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भारत-पाक वार्ता अपील पर BJP का कड़ा रुख: सीमा पार आतंकवाद बंद हो, तभी होगी बातचीत

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भारत-पाक वार्ता अपील पर BJP का कड़ा रुख: सीमा पार आतंकवाद बंद हो, तभी होगी बातचीत

सारांश

भारत-पाक के 100 से अधिक नागरिकों की वार्ता बहाली की अपील पर BJP ने एक स्वर में कहा — पहले सीमा पार आतंकवाद बंद हो। ऑपरेशन सिंदूर के बाद के इस तनावपूर्ण दौर में पार्टी ने साफ किया कि संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा।

मुख्य बातें

भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने PM नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ को पत्र लिखकर वार्ता बहाल करने की अपील की।
BJP के राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा ने कहा — सार्थक बातचीत तभी संभव है जब पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद बंद करे।
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' समाप्त नहीं, केवल स्थगित है।
BJP प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने स्पष्ट किया कि सरकार देश की संप्रभुता और गरिमा से कोई समझौता नहीं करेगी।
BJP नेता नारायण दत्त त्रिपाठी ने वाजपेयी-युग की शांति पहलों का हवाला देते हुए पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

नई दिल्ली, 2 जुलाई 2025 — भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक著名 नागरिकों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को लिखे गए संयुक्त पत्र — जिसमें दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल करने और सामान्य संबंध स्थापित करने की अपील की गई है — पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने तीखी और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। BJP का एकमत संदेश है: सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह बंद हो, उसके बाद ही कोई सार्थक वार्ता संभव है।

BJP नेताओं का रुख

BJP के राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा ने कहा, 'भारत ने कब कहा कि वह शांति नहीं चाहता? पाकिस्तान एक तरफ शांति की बात करता है और दूसरी तरफ घुसपैठ, सीमा पार फायरिंग और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। भारत ने सिर्फ इतना कहा है कि सार्थक बातचीत तभी हो सकती है, जब पाकिस्तान आतंकवाद को प्रायोजित करना बंद करे।' उन्होंने यह भी कहा कि पत्र लिखने वालों को पाकिस्तान जाकर वहाँ भी यही संदेश देना चाहिए।

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा कि सरकार संवेदनशील है और विदेश मंत्रालय सभी मुद्दों पर लगातार नज़र रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'लोगों को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन सरकार देश के सम्मान, गरिमा और संप्रभुता से कोई समझौता किए बिना आगे बढ़ती है।'

पत्र लिखने वालों पर सवाल

बिहार BJP प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले लोगों की पहचान और मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'ये 117 लोग कौन हैं? इनमें फारूक अब्दुल्ला, राजद के नेता और ऐसे लोग शामिल हैं, जो कश्मीर के मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान जैसी सोच रखते हैं।' सरावगी ने यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि 'ऑपरेशन सिंदूर' समाप्त नहीं हुआ, बल्कि केवल फिलहाल स्थगित किया गया है।

ऐतिहासिक संदर्भ और विश्वास का सवाल

BJP नेता नारायण दत्त त्रिपाठी ने पाकिस्तान के साथ वार्ता के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी पाकिस्तान के साथ शांति पहल की थी — बस सेवा शुरू की, कई बार पाकिस्तान गए — लेकिन नतीजे निराशाजनक रहे। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान से बातचीत करना बुरी बात नहीं है, लेकिन कौन भरोसा कर सकता है कि वे अपनी बात पर कायम रहेंगे? ऐसी बातचीत पहले भी कई बार हो चुकी है।' यह टिप्पणी पाकिस्तान के साथ दशकों की कूटनीतिक विफलताओं की ओर संकेत करती है।

शांति की वकालत, लेकिन शर्तों के साथ

बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने भारत की शांतिप्रिय छवि को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत को शांति का दूत कहा जाता है और यही कारण है कि देश विश्व गुरु का सपना देखता है। उन्होंने कहा, 'अगर किसी तरह की शांति की बात होती है, तो भारत उसमें सबसे अग्रणी रहेगा।' यह ऐसे समय में आया है जब ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव अभी पूरी तरह कम नहीं हुआ है।

आगे की स्थिति

गौरतलब है कि यह पत्र ऐसे नाजुक दौर में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध लगभग ठप हैं। BJP के एकजुट रुख को देखते हुए निकट भविष्य में भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक वार्ता पहल की संभावना कम दिखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, भारत की शर्त नहीं बदलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तभी दोनों देशों ने अनौपचारिक संघर्षविराम को स्वीकार किया — जो खुद इस शर्त की सीमा को उजागर करता है। 117 हस्ताक्षरकर्ताओं की पहचान पर सवाल उठाना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन नागरिक समाज की आवाज़ को खारिज करने से कूटनीतिक लचीलापन और सिकुड़ता है। असली परीक्षा यह है कि क्या भारत 'आतंकवाद बंद हो' की शर्त को सत्यापन-योग्य मानकों से परिभाषित कर सकता है, या यह शर्त अनिश्चितकाल तक वार्ता को टालने का औजार बनी रहेगी।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-पाकिस्तान वार्ता बहाली की अपील किसने और क्यों की?
भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संयुक्त पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू करने और सामान्य संबंध बहाल करने की अपील की। यह पत्र ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव की पृष्ठभूमि में आया है।
BJP ने इस अपील पर क्या प्रतिक्रिया दी?
BJP नेताओं ने एकमत से कहा कि भारत शांति के खिलाफ नहीं है, लेकिन सार्थक वार्ता तभी संभव है जब पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद, घुसपैठ और फायरिंग पूरी तरह बंद करे। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि देश की संप्रभुता और गरिमा से कोई समझौता नहीं होगा।
ऑपरेशन सिंदूर का इस संदर्भ में क्या महत्व है?
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर समाप्त नहीं हुआ, बल्कि केवल फिलहाल स्थगित किया गया है। इसका अर्थ यह है कि भारत सैन्य विकल्प को पूरी तरह बंद नहीं मानता।
क्या भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी शांति वार्ता की कोशिश हो चुकी है?
हाँ, BJP नेता नारायण दत्त त्रिपाठी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहलों का उल्लेख किया — जिन्होंने बस सेवा शुरू की और कई बार पाकिस्तान गए — लेकिन नतीजे अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। यह इतिहास पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल खड़ा करता है।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 117 लोग कौन हैं?
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी के अनुसार, इनमें फारूक अब्दुल्ला, राजद के नेता और ऐसे लोग शामिल हैं जो कश्मीर मुद्दे पर विशेष दृष्टिकोण रखते हैं। हालाँकि, पत्र पर हस्ताक्षरकर्ताओं की पूरी सूची और उनका विस्तृत परिचय स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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