दिल्ली: संगीतकार रवि डे का शव पांच दिन घर में पड़ा रहा, बदबू आने पर पुलिस ने तोड़ा ताला
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के कालकाजी थाना क्षेत्र के गोविंदपुरी एक्सटेंशन इलाके से एक अत्यंत पीड़ादायक मामला प्रकाश में आया है। मशहूर संगीतकार रवि डे का शव उनके किराए के मकान में करीब पांच दिनों तक पड़ा रहा और तब जाकर पड़ोसियों ने घर से उठती तेज दुर्गंध के आधार पर पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ताला तोड़ा और शव बरामद किया।
घटनाक्रम: कैसे हुआ खुलासा
रवि डे गोविंदपुरी एक्सटेंशन स्थित एक किराए के मकान में अकेले निवास करते थे। उनकी मृत्यु के बाद कई दिनों तक न तो परिजनों ने उनकी खोज-खबर ली और न ही कोई संपर्क में आया। 14 अगस्त को जब मकान से तीव्र दुर्गंध उठने लगी, तब स्थानीय निवासियों ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और दरवाजे का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया। अंदर रवि डे का शव मिला, जो लंबे समय से बंद कमरे में पड़े रहने के कारण काफी हद तक विघटित हो चुका था और उसमें कीड़े भी लग चुके थे।
पोस्टमार्टम और जांच की स्थिति
पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद 16 अगस्त को शव का पोस्टमार्टम कराया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक स्तर पर इसे स्वाभाविक मृत्यु का मामला माना जा रहा है, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के सटीक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
परिजनों की उदासीनता: बेटों ने पहले किया इनकार
सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में रवि डे के बेटों ने पुलिस को बताया कि उनका अपने पिता से कोई संबंध नहीं है और वे शव लेने के लिए भी नहीं आए। बाद में पुलिस अधिकारियों के समझाने पर परिजन आगे आए और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव उनके बेटों को सौंप दिया गया।
बुजुर्गों की एकाकी मृत्यु: बढ़ती चिंताजनक प्रवृत्ति
यह ऐसे समय में सामने आया है जब देश में बुजुर्गों की उपेक्षा और एकाकी मृत्यु के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि हाल ही में सोनीपत से भी एक मिलता-जुलता मामला चर्चा में आया था, जहां एक आश्रम में रह रहे बुजुर्ग की मृत्यु के बाद उनकी तीन बेटियों में से कोई भी अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई थी। एक बेटी द्वारा वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार देखे जाने का वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया था।
इस प्रकार की घटनाएं बुजुर्गों के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी और पारिवारिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। मामले में आगे की जांच जारी है।