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आतंकवाद छोड़े बिना भारत-पाक बातचीत बेमानी: मेजर जनरल ध्रुव कटोच की दो टूक

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आतंकवाद छोड़े बिना भारत-पाक बातचीत बेमानी: मेजर जनरल ध्रुव कटोच की दो टूक

सारांश

भारत-पाक संवाद की अपील वाले 117 नागरिकों के खुले पत्र को सेवानिवृत्त मेजर जनरल ध्रुव कटोच ने सिरे से खारिज किया। उनका साफ संदेश: पहले पाकिस्तान आतंकवाद छोड़े, हाफिज सईद को सौंपे — तभी कोई बात।

मुख्य बातें

भारत और पाकिस्तान के 117 नागरिकों ने PM मोदी और शहबाज शरीफ को संवाद बहाल करने की अपील करते हुए खुला पत्र लिखा।
सेवानिवृत्त मेजर जनरल ध्रुव सी.
कटोच ने पत्र को प्रभावहीन बताते हुए कहा कि इससे कोई ठोस बदलाव नहीं आएगा।
कटोच ने बातचीत के लिए दो शर्तें रखीं: पाकिस्तान आतंकवाद का रास्ता छोड़े और हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों को भारत को सौंपे।
उन्होंने पत्र लेखकों की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे किसी और के इशारे पर काम कर रहे हो सकते हैं।
कटोच के अनुसार, पिछले 30-40 वर्षों में पाकिस्तान के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है।

सेवानिवृत्त मेजर जनरल ध्रुव सी. कटोच ने 1 जुलाई 2026 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद का रास्ता नहीं छोड़ता और हाफिज सईद जैसे वांछित आतंकवादियों को भारत को नहीं सौंपता, तब तक दोनों देशों के बीच किसी भी स्तर की बातचीत का कोई अर्थ नहीं है। उनकी यह प्रतिक्रिया भारत और पाकिस्तान के 117 नागरिकों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को लिखे गए उस खुले पत्र पर आई, जिसमें दोनों देशों के बीच संवाद बहाल करने की अपील की गई थी।

खुले पत्र की पृष्ठभूमि

दोनों देशों के 117 नागरिकों — जिनमें पाकिस्तान के कुछ सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं — ने संयुक्त रूप से एक खुला पत्र लिखकर भारत-पाकिस्तान के बीच बंद पड़े संवाद को फिर से शुरू करने की माँग की। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के संबंध अत्यंत तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं और राजनयिक चैनल लगभग ठप पड़े हैं।

कटोच की मुख्य आपत्तियाँ

मेजर जनरल कटोच ने कहा कि इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले लोग न तो भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं और न ही पाकिस्तान सरकार का। उनके अनुसार, 'यह सिविल सोसाइटी के कुछ लोग हैं, जो पहले भी इस प्रकार के पत्र लिखते रहे हैं। इन लोगों को भी यह मालूम है कि इस तरह के खुले पत्र लिखने से न तो कोई ठोस बदलाव आने वाला है और न ही पाकिस्तान अपनी मौजूदा नीति में परिवर्तन करेगा।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले 30-40 वर्षों में पाकिस्तान का आतंकवाद के प्रति रवैया नहीं बदला है, और ऐसे में इस पत्र का कोई व्यावहारिक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।

पत्र लेखकों की मंशा पर सवाल

कटोच ने पत्र लिखने वालों की मंशा पर भी सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इन लोगों का असली मकसद शांति स्थापित करना है। उनके अनुसार, 'ये किसी दूसरे के कहने पर इस प्रकार की हरकत कर रहे हैं। हो सकता है अमेरिका इसके पीछे हो या कोई और हो।' हालाँकि उन्होंने इस संदर्भ में कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं दिया।

बातचीत के लिए पाकिस्तान को पूरी करनी होंगी दो शर्तें

भारत-पाकिस्तान के बीच वास्तविक शांति की संभावना पर मेजर जनरल कटोच ने दो स्पष्ट पूर्व-शर्तें रखीं। पहली, पाकिस्तान को आतंकवाद का रास्ता पूरी तरह छोड़ना होगा। दूसरी, उसे अपनी धरती पर मौजूद वांछित आतंकवादियों — जैसे हाफिज सईद — को भारत को सौंपना होगा। उनके अनुसार, इन दोनों शर्तों के बिना आगे की किसी भी बातचीत का कोई औचित्य नहीं है।

भारत सरकार की संभावित प्रतिक्रिया

कटोच का मानना है कि भारत सरकार इस खुले पत्र पर कोई विशेष ध्यान नहीं देगी, क्योंकि यह पत्र किसी सरकारी या आधिकारिक चैनल के माध्यम से नहीं आया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी नागरिक समाज के स्तर पर इस तरह की पहल होती रही हैं, लेकिन दोनों देशों की सरकारों ने उन्हें नीतिगत स्तर पर शायद ही कभी गंभीरता से लिया हो। आने वाले दिनों में इस पत्र पर दोनों देशों की सरकारों की आधिकारिक प्रतिक्रिया — या उसका अभाव — ही इसकी वास्तविक राजनयिक प्रासंगिकता तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर कटोच की यह टिप्पणी कि 'इनका कुछ और मकसद है' बिना प्रमाण के एक गंभीर आरोप है। असली सवाल यह है कि क्या भारत की शर्तें — आतंकवाद का पूर्ण परित्याग और प्रत्यर्पण — कभी पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में व्यावहारिक रूप से संभव हो सकती हैं, या यह संवाद की संभावना को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का एक सुविधाजनक ढाँचा बन चुका है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

117 नागरिकों का खुला पत्र किस बारे में था?
भारत और पाकिस्तान के 117 नागरिकों ने संयुक्त रूप से PM नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ को पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच बंद पड़े संवाद को फिर से बहाल करने की अपील की। इस पत्र पर दोनों देशों के नागरिक समाज के सदस्यों और कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं।
मेजर जनरल ध्रुव कटोच ने इस पत्र को क्यों खारिज किया?
कटोच का कहना है कि पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले न तो भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं और न ही पाकिस्तान सरकार का, इसलिए इसका कोई नीतिगत प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 30-40 वर्षों में ऐसे पत्रों से कभी कोई ठोस बदलाव नहीं आया।
भारत-पाकिस्तान बातचीत के लिए कटोच की क्या शर्तें हैं?
कटोच ने दो स्पष्ट पूर्व-शर्तें रखी हैं: पहली, पाकिस्तान आतंकवाद का रास्ता पूरी तरह छोड़े; दूसरी, हाफिज सईद जैसे वांछित आतंकवादियों को भारत को सौंपे। उनके अनुसार इन शर्तों के बिना किसी भी बातचीत का कोई अर्थ नहीं है।
क्या भारत सरकार इस खुले पत्र पर प्रतिक्रिया देगी?
मेजर जनरल कटोच का अनुमान है कि भारत सरकार इस पत्र पर कोई विशेष ध्यान नहीं देगी, क्योंकि यह किसी आधिकारिक या राजनयिक चैनल के माध्यम से नहीं आया है। अब तक भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या पहले भी इस तरह के नागरिक समाज के प्रयास हुए हैं?
हाँ, भारत-पाकिस्तान के बीच नागरिक समाज के स्तर पर संवाद की अपीलें पहले भी होती रही हैं, लेकिन दोनों देशों की सरकारों ने इन्हें नीतिगत स्तर पर शायद ही कभी गंभीरता से लिया हो। कटोच के अनुसार यह पत्र भी उसी परंपरा का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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