अमृतसर में 31वाँ हिंद-पाक दोस्ती सम्मेलन: 20 राज्यों के 400 प्रतिनिधियों ने शांति और भाईचारे का संकल्प लिया
सारांश
मुख्य बातें
अमृतसर में 14 अगस्त 2026 को आयोजित 31वें हिंद-पाक दोस्ती सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान के बीच जन-स्तरीय संवाद, शांति और आपसी विश्वास को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। देश के करीब 20 राज्यों से लगभग 400 प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया, जिनका साझा संदेश था — नफरत की दीवारें तोड़कर भाईचारे की नींव रखना।
मुख्य घटनाक्रम
सम्मेलन में बांग्लादेश-भारत-पाकिस्तान पीपुल्स फोरम के वर्किंग प्रेसीडेंट और मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक डॉ. सुनील ने कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव और नफरत को कम करने का एकमात्र टिकाऊ रास्ता आम नागरिकों के बीच संवाद और दोस्ती को बढ़ावा देना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युद्ध किसी भी देश की जनता के लिए स्थायी समाधान नहीं है।
डॉ. सुनील ने पार्टीशन म्यूजियम में दर्ज विभाजन की दर्दनाक कहानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन ने करोड़ों आम लोगों को भारी मानवीय त्रासदी झेलने पर मजबूर किया था। उनके अनुसार, इतिहास यह सिखाता है कि युद्ध और हिंसा की सबसे बड़ी कीमत हमेशा आम परिवारों को चुकानी पड़ती है।
संसाधनों के पुनर्आवंटन की माँग
डॉ. सुनील ने तर्क दिया कि यदि हथियारों और सैन्य तैयारियों पर खर्च होने वाले संसाधनों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में लगाया जाए, तो दोनों देशों के करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान को अपने राष्ट्रीय संसाधनों का बड़ा हिस्सा जनकल्याण के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।
उन्होंने बर्लिन की दीवार के गिरने और यूरोपीय संघ के गठन का उदाहरण देते हुए कहा कि इतिहास और संस्कृति से जुड़े समाज दशकों की दुश्मनी के बाद भी सहयोग की राह अपना सकते हैं। उनके अनुसार, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच साझा इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को दुश्मनी के बजाय आपसी समझ का आधार बनाया जा सकता है।
युवाओं की भूमिका
डॉ. सुनील ने युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि जिस तरह विभिन्न आंदोलनों में नई पीढ़ी ने अपनी आवाज प्रभावी ढंग से उठाई है, उसी तरह दोनों देशों में शांति चाहने वाले युवाओं को एकजुट होकर सामने आना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकारें भी जनता की शांति की इच्छा को समझेंगी।
प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया
सम्मेलन में शामिल राज स्मृति ने कहा कि आज की पीढ़ी ने विभाजन की भयावहता को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा है। पार्टीशन म्यूजियम की दर्दनाक कहानियाँ देखने के बाद उन्हें यह गहराई से महसूस हुआ कि समाज और देशों को शांति की कितनी जरूरत है।
राज स्मृति ने यह भी कहा कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान को पुरानी दुश्मनी और आपसी अविश्वास से बाहर निकलकर शांतिपूर्ण रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, आधुनिक हथियारों की आपूर्ति करने वाले देशों को आर्थिक लाभ हो सकता है, लेकिन संघर्ष में शामिल देशों की जनता को महंगाई, असुरक्षा और विस्थापन जैसी पीड़ाएँ झेलनी पड़ती हैं।
आगे की राह
सम्मेलन का उद्देश्य शांति का संदेश फैलाना और दोनों देशों में मौजूद उन आवाजों को मजबूती देना है जो आपसी सम्मान और दोस्ती की पक्षधर हैं। यह ऐसे समय में आयोजित हुआ जब भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव का दौर जारी है, और जन-स्तरीय संवाद की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।