17 जुलाई 2026
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पाकिस्तान का आतंकवाद समर्थन जगज़ाहिर, भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी का अधिकार नहीं: विदेश मंत्रालय

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पाकिस्तान का आतंकवाद समर्थन जगज़ाहिर, भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी का अधिकार नहीं: विदेश मंत्रालय

सारांश

पहलगाम हमले की जाँच के बीच भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आईना दिखाया — विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि आतंकवाद को राज्य नीति बनाने वाले देश को भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 17 जुलाई 2025 को कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक मारे गए थे; जाँच अभी जारी है।
हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े संगठन TRF ने ली थी।
NIA ने 10 जुलाई 2025 को 1996 की श्रीनगर हिंसा में शब्बीर अहमद शाह समेत 6 हुर्रियत नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
तीन आरोपी — गिलानी , लोन और याकूब वकील — का निधन हो चुका है; शेष तीन के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 17 जुलाई 2025 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान दशकों से सीमा पार आतंकवाद को अपनी राज्य नीति के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करता आया है और उसे भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। नई दिल्ली में हुई साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह कड़ा बयान दिया।

पहलगाम हमले की जाँच जारी

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का ज़िक्र करते हुए प्रवक्ता जायसवाल ने कहा, 'पहलगाम आतंकी हमले में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई। हमारी जाँच एजेंसियों ने इस मामले की जाँच शुरू कर दी है और यह अभी जारी है। जहाँ तक सीमा पार आतंकवाद की बात है, आप पाकिस्तान के दशकों पुराने समर्थन और मदद से अच्छी तरह वाकिफ हैं। पाकिस्तान लगातार इसे अपनी राज्य नीति के एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है।' इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय घोड़े वाला मारा गया था, जो पर्यटकों को बचाने की कोशिश कर रहा था।

हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े संगठन 'द रेज़िस्टेंस फ्रंट (TRF)' ने ली थी। आतंकियों ने पीड़ितों से उनका धर्म पूछकर उन्हें निशाना बनाया था और कुछ लोगों से इस्लामिक कलमा पढ़वाकर गैर-मुस्लिमों की पहचान की थी।

हुर्रियत नेताओं पर NIA की चार्जशीट और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

ब्रीफिंग में जब प्रवक्ता से पूछा गया कि पाकिस्तानी नेताओं ने उन हुर्रियत नेताओं के समर्थन में बयान दिए हैं जिनके खिलाफ राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने चार्जशीट दाखिल की है, तो जायसवाल ने दो-टूक कहा, 'पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।'

10 जुलाई 2025 को NIA ने 1996 में श्रीनगर में हुई हिंसा के मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह समेत छह अलगाववादी नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

चार्जशीट में किन नेताओं के नाम

NIA की चार्जशीट में शब्बीर अहमद शाह, सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन, मोहम्मद याकूब वकील, जावेद अहमद मीर और शकील अहमद बख्शी के नाम शामिल हैं। इन सभी पर रणबीर दंड संहिता, 1989 के तहत आपराधिक साजिश, हत्या की कोशिश, दंगा और सरकारी कर्मचारियों पर हमले के आरोप हैं। इसके अलावा गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 13 भी लगाई गई है।

गौरतलब है कि सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन और मोहम्मद याकूब वकील का कार्यवाही के दौरान निधन हो चुका है, इसलिए उनके खिलाफ आरोपों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। हालाँकि, चार्जशीट में साक्ष्यों के आधार पर साजिश और हिंसा में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है।

1996 की हिंसा: NIA की जाँच में क्या सामने आया

NIA की जाँच के अनुसार, इन छह आरोपियों ने 17 जुलाई 1996 को श्रीनगर के नाज़ क्रॉसिंग इलाके में मारे गए आतंकी हिलाल अहमद बेग के जनाजे के दौरान हुई हिंसा में भीड़ का नेतृत्व किया था और पुलिसकर्मियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा भड़काई थी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच पहलगाम हमले के बाद तनाव पहले से ही चरम पर है।

आगे क्या होगा

पहलगाम हमले की जाँच जारी है और भारत की जाँच एजेंसियाँ साक्ष्य जुटाने में लगी हैं। NIA का 1996 का मामला अब जीवित आरोपियों — शब्बीर अहमद शाह, जावेद अहमद मीर और शकील अहमद बख्शी — के खिलाफ अदालत में आगे बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से घेरने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पहलगाम हमले के बाद इस बार कूटनीतिक दबाव की तीव्रता अलग है। असली सवाल यह है कि क्या भारत इस बार बयानबाज़ी से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को ठोस परिणाम भुगतवाने की स्थिति में है। NIA की 1996 की चार्जशीट और पहलगाम जाँच को एक साथ सामने लाना एक सुनियोजित कूटनीतिक कथा बनाने की कोशिश लगती है — जो FATF और UNSC जैसे मंचों पर पाकिस्तान को घेरने के लिए ज़रूरी है। लेकिन जब तक साक्ष्य-आधारित अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, ये बयान महज़ राजनयिक रिकॉर्ड बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के बारे में क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 17 जुलाई 2025 को कहा कि पाकिस्तान दशकों से सीमा पार आतंकवाद को अपनी राज्य नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करता आया है और उसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।
पहलगाम आतंकी हमला क्या था और इसमें कितने लोग मारे गए?
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने हमला किया, जिसमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय घोड़े वाला मारा गया। आतंकियों ने पीड़ितों से धर्म पूछकर गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाया था और हमले की जिम्मेदारी TRF ने ली थी।
NIA ने हुर्रियत नेताओं के खिलाफ चार्जशीट क्यों दाखिल की?
NIA ने 10 जुलाई 2025 को 1996 की श्रीनगर हिंसा के मामले में शब्बीर अहमद शाह समेत छह हुर्रियत नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। जाँच में सामने आया कि इन नेताओं ने 17 जुलाई 1996 को नाज़ क्रॉसिंग में जनाजे के दौरान भीड़ का नेतृत्व कर पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा भड़काई थी।
चार्जशीट में नामित कितने हुर्रियत नेता अभी जीवित हैं?
चार्जशीट में नामित छह में से तीन — सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन और मोहम्मद याकूब वकील — का निधन हो चुका है। शेष तीन — शब्बीर अहमद शाह, जावेद अहमद मीर और शकील अहमद बख्शी — के खिलाफ मुकदमा अदालत में आगे बढ़ेगा।
पाकिस्तान ने हुर्रियत नेताओं के समर्थन में बयान क्यों दिए?
NIA द्वारा हुर्रियत नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद पाकिस्तानी नेताओं ने उनके समर्थन में बयान दिए। भारत ने इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताते हुए खारिज कर दिया और विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को इस पर बोलने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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