क्या पीओके में फिर से भड़केगा विरोध प्रदर्शन, पाक सरकार की वादाखिलाफी से लोग नाराज हैं?
सारांश
Key Takeaways
- शहबाज सरकार के खिलाफ विरोध की लहर उभर रही है।
- पीओके में विकास की अनदेखी से लोग नाराज हैं।
- सरकार की वादाखिलाफियां बढ़ा रही हैं असंतोष।
- विरोध प्रदर्शन की संभावना अब और बढ़ गई है।
- स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में एक बार फिर शहबाज सरकार के खिलाफ विरोध की लहर उठ रही है। पीओके की जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी और सरकार के बीच बातचीत रद्द हो चुकी है। ऐसे में, क्षेत्र में अक्टूबर 2025 के समय में लंबे विरोध और हिंसा के बाद जो शांति आई थी, वह अब खतरे में है।
सितंबर 2025 में, पीओके में विरोध प्रदर्शन का आगाज हुआ था, जिसमें कई संगठनों ने विकास से जुड़ी कई प्राथमिकताएं रखी थीं। पाकिस्तान सरकार ने दखल देते हुए उनकी सभी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था।
हालांकि, अब कमेटी ने सरकार पर दिखावा करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि एक भी मांग पूरी नहीं की गई है। कमेटी ने पाकिस्तानी सरकार के साथ किसी प्रकार की वार्ता करने से मना कर दिया है। ऐसे में, एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की संभावना बढ़ चुकी है।
एक मूल्यांकन में यह अनुमान लगाया गया है कि आने वाले विरोध प्रदर्शन पिछली बार से भी ज्यादा बड़े होंगे। यह पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान सरकार अपने वादे से पलटी है। इससे स्थानीय लोग काफी निराश हैं।
पीओके के प्रति सरकार का रवैया वही है जो बलूचिस्तान में देखने को मिलता है। लंबे समय से पीओके और बलूचिस्तान के लोग सरकार और सेना के बड़े अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि उनके संसाधनों का उपयोग करके पाकिस्तान के बड़े शहरों में विकास कार्य किए जाते हैं, जबकि यहां के लोगों की जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाता है।
संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी ने अक्टूबर में सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के अनुसार, कमेटी और सरकार हर 15 दिन में विकास की समीक्षा करने के लिए बैठकें करने की बात तय की गई थी, लेकिन पिछले तीन महीनों में इस सिलसिले में केवल तीन बार ही बैठकें हुई हैं। इससे कमेटी ने सरकार पर दिखावा करने का आरोप लगाया है।
इसके अलावा, पाकिस्तान सरकार ने कई कमेटी सदस्यों के नाम एग्जिट कंट्रोल लिस्ट (ईसीएल) से हटाने का वादा किया था और भरोसा दिलाया था कि उनके खिलाफ एफआईआर वापस ले ली जाएंगी। लेकिन, एक भी मांग पूरी नहीं हुई, जिससे कमेटी के सदस्य नाराज हैं।
कमेटी का कहना है कि 3 अक्टूबर 2025 के समझौते के बाद से सरकार ने जो भी किया है, वह सब बेकार साबित हुआ है। रिफ्यूजी सीटों के मसलों को सुलझाने के लिए सरकार ने एक कमेटी बनाई थी, लेकिन उस कमेटी ने केवल खास मसलों पर ध्यान केंद्रित किया है। पीओके कमेटी चाहती है कि सभी मसलों को एक साथ सुलझाया जाए।
कमेटी ने आगे कहा कि कुछ कदम उठाने से काम नहीं चलेगा और इस बार वे सरकार के भरोसे पर यकीन नहीं कर रहे हैं। वहीं, भारतीय अधिकारियों का कहना है कि ये हालात चौंकाने वाले नहीं हैं और पीओके में पाकिस्तान का हमेशा यही रुख रहा है।
अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि मसलों को तत्काल नहीं सुलझाया गया, तो विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं और भारत में भी इसके फैलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ही सब कुछ तय करती है। उसने इलाके में बिचौलियों से निपटने के लिए कई सेवानिवृत्त सेना अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। उन्हें पीओके में मौजूद संसाधनों का उपयोग करने का काम सौंपा गया है।
लोगों ने इन अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे सारा फंड पाकिस्तान के मुख्य हिस्सों में भेज रहे हैं, जबकि इलाके में कोई सुधार नहीं हो रहा है। इसके अलावा, इन संसाधनों से मिलने वाला बहुत सारा फंड सेना के अधिकारी हड़प लेते हैं। इन अधिकारियों पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इन मुद्दों ने सेना के अंदर भी हलचल मचा दी है।
हाल ही में, गार्डियंस ऑफ ऑनर के एक लेटर में असीम मुनीर पर नाकाबिलियत, जुल्म और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार लंबे समय से झूठे भरोसे देकर पाकिस्तान के लोगों से झूठ बोलती आ रही है। यह बस कुछ ही समय की बात है, जब पीओके के हालात पाकिस्तान में बैठे लोगों के कंट्रोल से बाहर हो जाएंगे।