4 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आतंकवाद बंद करे पाकिस्तान, तभी होगी बातचीत: कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का कड़ा रुख

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आतंकवाद बंद करे पाकिस्तान, तभी होगी बातचीत: कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का कड़ा रुख

सारांश

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने साफ कहा — पाकिस्तान से बातचीत तभी जब आतंकवाद बंद हो। 1971 की हार से उपजी बदले की भावना, 91 हज़ार युद्धबंदी, बैसारन में 26 की हत्या और टूटे वादों की लंबी फेहरिस्त — तिवारी का यह बयान उमर अब्दुल्ला के संवाद-समर्थक रुख के सीधे जवाब में आया।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 4 जुलाई को चंडीगढ़ में कहा कि पाकिस्तान के आतंकवाद बंद किए बिना बातचीत का कोई अर्थ नहीं।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को भारत-पाकिस्तान संवाद की पुनर्शुरुआत का समर्थन किया था।
तिवारी ने कहा कि 1971 से पाकिस्तान बदले की भावना पाले है; भारत ने तब 91 हज़ार पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाया था।
बैसारन हमले में 26 लोगों की हत्या धर्म पूछकर किए जाने का उन्होंने विशेष उल्लेख किया।
जनरल मुशर्रफ , मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में किए गए पाकिस्तानी वादों को कभी पूरा न किए जाने का हवाला दिया।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शनिवार, 4 जुलाई को चंडीगढ़ में स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को प्रायोजित करना बंद नहीं करता, तब तक इस्लामाबाद के साथ किसी भी बातचीत का कोई औचित्य नहीं है। उनका यह बयान उस समय आया जब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को भारत-पाकिस्तान संवाद की पुनर्शुरुआत के पक्ष में बयान दिया था।

उमर अब्दुल्ला के बयान पर तिवारी की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि दोनों देशों के बीच टकराव पिछले 30 से 40 वर्षों से जारी है और पहलगाम हमले के बाद यह और गहरा हो गया। उन्होंने कहा था कि यदि उद्देश्य रिश्ते सुधारना है, तो बातचीत पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इसी बयान के जवाब में तिवारी ने अपना तीखा रुख सामने रखा।

1971 से चली आ रही बदले की भावना

तिवारी ने कहा, '1971 में जब भारत ने बांग्लादेश बनाने में मदद की, तब से पाकिस्तान बदले की भावना पाले हुए है। उस समय पूर्वी पाकिस्तान के लोगों पर पश्चिमी पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के कारण उन्हें सरेंडर करना पड़ा था और भारत ने लगभग 91 हज़ार पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाया था। तब से वे बदला लेने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान की रणनीति 'भारत को हज़ार घाव देकर लहूलुहान करने' की रही है और वह बार-बार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है।

पहलगाम हमले का संदर्भ

बैसारन हमले का उल्लेख करते हुए तिवारी ने कहा, 'उस हमले में 26 लोगों की हत्या उनका धर्म पूछकर की गई थी। भारत को यह इतनी जल्दी नहीं भूलना चाहिए।' उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भारत पाकिस्तान से किस विषय पर बात करना चाहता है — और स्वयं ही उत्तर दिया कि भारत की एकमात्र माँग यह है कि पाकिस्तान आतंकवाद को प्रायोजित करना बंद करे।

टूटे वादों का इतिहास

तिवारी ने पिछले समझौतों का हवाला देते हुए कहा, 'क्या पाकिस्तान में किसी ने इस बात की गारंटी दी है कि उसकी ज़मीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए नहीं होगा? जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने अटल बिहारी वाजपेयी को भरोसा दिलाया था, और बाद में मनमोहन सिंह तथा नरेंद्र मोदी से भी ऐसे ही वादे किए गए — लेकिन उन वादों को कभी पूरा नहीं किया गया।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संबंध अत्यंत तनावपूर्ण दौर में हैं।

आगे क्या

तिवारी के इस बयान ने विपक्ष के भीतर भी पाकिस्तान नीति पर एकराय की जटिलता को उजागर किया है। गौरतलब है कि यह बहस ऐसे समय में तेज हो रही है जब केंद्र सरकार की ओर से पाकिस्तान के साथ किसी भी औपचारिक संवाद पर अभी तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह कांग्रेस के भीतर की उस दरार को उजागर करता है जहाँ उमर अब्दुल्ला जैसे सहयोगी संवाद के पक्ष में हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेता सख्त शर्तें लगा रहे हैं। यह विरोधाभास विपक्ष की पाकिस्तान नीति को अस्पष्ट बनाता है। मुशर्रफ से मोदी तक टूटे वादों की जो फेहरिस्त तिवारी ने गिनाई, वह तथ्यात्मक रूप से सही है — लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं पूछती कि बिना किसी सत्यापन-तंत्र के 'आतंकवाद बंद करो' की शर्त को कैसे परखा जाएगा।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीष तिवारी ने पाकिस्तान से बातचीत पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 4 जुलाई को कहा कि जब तक पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को प्रायोजित करना बंद नहीं करता, तब तक इस्लामाबाद से किसी भी बातचीत का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने यह बयान जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के संवाद-समर्थक रुख के जवाब में दिया।
उमर अब्दुल्ला ने भारत-पाकिस्तान बातचीत पर क्या कहा था?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा था कि दोनों देशों के बीच टकराव 30 से 40 साल पुराना है और यदि उद्देश्य रिश्ते सुधारना है, तो बातचीत पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। पहलगाम हमले के बाद यह तनाव और बढ़ गया था।
तिवारी ने 1971 का संदर्भ क्यों दिया?
तिवारी के अनुसार 1971 में भारत ने बांग्लादेश बनाने में मदद की और लगभग 91 हज़ार पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाया, जिसके बाद से पाकिस्तान बदले की भावना से 'भारत को हज़ार घाव देने' की रणनीति पर चल रहा है। उन्होंने इसे आतंकवाद के निरंतर प्रायोजन की ऐतिहासिक जड़ बताया।
बैसारन हमले में क्या हुआ था जिसका तिवारी ने जिक्र किया?
तिवारी ने कहा कि पहलगाम के बैसारन में हुए हमले में 26 लोगों की हत्या उनका धर्म पूछने के बाद की गई थी। उन्होंने इस घटना को भारत-पाकिस्तान बातचीत की बहस में केंद्रीय तर्क के रूप में रखा।
पाकिस्तान के किन नेताओं के वादों का तिवारी ने हवाला दिया?
तिवारी ने कहा कि जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने अटल बिहारी वाजपेयी को, और बाद में मनमोहन सिंह तथा नरेंद्र मोदी को भी भरोसा दिलाया था कि पाकिस्तानी ज़मीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ये वादे कभी पूरे नहीं किए गए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 दिन पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 2 दिन पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले