वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी की चार मंजिला इमारत से गिरकर मौत, पुलिस जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
वृंदावन के वराह घाट इलाके में स्थित गुरु कृपा कुंज में 26 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 12.30 बजे एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक बिहारी शरण — जिनका वास्तविक नाम दीपक लोधी था — की साधकों के चार मंजिला आवास से गिरने के बाद मौत हो गई। मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी दीपक लोधी करीब दो वर्षों से प्रेमानंद महाराज के पास साधक के रूप में रह रहे थे।
घटनाक्रम और पुलिस की प्रारंभिक कार्यवाही
पुलिस अधीक्षक (एसपी) सिटी राजीव कुमार सिंह ने पुष्टि करते हुए बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुँची। प्रथम दृष्टया मामला चार मंजिला इमारत से स्वयं कूदने का प्रतीत होता है, हालाँकि किन परिस्थितियों और किस मानसिक स्थिति में यह कदम उठाया गया, यह जाँच का विषय है। पुलिस ने घटनास्थल से फॉरेंसिक साक्ष्य और मोबाइल फोन से डिजिटल सबूत एकत्र किए हैं।
एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह ने यह भी बताया कि पुलिस को एक प्रार्थना पत्र भी प्राप्त हुआ है, जिसके आधार पर जाँच आगे बढ़ाई जाएगी। पंचनामा की कार्यवाही पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।
परिवार की व्यथा और आश्रम पर आरोप
दीपक लोधी के परिजन जबलपुर से रात करीब 3 बजे मथुरा पहुँचे। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि उन्हें फोन पर केवल यह सूचना दी गई थी कि दीपक गिर गए हैं और उनका ऑपरेशन चल रहा है। परिजन पहले प्रेमानंद महाराज के आश्रम गए, जहाँ उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई और केवल बाहर प्रतीक्षा करने को कहा गया।
परिजनों का कहना है कि सुबह 9 बजे तक वे आश्रम के बाहर बैठे रहे, लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया। इसके बाद वे अस्पताल पहुँचे। दीपक की बहन ने बताया कि उन्हें फोन पर कहा गया था कि 'दीपक गिर गए हैं, ऑपरेशन हो रहा है, जल्दी आ जाएँ।'
परिवार के संपर्क पर पाबंदी का दावा
परिवार ने यह भी दावा किया कि दीपक द्वारा 'गुरु दक्षिणा' लेने के बाद से परिवार के सदस्यों को उनसे मिलने नहीं दिया जाता था। परिजनों के अनुसार, दीपक का मोबाइल फोन ले लिया गया था, जिस कारण उनसे फोन पर भी बात नहीं हो पाती थी। यह दावा अभी पुलिस जाँच के दायरे में है और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
जाँच की दिशा
पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि मामले की सभी संभावित दिशाओं से जाँच की जा रही है — जिसमें मानसिक स्थिति, परिस्थितियाँ और प्राप्त प्रार्थना पत्र शामिल हैं। फॉरेंसिक टीम द्वारा एकत्र किए गए डिजिटल साक्ष्यों की विश्लेषण प्रक्रिया जारी है। जाँच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्यवाही तय होगी।