भारत-पाक बातचीत पर शेख बशीर का समर्थन: '117 बुद्धिजीवियों की पहल सकारात्मक, युद्ध कोई हल नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय सचिव शेख बशीर ने 1 जुलाई को भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सामान्य करने की अपील करने वाले 117 प्रमुख नागरिकों और बुद्धिजीवियों के पत्र का स्वागत किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युद्ध किसी भी विवाद का स्थायी समाधान नहीं है और दोनों देशों के बीच हर मसले का हल केवल संवाद की मेज पर ही निकल सकता है।
जम्मू-कश्मीर पर सबसे गहरा असर
शेख बशीर ने कहा, 'भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से संबंध तनावपूर्ण रहे हैं, जिसका सबसे अधिक असर जम्मू-कश्मीर के लोगों पर पड़ा है। बीते 36 वर्षों से यह क्षेत्र आतंकवाद और हिंसा की मार झेल रहा है।' उन्होंने कहा कि लोगों को उम्मीद थी कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान निकलेगा, लेकिन अपेक्षित बदलाव देखने को नहीं मिला।
बातचीत की पहल का स्वागत
शेख बशीर ने कहा कि देश के 117 बुद्धिजीवियों और प्रमुख नागरिकों द्वारा दोनों देशों के रिश्ते सुधारने और संवाद शुरू करने की अपील 'स्वागतयोग्य पहल' है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि युद्ध जैसी परिस्थितियों के बाद भी शांति और संवाद की कोशिश की जाती है, तो इसे सकारात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए।
उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि भारी जानमाल के नुकसान के बावजूद अंततः समाधान की तलाश बातचीत के जरिए ही की जा रही है। ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने जोड़ा कि सैन्य कार्रवाई किसी भी संघर्ष का स्थायी उत्तर नहीं बन सकती।
भागवत के बयान का संदर्भ और सरकार से सवाल
शेख बशीर ने कहा कि उन्होंने पहले भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद की आवश्यकता पर बोलते हुए सुना है। उन्होंने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग की कि पिछले 11 वर्षों में दोनों देशों के संबंध सुधारने के लिए क्या ठोस प्रयास किए गए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद BJP को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और सरकार सहयोगी दलों के समर्थन पर टिकी है।
अमरनाथ यात्रा: आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों अहम
शेख बशीर ने अमरनाथ यात्रा को जम्मू-कश्मीर के लिए आस्था के साथ-साथ आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोग यात्रा का स्वागत कर रहे हैं और प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उनके अनुसार अमरनाथ यात्रा से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है और हजारों लोगों को रोजगार व आय का अवसर प्राप्त होता है।
आगे की राह
शेख बशीर के इस बयान ने ऐसे समय में ध्यान खींचा है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के बाद राजनयिक संवाद की संभावनाओं पर देशभर में बहस चल रही है। नेशनल कॉन्फ्रेंस का यह रुख संकेत देता है कि जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दल सीमा पार शांति को क्षेत्रीय स्थिरता की बुनियादी शर्त मानते हैं।