भारत-पाक वार्ता अपील पर BJP का कड़ा रुख: सीमा पार आतंकवाद बंद हो, तभी होगी बातचीत
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 2 जुलाई 2025 — भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक著名 नागरिकों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को लिखे गए संयुक्त पत्र — जिसमें दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल करने और सामान्य संबंध स्थापित करने की अपील की गई है — पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने तीखी और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। BJP का एकमत संदेश है: सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह बंद हो, उसके बाद ही कोई सार्थक वार्ता संभव है।
BJP नेताओं का रुख
BJP के राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा ने कहा, 'भारत ने कब कहा कि वह शांति नहीं चाहता? पाकिस्तान एक तरफ शांति की बात करता है और दूसरी तरफ घुसपैठ, सीमा पार फायरिंग और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। भारत ने सिर्फ इतना कहा है कि सार्थक बातचीत तभी हो सकती है, जब पाकिस्तान आतंकवाद को प्रायोजित करना बंद करे।' उन्होंने यह भी कहा कि पत्र लिखने वालों को पाकिस्तान जाकर वहाँ भी यही संदेश देना चाहिए।
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा कि सरकार संवेदनशील है और विदेश मंत्रालय सभी मुद्दों पर लगातार नज़र रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'लोगों को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन सरकार देश के सम्मान, गरिमा और संप्रभुता से कोई समझौता किए बिना आगे बढ़ती है।'
पत्र लिखने वालों पर सवाल
बिहार BJP प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले लोगों की पहचान और मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'ये 117 लोग कौन हैं? इनमें फारूक अब्दुल्ला, राजद के नेता और ऐसे लोग शामिल हैं, जो कश्मीर के मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान जैसी सोच रखते हैं।' सरावगी ने यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि 'ऑपरेशन सिंदूर' समाप्त नहीं हुआ, बल्कि केवल फिलहाल स्थगित किया गया है।
ऐतिहासिक संदर्भ और विश्वास का सवाल
BJP नेता नारायण दत्त त्रिपाठी ने पाकिस्तान के साथ वार्ता के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी पाकिस्तान के साथ शांति पहल की थी — बस सेवा शुरू की, कई बार पाकिस्तान गए — लेकिन नतीजे निराशाजनक रहे। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान से बातचीत करना बुरी बात नहीं है, लेकिन कौन भरोसा कर सकता है कि वे अपनी बात पर कायम रहेंगे? ऐसी बातचीत पहले भी कई बार हो चुकी है।' यह टिप्पणी पाकिस्तान के साथ दशकों की कूटनीतिक विफलताओं की ओर संकेत करती है।
शांति की वकालत, लेकिन शर्तों के साथ
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने भारत की शांतिप्रिय छवि को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत को शांति का दूत कहा जाता है और यही कारण है कि देश विश्व गुरु का सपना देखता है। उन्होंने कहा, 'अगर किसी तरह की शांति की बात होती है, तो भारत उसमें सबसे अग्रणी रहेगा।' यह ऐसे समय में आया है जब ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव अभी पूरी तरह कम नहीं हुआ है।
आगे की स्थिति
गौरतलब है कि यह पत्र ऐसे नाजुक दौर में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध लगभग ठप हैं। BJP के एकजुट रुख को देखते हुए निकट भविष्य में भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक वार्ता पहल की संभावना कम दिखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, भारत की शर्त नहीं बदलेगी।