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यूएनजीए में जयशंकर का कड़ा संदेश: आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार का होगा इस्तेमाल

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यूएनजीए में जयशंकर का कड़ा संदेश: आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार का होगा इस्तेमाल

सारांश

यूएनजीए मंच पर जयशंकर ने बिना नाम लिए पाकिस्तान की ओर स्पष्ट संकेत किया — 'आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल होगा।' यह बयान महज राजनयिक भाषा नहीं है; यह भारत की बदलती विदेश नीति का खुला एलान है — सीमा पार आतंकवाद और सामान्य संबंध अब एक साथ नहीं चलेंगे।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 27 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की आत्मरक्षा के अधिकार पर कड़ा बयान दिया।
जयशंकर ने बिना नाम लिए एक देश को 'बार-बार आतंकवाद का इस्तेमाल करने वाला देश' बताया और उस पर यूएनजीए में तथ्यों को गलत पेश करने का आरोप लगाया।
खाड़ी और लाल सागर के हमलों में भारतीय नाविकों की मौत का हवाला देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया।
विकासशील देशों के लिए '4एफ संकट' — भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त — का उल्लेख कर वैश्विक असमानता पर चिंता जताई।
भारत ने 78 देशों में 600 से अधिक विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए ग्लोबल साउथ के लिए अपनी साझेदारी प्रस्तुत की।
टू-स्टेट सॉल्यूशन के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया और संयुक्त राष्ट्र सुधार में अधिक समावेशिता की माँग की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में अपने संबोधन के दौरान स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के विरुद्ध अपनी आत्मरक्षा के अधिकार का पूरी तरह इस्तेमाल करेगा। उन्होंने एक देश — जिसका नाम नहीं लिया, पर जिसे 'बार-बार आतंकवाद का इस्तेमाल करने वाला देश' बताया — पर एक दिन पहले यूएनजीए में तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। जयशंकर का यह संबोधन वैश्विक शांति, विकास और संयुक्त राष्ट्र सुधार को एक साझे धागे में पिरोता है।

आतंकवाद पर कड़ा रुख

जयशंकर के सबसे तीखे शब्द उस अनाम देश के लिए थे, जिसे उन्होंने 'बार-बार आतंकवाद का सहारा लेने वाला देश' करार दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बताने और उसके नतीजों से बचने के लिए तर्क गढ़े गए। जयशंकर ने साफ कहा: 'आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सीमा पार आतंकवाद को सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के साथ एक साथ नहीं चलने देगा।

वैश्विक संघर्षों और विकास पर चिंता

जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र, यूक्रेन और लाल सागर से लेकर काला सागर तक चल रहे संघर्षों की कीमत उन देशों को चुकानी पड़ रही है जिनकी उन फैसलों में कोई आवाज नहीं थी। उन्होंने बताया कि खाड़ी और लाल सागर के हमलों में भारतीय नाविक भी मारे गए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों और नाविकों को निशाना बनाना अस्वीकार्य है — यह भारत की स्पष्ट स्थिति है। उन्होंने यूक्रेन में शांति प्रयासों का समर्थन करते हुए खाद्य और ऊर्जा दबाव कम करने में भारत की मदद की पेशकश भी की।

ग्लोबल साउथ और '4एफ संकट'

विकासशील देशों की चिंताओं को रखते हुए जयशंकर ने '4एफ संकट' — यानी भोजन (Food), ईंधन (Fuel), उर्वरक (Fertiliser) और वित्त (Finance) — का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जलवायु समस्याएँ, खाद की कमी और अनाज आपूर्ति में बाधाएँ इस संकट को और गहरा कर रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्लोबल साउथ के देश पहले से ही बाज़ारों तक सीमित पहुँच और असमान व्यापार नियमों से जूझ रहे हैं।

भारत की भूमिका और वैश्विक साझेदारी

जयशंकर ने भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारत ने 78 देशों में 600 से अधिक बड़े विकास परियोजनाएँ चलाई हैं — जिनमें बुनियादी ढाँचा, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण शामिल हैं। अफ्रीकी देशों और छोटे विकासशील द्वीपीय देशों के साथ भारत की साझेदारी को उन्होंने खास तौर पर रेखांकित किया। मध्य पूर्व के मुद्दे पर जयशंकर ने टू-स्टेट सॉल्यूशन के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया और फिलिस्तीनियों को मानवीय सहायता देने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

संयुक्त राष्ट्र सुधार और नई विश्व व्यवस्था

संबोधन के अंत में जयशंकर ने उस बड़े प्रश्न को केंद्र में रखा कि बदलती दुनिया के नियम कौन तय करेगा। उन्होंने कहा, '1945 के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था अब नई वास्तविकताओं को जगह दे रही है।' उन्होंने वैश्विक फैसलों में अधिक परामर्श और पारदर्शिता की माँग की तथा स्पष्ट किया कि दुनिया की आबादी के बड़े हिस्से को अब निर्णय प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता। गौरतलब है कि यह बयान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता के लिए भारत की लंबे समय से चली आ रही माँग के अनुरूप है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन औपचारिक तनाव बढ़ाने से बचता है। परंतु 'आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल होगा' जैसी भाषा संयुक्त राष्ट्र मंच पर असामान्य रूप से तीखी है — और यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद की नई रेखाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की कोशिश है। जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि जयशंकर ने सुरक्षा और विकास को एक ही तर्क में पिरोया — यह 'ग्लोबल साउथ की आवाज' वाली पोज़िशनिंग भारत को वैश्विक मंच पर एक नई नैतिक श्रेष्ठता देती है, जो केवल सुरक्षा-केंद्रित कूटनीति से संभव नहीं था।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने यूएनजीए में किस देश का नाम लिए बिना क्या आरोप लगाया?
जयशंकर ने एक अनाम देश को 'बार-बार आतंकवाद का इस्तेमाल करने वाला देश' बताया और आरोप लगाया कि उस देश ने एक दिन पहले यूएनजीए में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद को सामान्य बताने और उसके नतीजों से बचने के लिए तर्क दिए गए।
भारत आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल कब और कैसे करेगा?
जयशंकर ने 27 सितंबर 2026 को यूएनजीए में स्पष्ट कहा कि भारत यह अधिकार इस्तेमाल करेगा, हालाँकि उन्होंने किसी विशेष कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया। उनके बयान से यह स्पष्ट था कि सीमा पार आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय संबंध एक साथ नहीं चल सकते।
जयशंकर ने '4एफ संकट' क्या बताया और यह किन देशों को प्रभावित करता है?
'4एफ संकट' में भोजन (Food), ईंधन (Fuel), उर्वरक (Fertiliser) और वित्त (Finance) शामिल हैं। जयशंकर के अनुसार यह संकट विशेष रूप से विकासशील और ग्लोबल साउथ के देशों को प्रभावित करता है, जिन्हें उन युद्धों और वैश्विक फैसलों की कीमत चुकानी पड़ती है जिनमें उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
यूएनजीए भाषण में भारत ने मध्य पूर्व संकट पर क्या रुख अपनाया?
जयशंकर ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर टू-स्टेट सॉल्यूशन के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत फिलिस्तीनियों को मानवीय सहायता भी दे रहा है और खाड़ी क्षेत्र में संयम व तनाव कम करने की अपील की।
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुधार पर क्या कहा?
जयशंकर ने कहा कि '1945 के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था अब नई वास्तविकताओं को जगह दे रही है' और वैश्विक फैसलों में अधिक देशों की भागीदारी व पारदर्शिता की माँग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया की आबादी के बड़े हिस्से को निर्णय प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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