पाक अधिकृत कश्मीर पर ही होगी बात: राजनाथ सिंह का कारगिल विजय दिवस पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश
सारांश
मुख्य बातें
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 26 जुलाई 2026 को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल वॉर मेमोरियल से स्पष्ट किया कि भारत अब पाकिस्तान से कोई वार्ता नहीं करेगा, और यदि कोई बातचीत होगी भी तो वह केवल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) पर होगी — जिसे भारत अपना अभिन्न अंग मानता है और जिस पर पाकिस्तान ने कथित तौर पर अवैध कब्जा कर रखा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर है।
राजनाथ सिंह का पाकिस्तान पर सीधा प्रहार
रक्षामंत्री ने कारगिल वॉर मेमोरियल से बोलते हुए भारत और पाकिस्तान के मार्गों की तीखी तुलना की। उन्होंने कहा, "आज भारत इनोवेशन के नए रास्ते खोज रहा है, तो पाकिस्तान घुसपैठ के नए रास्ते खोज रहा है। भारत चिप डिजाइन कर रहा है, तो पाकिस्तान टेरर डिजाइन में लगा हुआ है। भारत दुनिया को सॉफ्टवेयर दे रहा है, तो पाकिस्तान दुनिया को स्लीपर सेल दे रहा है।"
उन्होंने आगे कहा, "भारत डेटा सेंटर्स बना रहा है, तो पाकिस्तान रेडिकल सेंटर्स बना रहा है। भारत UPI से दुनिया को जोड़ रहा है, तो पाकिस्तान हवाला से आतंकवाद को जोड़ रहा है।" सिंह ने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान भारत की समृद्धि के मार्ग में बाधा बनने की कोशिश करता है, तो भारतीय सेनाएँ उसे करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ और भविष्य की चेतावनी
रक्षामंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान के दौरान भारतीय सेनाओं ने आतंकवादियों और उनके संरक्षकों को ऐसा जवाब दिया जिसे वे जीवन भर नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत को आतंकवाद के माध्यम से डराने का प्रयास करने वालों का क्या अंजाम होगा।
उन्होंने कहा, "मैं इस मंच से साफ संदेश देना चाहता हूं कि भारत की संप्रभुता की ओर बढ़ने वाले हर नापाक कदम का यही अंजाम होगा।" गौरतलब है कि यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूर्ण होने के संदर्भ में दिया गया।
कारगिल की विरासत: 27 वर्ष पूर्व का स्मरण
रक्षामंत्री ने याद दिलाया कि आज से ठीक 27 वर्ष पूर्व, 1999 की जुलाई में पाकिस्तान ने अपनी सेना के घुसपैठियों के माध्यम से छल और धोखे का सहारा लेते हुए भारत की चोटियों पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने कहा कि ये वो चोटियाँ थीं जो सर्दियों में खाली रहती थीं और दुश्मन ने उसी संधिकाल का फायदा उठाया। "लेकिन दुश्मन हमारी सेना के शौर्य और संकल्प की ऊँचाई को भाँपने में चूक गया।"
उन्होंने कहा कि भारतीय जवानों ने न केवल पहाड़ की ऊँचाइयों को, बल्कि मानवीय सीमाओं की हर परिभाषा को भी पार कर दिखाया। आजादी के बाद से आज तक जब-जब राष्ट्र के सामने कोई चुनौती आई है, वीर सैनिकों ने अपने अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से भारत का गौरव विश्व पटल पर ऊँचा किया है।
सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति का आश्वासन
राजनाथ सिंह ने सैनिकों को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति में कोई कमी नहीं है और सरकार पूरी तन्मयता के साथ अपनी सेना के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि जब तक आप सीमाओं पर हमारी रक्षा कर रहे हैं, भारत की ओर आँख उठाकर देखने की हिम्मत भी किसी के अंदर नहीं हो सकती।"
उन्होंने कारगिल विजय दिवस को 'एक सामान्य दिन' से परे बताते हुए कहा कि यह हर उस युवा के लिए प्रेरणा का दिन है जो व्यक्तिगत सफलता और राष्ट्रीय कर्तव्य के बीच का अंतर समझना चाहता है। यह दिन सिखाता है कि 'बलिदान' और 'सेवा' का भाव ही किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होती है। भविष्य में भी भारतीय सेनाएँ इसी संकल्प के साथ मातृभूमि की रक्षा करती रहेंगी।