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पहले पीओके खाली करो, तब अमन की बात: भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना का पाकिस्तान को कड़ा संदेश

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पहले पीओके खाली करो, तब अमन की बात: भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना का पाकिस्तान को कड़ा संदेश

सारांश

भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने 117 भारत-पाक हस्तियों के संयुक्त शांति पत्र को सिरे से खारिज किया और कहा — पहले पीओके खाली करो, फिर अमन की बात करो। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह बयान BJP की पाकिस्तान पर कोई नरमी न दिखाने की स्पष्ट राजनीतिक लाइन को रेखांकित करता है।

मुख्य बातें

भारत और पाकिस्तान की 117 प्रमुख हस्तियों ने PM नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ को संयुक्त शांति पत्र लिखा।
भारतीय हस्ताक्षरकर्ताओं में फारूक अब्दुल्ला , महबूबा मुफ्ती और मनोज झा शामिल; पाकिस्तान से 56 लोगों ने हस्ताक्षर किए।
BJP सांसद गुलाम अली खटाना ने पत्र को खारिज करते हुए कहा — पाकिस्तान पहले पीओके खाली करे।
खटाना ने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले का हवाला देते हुए बातचीत को अभी असंभव बताया।
उन्होंने द्वारका-वसंत कुंज सुरंग परियोजना को मोदी सरकार के बुनियादी ढाँचे की उपलब्धि बताया।
CM योगी आदित्यनाथ के राम मंदिर चंदा चोरी पर सख्त कार्रवाई के बयान का खटाना ने समर्थन किया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद गुलाम अली खटाना ने 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में पाकिस्तान के साथ संवाद की अपील करने वाले संयुक्त पत्र पर तीखी प्रतिक्रिया दी और स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक पाकिस्तान पाक-अधिकृत कश्मीर (पीओके) खाली नहीं करता, शांति की कोई भी बात बेमानी है। उन्होंने इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले भारतीय नेताओं की मंशा पर भी सवाल उठाए।

117 हस्तियों का संयुक्त पत्र और विवाद

भारत और पाकिस्तान की कुल 117 प्रमुख हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक संयुक्त पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच टकराव की जगह संवाद का रास्ता चुनने की अपील की है। पत्र में दक्षिण एशिया में शांति और विकास के वातावरण पर बल दिया गया है।

भारत की ओर से इस पत्र पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा सहित कई नाम शामिल हैं। पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी समेत 56 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं।

खटाना की तीखी प्रतिक्रिया

सांसद खटाना ने इस पत्र को लेकर कड़े शब्दों में कहा, 'यह कांग्रेस की भारत पर मानसिकता है — हमेशा दुश्मन के साथ खड़े होते हैं। फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती कांग्रेस में से ही निकली पार्टियाँ हैं, ये तो मौत के सौदागर हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से जिन लोगों का नाम है, उनके हाथ जम्मू-कश्मीर में हुए खून-खराबे से रंगे हुए हैं।

खटाना ने सवाल उठाया कि पहलगाम हमले जैसी घटनाओं के बाद बातचीत और गोली एक साथ कैसे चल सकती है। उन्होंने कहा, 'हमारी सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान को सबक सिखाया है।' उनका स्पष्ट संदेश था कि पाकिस्तान पहले पीओके खाली करे और वहाँ के लोगों पर अत्याचार बंद करे, तभी शांति की दिशा में कोई कदम संभव है।

द्वारका-वसंत कुंज सुरंग परियोजना पर प्रतिक्रिया

द्वारका-वसंत कुंज छह लेन भूमिगत सुरंग परियोजना पर खटाना ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्ष बेमिसाल रहे हैं। उन्होंने सड़क, रेल, तकनीक, ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में हुए विकास का उल्लेख किया। उनके अनुसार यह परियोजना दिल्ली के यातायात जाम की समस्या को कम करने और राजधानी को स्वच्छ व प्रदूषण-मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

राम मंदिर चढ़ावा मामले पर बयान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने राम मंदिर चंदा चोरी मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया — खटाना ने समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई जारी है, कठोर कदम उठाए गए हैं और आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान संबंध अत्यंत तनावपूर्ण हैं और किसी भी द्विपक्षीय वार्ता की संभावना फिलहाल धुंधली दिखती है। खटाना के बयान से स्पष्ट है कि BJP पीओके पर अपने रुख से पीछे हटने के किसी भी संकेत को नकारती है। आने वाले दिनों में इस पत्र को लेकर संसद और सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि पीओके वापसी की माँग को कूटनीतिक रूप से व्यावहारिक कैसे बनाया जाएगा। फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पर 'मौत के सौदागर' जैसी भाषा राजनीतिक तीखेपन को दर्शाती है, लेकिन कश्मीर के जटिल राजनीतिक परिदृश्य में ऐसे बयान क्षेत्रीय दलों के साथ भविष्य के समीकरणों को और पेचीदा बना सकते हैं।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

117 हस्तियों के संयुक्त पत्र में क्या माँग की गई है?
भारत और पाकिस्तान की 117 प्रमुख हस्तियों ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से टकराव की जगह संवाद का रास्ता चुनने और दक्षिण एशिया में शांति व विकास का माहौल बनाने की अपील की है। भारत की ओर से फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और मनोज झा सहित कई नाम शामिल हैं।
गुलाम अली खटाना ने इस पत्र पर क्या कहा?
BJP सांसद गुलाम अली खटाना ने इस पत्र को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान पहले पाक-अधिकृत कश्मीर (पीओके) खाली करे, तभी शांति की बात हो सकती है। उन्होंने पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर का हवाला देते हुए बातचीत को अभी असंभव बताया।
ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ चलाया गया एक सैन्य अभियान था, जिसका उल्लेख खटाना ने पाकिस्तान को 'सबक सिखाने' के संदर्भ में किया। इस अभियान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा है।
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में क्या हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। BJP सांसद खटाना ने पुष्टि की कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई जारी है और कठोर कदम उठाए गए हैं।
द्वारका-वसंत कुंज सुरंग परियोजना क्या है?
यह दिल्ली में प्रस्तावित छह लेन की भूमिगत सुरंग परियोजना है जिसका उद्देश्य द्वारका और वसंत कुंज के बीच यातायात की भीड़ कम करना और राजधानी को प्रदूषण-मुक्त बनाना है। खटाना ने इसे PM मोदी के नेतृत्व में बुनियादी ढाँचे के विकास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
राष्ट्र प्रेस
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