्रा पर रुख

अमरनाथ यात्रा के बारे में शेख बशीर ने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के लिए आस्था के साथ-साथ आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि यात्रा से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है और हज़ारों लोगों को रोज़गार तथा आय के अवसर प्राप्त होते हैं। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और सभी को इस यात्रा के सफल आयोजन में सहयोग देना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मोहन भागवत के संदर्भ का उल्लेख यह संकेत देता है कि बशीर दक्षिणपंथी हलकों में भी इस विचार की स्वीकार्यता तलाश रहे हैं। 11 वर्षों के ठोस प्रयासों का हिसाब माँगना सीधे केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करता है — यह विपक्षी राजनीति और शांति-वकालत का मिला-जुला रूप है जिसे महज़ कूटनीतिक बयानबाज़ी नहीं माना जाना चाहिए।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शेख बशीर ने 117 बुद्धिजीवियों के पत्र का स्वागत क्यों किया?
शेख बशीर का मानना है कि युद्ध कभी किसी विवाद का स्थायी समाधान नहीं होता और भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद की पहल सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर 36 वर्षों से हिंसा झेल रहा है और बातचीत ही इस क्षेत्र को राहत दे सकती है।
117 प्रमुख नागरिकों के पत्र में क्या माँग की गई है?
इस पत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सामान्य बनाने और दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया फिर से शुरू करने की अपील की गई है। यह पत्र देश के बुद्धिजीवियों और प्रमुख नागरिकों द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया गया है।
शेख बशीर ने केंद्र सरकार से क्या माँग की?
उन्होंने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग की कि पिछले 11 वर्षों में भारत-पाकिस्तान संबंध सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए। उनका कहना है कि BJP को 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत नहीं मिला और सरकार सहयोगी दलों के समर्थन से चल रही है।
शेख बशीर ने अमरनाथ यात्रा पर क्या कहा?
उन्होंने अमरनाथ यात्रा को जम्मू-कश्मीर के लिए आस्था और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार यात्रा से पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और हज़ारों लोगों को रोज़गार मिलता है और इसके सफल आयोजन में सभी को सहयोग देना चाहिए।
मोहन भागवत का इस संदर्भ में क्या उल्लेख किया गया?
शेख बशीर ने कहा कि वे RSS प्रमुख मोहन भागवत को पहले भी भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद की आवश्यकता पर बोलते हुए सुन चुके हैं। उन्होंने इसे इस विचार की व्यापक स्वीकार्यता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया।
राष्ट्र प्रेस
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