भारत-पाकिस्तान 'पीपुल टू पीपुल कॉन्टैक्ट' बैरियर-फ्री हो: राज्यसभा सांसद मनोज झा की माँग
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच 'पीपुल टू पीपुल कॉन्टैक्ट' को बाधारहित बनाने की दिशा में ठोस प्रयास होने चाहिए, जबकि दोनों देशों के बीच जटिल द्विपक्षीय विवादों पर सरकारी स्तर पर अलग से बातचीत जारी रहे। झा ने भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद की माँग करने वाले एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और नागरिक संपर्क तथा सरकारी वार्ता के बीच स्पष्ट विभाजन रेखा खींचने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है।
नागरिक और सरकार के बीच का फ़र्क
झा ने कहा, 'राज्य, सरकार और नागरिक में एक फर्क होता है।' उन्होंने डिजिटल युग का उदाहरण देते हुए कहा कि संगीत, फिल्में और कार्टून को वीज़ा की ज़रूरत नहीं होती। उनके अनुसार, कविताएँ और कहानियाँ सरहदें नहीं मानतीं — और यह फ़र्क महात्मा गांधी बँटवारे के वक्त से ही बता गए थे। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने से आपसी समझ भी गहरी होती है।
सरकारी मुद्दे अलग, जनसंपर्क अलग
झा ने स्पष्ट किया कि जल विवाद, आतंकवाद और अन्य संवेदनशील मामलों पर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की सरकारों के बीच बातचीत होनी चाहिए — यह उनका दायित्व है। परंतु इसके समानांतर नागरिकों के आपसी संपर्क को सहज बनाने का प्रयास भी अनिवार्य है। उनके अनुसार दोनों प्रक्रियाएँ एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
पहलगाम घटना और कोलंबो ट्रैक-2 का संदर्भ
पहलगाम हमले का उल्लेख करते हुए झा ने सवाल उठाया कि उस समय जब पूरे देश में पीड़ा का माहौल था, तब दुबई में क्रिकेट क्यों खेला जा रहा था। उन्होंने कोलंबो में कथित तौर पर चल रही ट्रैक-2 वार्ता का भी ज़िक्र किया और कहा कि अभी इनकार किया जा रहा है, लेकिन कुछ समय बाद यह सामने आ जाएगा कि यह सब किसी इशारे पर हो रहा था। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख नेताओं के बयानों में कई संकेत मिलते हैं।
सरकार की भूमिका पर सवाल
झा ने यह भी कहा कि सरकार इस प्रक्रिया से पूरी तरह अलग नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या कोलंबो में ट्रैक-2 वार्ता बिना सरकार की मर्ज़ी के हो सकती है, और यह भी कि सरकार की मर्ज़ी किनकी मर्ज़ी से बनती है — यह सबको पता है। उनके अनुसार धीरे-धीरे सारी चीज़ें सामने आएँगी।
झा की मूल माँग
झा की स्पष्ट अपील है कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोगों के बीच संपर्क को अधिक सहज और बाधारहित बनाया जाए। साथ ही, दोनों देशों के बीच मौजूद मूल और जटिल विवादों पर सरकारी स्तर पर अलग बातचीत जारी रहे। यह माँग ऐसे समय में आई है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहलगाम हमले के बाद अत्यंत तनावपूर्ण बने हुए हैं।