राजनाथ सिंह के पीओके बयान पर पाकिस्तान बौखलाया, संयुक्त राष्ट्र से भारत पर दबाव डालने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 जुलाई 2025 को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल वॉर मेमोरियल से पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) पर उसका कब्जा पूरी तरह गैरकानूनी है। उन्होंने यह भी कहा कि अब पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं होगी — और यदि होगी भी, तो केवल पीओके के मुद्दे पर। इस बयान के बाद इस्लामाबाद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त राष्ट्र से भारत पर दबाव बनाने की अपील की।
राजनाथ सिंह ने क्या कहा
राजनाथ सिंह ने कारगिल वॉर मेमोरियल के मंच से अपने संबोधन में कहा, 'जहाँ तक कश्मीर के विवाद या इस मुद्दे पर बातचीत का सवाल है, तो हमारी मंशा साफ है कि अब पाकिस्तान से कोई बात नहीं होगी, और अगर बात होगी भी तो सिर्फ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर होगी।' यह बयान कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगाँठ के अवसर पर दिया गया, जो 1999 के युद्ध में भारत की निर्णायक जीत का प्रतीक है।
पाकिस्तान की तीखी प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को अपना आधिकारिक बयान जारी करते हुए राजनाथ सिंह की टिप्पणियों को 'उकसावे वाली और गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया। बयान में कहा गया, 'पाकिस्तान सरकार जम्मू-कश्मीर विवाद के संदर्भ में भारतीय रक्षा मंत्री की उकसावे वाली और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करती है।'
बयान में आगे कहा गया कि राजनाथ सिंह का बयान 'जम्मू-कश्मीर विवाद से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करता है' और यह 'क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को खतरे में डालता है।'
संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की गुहार
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सीधे हस्तक्षेप की माँग की। बयान में कहा गया, 'पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर संयुक्त राष्ट्र से आग्रह करता है कि वह भारत पर दबाव डाले, उसके व्यवहार पर ध्यान दे और उसे जवाबदेह ठहराए।' विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान की यह अपील उसकी परंपरागत कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जो हर बार भारतीय बयानों के जवाब में दोहराई जाती है।
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का बयान
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि भारत की 'बयानबाजी के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी स्थिति को बदलने की लगातार कोशिशें तथ्यों को नहीं बदल सकतीं।' उन्होंने यह भी कहा कि राजनाथ सिंह के बयानों से 'क्षेत्रीय शांति या सार्थक बातचीत में कोई मदद नहीं मिलती।' गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संबंध पहले से ही अत्यंत तनावपूर्ण हैं।
आगे क्या
भारत सरकार ने पाकिस्तान के बयान पर तत्काल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, राजनाथ सिंह का यह बयान भारत की दीर्घकालिक नीतिगत स्थिति को दर्शाता है कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है। पाकिस्तान की संयुक्त राष्ट्र से अपील को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया अभी प्रतीक्षित है।