जयशंकर के पलटवार के बाद मनीष तिवारी बोले — आतंकवाद फैलाना पाकिस्तान की दशकों पुरानी नीति
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शनिवार, 26 सितंबर 2026 को कहा कि पाकिस्तान दशकों से भारत और पूरे दक्षिण एशिया के विरुद्ध आतंकवाद को राज्य-नीति के रूप में इस्तेमाल करता आ रहा है। उनकी यह टिप्पणी विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार को दिए गए तीखे जवाब के बाद आई।
जयशंकर का जवाब — 'एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है?'
UNGA के 81वें सत्र की बैठक के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से पूछा कि भारत सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देना कब बंद करेगी। इस पर जयशंकर ने तत्काल पलटवार करते हुए कहा, 'एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है?' जवाब देने के तुरंत बाद जयशंकर और अन्य भारतीय प्रतिनिधि अपनी कुर्सियों से उठकर कमरे से बाहर चले गए, जबकि पत्रकार अपनी बात कहते रहे।
मनीष तिवारी का विश्लेषण — '1971 के बाद से पाकिस्तान की 'हजार घाव' वाली रणनीति'
तिवारी ने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'जहाँ तक पाकिस्तान की बात है, यह सभी जानते हैं कि 1971 में भारत की मदद से बांग्लादेश बनने के बाद पाकिस्तान ने भारत को 'हजार घाव देकर कमजोर करने' की रणनीति अपनाई और इसके तहत वह लगातार आतंकवाद फैलाता रहा।'
उन्होंने आगे कहा, 'पाकिस्तान एक आतंकवादी देश है, जहाँ सेना देश की नहीं है, बल्कि देश सेना का है। पाकिस्तान ने सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में आतंकवाद को बढ़ावा देना जारी रखा है।' तिवारी ने यह भी याद दिलाया कि ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी सैन्य बलों ने पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया था — जो इस बात का पुख्ता सबूत है कि पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह देता है।
सिंधु जल संधि पर तिवारी का रुख
तिवारी ने सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत का संधि को फिलहाल रोककर रखने का निर्णय एक सुनियोजित कूटनीतिक कदम है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान को यह संदेश देना है कि यदि वह भारत-विरोधी आतंकवाद जारी रखता है, तो उसे गंभीर नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को UNGA में अपने संबोधन में शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के भारत के कदम को चुनौती देते हुए कहा था कि इसका कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी, 'पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रास्ता बदलने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। भारत को इस बारे में कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।'
व्यापक संदर्भ — भारत-पाकिस्तान तनाव और UNGA मंच
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध कूटनीतिक और जल विवाद दोनों मोर्चों पर तनावपूर्ण हैं। UNGA का मंच ऐतिहासिक रूप से दोनों देशों के बीच वाकयुद्ध का गवाह बनता रहा है, किंतु इस बार जयशंकर की तात्कालिक प्रतिक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया है। तिवारी का बयान — एक विपक्षी दल के नेता का — यह दर्शाता है कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत में सर्वदलीय सहमति का स्वर मजबूत बना हुआ है।
आगे क्या
UNGA सत्र के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। सिंधु जल संधि पर शरीफ की आक्रामक भाषा और भारत की जवाबी कूटनीतिक रणनीति — दोनों आने वाले हफ्तों में दक्षिण एशियाई राजनय की दिशा तय करेंगे।