2 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पूर्व राजदूत ओपी शाह बोले — 'जंग विकल्प नहीं', भारत-पाक संवाद के लिए 117 हस्तियों ने लिखा खुला पत्र

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पूर्व राजदूत ओपी शाह बोले — 'जंग विकल्प नहीं', भारत-पाक संवाद के लिए 117 हस्तियों ने लिखा खुला पत्र

सारांश

भारत और पाकिस्तान की 117 著名 हस्तियों ने दोनों प्रधानमंत्रियों को खुला पत्र लिखा है — और इसके समन्वयक पूर्व राजदूत ओपी शाह का संदेश सीधा है: जंग कोई विकल्प नहीं, बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। यह पहल सरकारी चैनलों के बाहर से आ रही है, ऐसे वक्त में जब दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क लगभग शून्य है।

मुख्य बातें

पूर्व राजदूत ओपी शाह ने 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में भारत-पाकिस्तान संवाद बहाली की वकालत की।
भारत और पाकिस्तान की 117 著名 हस्तियों ने PM नरेंद्र मोदी और PM शहबाज शरीफ को खुला पत्र लिखा।
शाह ने कहा कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच कोई उच्चायुक्त नहीं , हवाई संपर्क नहीं और सामान्य बातचीत भी बंद है।
उन्होंने पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद को भारत की वास्तविक समस्या माना, लेकिन कहा कि इसका समाधान भी बातचीत से ही निकलेगा।
शाह ने किसी राजनीतिक दल का पक्ष लेने से इनकार करते हुए कहा कि 'जो भी PM बने, पाकिस्तान से बेहतर रिश्ते होने चाहिए।'

पूर्व राजदूत और सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस के अध्यक्ष ओपी शाह ने 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि युद्ध कभी भी कोई विकल्प नहीं हो सकता और भारत तथा पाकिस्तान के बीच बातचीत की बहाली अब अपरिहार्य है। यह बयान उस खुले पत्र के संदर्भ में आया जिस पर भारत और पाकिस्तान की कुल 117 著名 हस्तियों ने हस्ताक्षर किए हैं और जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संबोधित है।

खुले पत्र की पृष्ठभूमि

दोनों देशों के सामाजिक कार्यकर्ताओं, पूर्व राजनयिकों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र के मुख्य समन्वयक ओपी शाह ने कहा, 'भारतीय उपमहाद्वीप में भरोसे का माहौल बनाने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंध होने चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि दोनों देशों के संबंध सामान्य होते हैं तो इसका लाभ भारतीयों और पाकिस्तानियों — दोनों को मिलेगा। उन्होंने कहा, 'आपको यह बताने के लिए किसी रॉकेट साइंटिस्ट की जरूरत नहीं है कि जंग कोई विकल्प नहीं है।'

मौजूदा द्विपक्षीय स्थिति

शाह ने रेखांकित किया कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध लगभग ठप हैं। उन्होंने कहा, 'हमारा वहां कोई उच्चायुक्त नहीं है और उनका यहां कोई उच्चायोग नहीं है। हमारे विमान पाकिस्तान नहीं जाते और उनके विमान भारत नहीं आ सकते।' यह ऐसे समय में आया है जब ऑपरेशन सिंदूर के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर रहा है। गौरतलब है कि यह पहल नागरिक समाज स्तर पर आ रही है, न कि सरकारी चैनलों से।

राजनीतिक तटस्थता और कश्मीर प्रश्न

जब उनसे पूछा गया कि क्या मोदी सरकार भारत-पाकिस्तान शांति प्रक्रिया के विरुद्ध है, तो शाह ने कहा, 'यह सवाल सरकार से पूछा जाना चाहिए।' उन्होंने किसी भी दल विशेष का पक्ष लेने से इनकार किया और कहा कि वे चाहते हैं कि 'जो भी भारत का प्रधानमंत्री बने, उसके पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्ते हों।' अनुच्छेद 370 पर उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस विषय पर फैसला सुना दिया है, हालाँकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिस तरह से इसे हटाया गया उससे नागरिक समाज संतुष्ट नहीं था।

आतंकवाद और ट्रैक-2 बातचीत

पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद के सवाल पर शाह ने स्वीकार किया, 'यह भारत के लिए एक समस्या है — इसमें कोई शक नहीं।' उन्होंने कहा कि इसी कारण दोनों सरकारों के बीच सीधी बातचीत आवश्यक है ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके। ट्रैक-2 बातचीत के बारे में उन्होंने बताया कि वे नियमित रूप से कई पाकिस्तानी नागरिकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संपर्क में हैं और 'वे सभी करीबी और बेहतर संबंध चाहते हैं।'

शहीदों की श्रद्धांजलि और शांति का तर्क

जब यह सवाल उठाया गया कि क्या ट्रैक-2 बातचीत शहीदों के परिवारों के साथ अपमान होगी, तो शाह ने कहा, 'असल में, शहीदों को असली श्रद्धांजलि तब होगी जब हम ऐसी स्थिति बनाएं जिसमें कोई मारा न जाए।' क्रिकेट संबंधों पर भी उन्होंने कहा कि यह केवल खेल का नहीं बल्कि व्यापक रिश्तों को सामान्य बनाने का प्रश्न है। दोनों देशों के बीच संवाद की यह माँग ऐसे समय में उठ रही है जब नागरिक समाज की आवाज़ें सरकारी रुख से स्वतंत्र होकर एक अलग रास्ता सुझा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों सरकारें इसे राजनीतिक दबाव मानती हैं या केवल नागरिक समाज का एक और प्रयास।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्व राजदूत ओपी शाह ने भारत-पाकिस्तान संवाद के लिए क्या अपील की है?
ओपी शाह ने कहा है कि युद्ध कोई विकल्प नहीं है और दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को बातचीत शुरू करनी चाहिए। वे उस खुले पत्र के मुख्य समन्वयक हैं जिस पर दोनों देशों की 117 著名 हस्तियों ने हस्ताक्षर किए हैं।
भारत-पाकिस्तान के 117 हस्तियों के खुले पत्र में क्या माँग की गई है?
इस पत्र में PM नरेंद्र मोदी और PM शहबाज शरीफ से अपील की गई है कि वे बातचीत फिर से शुरू करें और भरोसे का माहौल बनाएं। पत्र पर भारत और पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ताओं, पूर्व राजनयिकों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए हैं।
वर्तमान में भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक स्थिति क्या है?
ओपी शाह के अनुसार दोनों देशों के बीच फिलहाल कोई उच्चायुक्त नहीं है, हवाई संपर्क बंद है और सामान्य द्विपक्षीय बातचीत भी नहीं हो रही। यह स्थिति दोनों देशों के बीच संबंधों में गहरी खाई को दर्शाती है।
क्या ओपी शाह ने पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद को मान्यता दी?
हाँ, शाह ने स्वीकार किया कि आतंकवाद भारत के लिए एक वास्तविक समस्या है। उन्होंने कहा कि इसी कारण दोनों सरकारों के बीच सीधी बातचीत ज़रूरी है ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके।
ट्रैक-2 बातचीत को लेकर ओपी शाह का क्या कहना है?
शाह ने बताया कि वे वर्तमान में कई पाकिस्तानी नागरिकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नियमित संपर्क में हैं। उनके अनुसार पाकिस्तान की ओर से भी बेहतर और करीबी संबंधों की इच्छा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 14 घंटे पहले
  3. 14 घंटे पहले
  4. 15 घंटे पहले
  5. 15 घंटे पहले
  6. 21 घंटे पहले
  7. 21 घंटे पहले
  8. 1 महीना पहले