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जयशंकर का बड़ा बयान: सीमा की स्थिति तय करेगी भारत चीन संबंधों की सामान्यता

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जयशंकर का बड़ा बयान: सीमा की स्थिति तय करेगी भारत चीन संबंधों की सामान्यता

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर ने न्यूयॉर्क में साफ़ कहा — भारत चीन रिश्ते 2020 के सबसे बुरे दौर से बेहतर हुए हैं, लेकिन सामान्यता की सीमा वही तय करेगी जो LAC पर ज़मीन पर होगी। यह बयान संबंधों में दिख रहे सुधार और उसकी असली परीक्षा के बीच की महीन रेखा को उजागर करता है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 29 सितंबर को न्यूयॉर्क में कहा कि भारत चीन संबंध 2020 के सबसे कठिन दौर से उबरकर बेहतर हुए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के रिश्ते कितने सामान्य होंगे, यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर ज़मीनी हालात पर निर्भर करेगा।
मौजूदा सुधार को बुनियादी या स्थायी बदलाव नहीं, बल्कि तनाव में कमी का स्वाभाविक परिणाम बताया।
जयशंकर ने कहा — "रिश्तों में गिरावट दोनों में से किसी के लिए फायदेमंद नहीं," और इससे तीसरे पक्षों को लाभ मिल सकता है।
गलवान घाटी झड़प (2020) के बाद सरकारी संपर्क, वीज़ा और उड़ानें प्रभावित हुई थीं; सीमा तनाव कम होने के साथ कुछ बहाल हो रही हैं।
भारत चीन के साथ संबंधों को अमेरिका, यूरोप, जापान और रूस के साथ साझेदारी के संतुलित संदर्भ में देखता है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 29 सितंबर को न्यूयॉर्क में स्पष्ट किया कि भारत और चीन के बीच संबंध सीमा तनाव के सबसे कठिन दौर से निकलकर बेहतर हुए हैं, लेकिन दोनों देशों के रिश्ते कितने सामान्य हो पाएंगे, यह आगे भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर ज़मीनी हालात पर निर्भर करेगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा सुधार को दोनों देशों के बीच किसी बुनियादी या स्थायी बदलाव का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

मुख्य घटनाक्रम

जयशंकर ने कहा कि 2020 की गलवान घाटी झड़प और उसके बाद लंबे समय तक चले सीमा विवाद ने दोनों देशों के बीच सामान्य संपर्क को बुरी तरह प्रभावित किया था। सरकारी स्तर पर बातचीत, अधिकारियों की आवाजाही, वीज़ा और उड़ानें — सब पर असर पड़ा, जबकि व्यापार किसी हद तक जारी रहा। उन्होंने कहा कि जैसे जैसे सीमा पर तनाव कम हुआ, कुछ संपर्क फिर से बहाल होने लगे हैं।

विदेश मंत्री ने इस बहाली और रिश्तों में किसी गहरे, दीर्घकालिक बदलाव के बीच स्पष्ट अंतर किया। उनके अनुसार, बंद पड़े संपर्कों का दोबारा शुरू होना तनाव में कमी का स्वाभाविक परिणाम है — इसे समस्याओं के हल होने का प्रमाण नहीं समझना चाहिए।

जयशंकर के अहम बयान

जयशंकर ने कहा, "सीमा की स्थिति ही रिश्तों की स्थिति तय करती है। ऐसा नहीं हो सकता कि सीमा पर तनाव हो, या उससे भी खराब हालात हों, और साथ ही आप कहें कि रिश्ते सामान्य रहने चाहिए।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि "हमारे रिश्तों में गिरावट वास्तव में हम दोनों में से किसी के लिए फायदेमंद नहीं है," और ऐसी स्थिति का लाभ तीसरे पक्ष उठा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत वर्षों से यह मानता आया है कि किसी ऐसे विवाद में लंबे समय तक उलझे रहना उचित नहीं, जिसका फायदा किसी और को हो। उनके अनुसार, चीनी पक्ष को भी इस सोच को स्वीकार करने में कुछ समय लगा।

भारत की व्यापक विदेश नीति और संतुलन

जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि चीन के साथ संबंधों में सुधार भारत की स्थिति को न केवल द्विपक्षीय वार्ता में, बल्कि अन्य देशों के साथ संबंधों में भी मज़बूत बनाता है। उन्होंने कहा कि भारत अपने हितों के अनुरूप व्यावहारिक समाधान तलाशेगा — "अगर मुझे ऐसा समाधान मिल सकता है जो मेरे लिए काम करता हो, तो मैं वही करना पसंद करूंगा।"

यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई देश अमेरिका, चीन, रूस और यूरोप के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के लिए इसका अर्थ है कि चीन के साथ संबंधों को अमेरिका, यूरोप, जापान और रूस के साथ साझेदारी के संदर्भ में देखा जाए।

पृष्ठभूमि: गलवान से अब तक

गौरतलब है कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुई जानलेवा झड़प के बाद भारत चीन संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। इस घटना में दोनों पक्षों के सैनिक हताहत हुए थे। उसके बाद से कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ता के ज़रिए सीमा पर तनाव धीरे धीरे कम किया गया। जयशंकर ने स्वीकार किया कि 2024 की तुलना में 2025 में और अब उससे भी अधिक सुधार हुआ है।

राजनीतिक और सुरक्षा मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार जारी रहा है, जो इस जटिल द्विपक्षीय संबंध की एक विशेषता रही है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि संबंधों में पूर्ण सामान्यता के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता अनिवार्य शर्त है।

आगे की राह

जयशंकर के बयान से संकेत मिलता है कि भारत सरकार चीन के साथ संबंधों को लेकर सावधान और शर्त आधारित दृष्टिकोण अपनाए हुए है। उड़ानों और सरकारी संपर्कों की बहाली को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन विदेश मंत्री के अनुसार, दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सीमा पर ठोस और टिकाऊ शांति ज़रूरी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति छिपी है — कि उड़ानों और संपर्कों की बहाली को 'सामान्यता' का पर्याय नहीं माना जाना चाहिए। यह तब और अहम हो जाता है जब घरेलू स्तर पर कभी कभी इन्हीं संकेतों को राजनयिक सफलता के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। असली सवाल यह है कि LAC पर 'स्थिरता' को मापने का कोई पारदर्शी मानदंड है या नहीं — क्योंकि बिना उसके, 'बेहतर हो रहे हैं' जैसे बयान जवाबदेही से परे रह सकते हैं। भारत की बहु संरेखण नीति सही दिशा में है, लेकिन चीन के साथ व्यापार घाटा और तकनीकी निर्भरता जैसे ढांचागत मुद्दे किसी भी राजनयिक सुधार से कहीं अधिक जटिल हैं।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने भारत चीन संबंधों पर न्यूयॉर्क में क्या कहा?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 29 सितंबर को न्यूयॉर्क में कहा कि भारत चीन संबंध 2020 के सबसे कठिन दौर से बेहतर हुए हैं, लेकिन रिश्ते कितने सामान्य होंगे यह सीमा पर ज़मीनी हालात पर निर्भर करेगा। उन्होंने मौजूदा सुधार को बुनियादी बदलाव नहीं, बल्कि तनाव में कमी का स्वाभाविक परिणाम बताया।
भारत चीन संबंधों में 2020 के बाद क्या बदला?
जून 2020 में गलवान घाटी में हुई जानलेवा झड़प के बाद दोनों देशों के बीच सरकारी संपर्क, वीज़ा और उड़ानें बुरी तरह प्रभावित हुईं, जबकि व्यापार किसी हद तक जारी रहा। कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ता के बाद सीमा पर तनाव धीरे धीरे कम हुआ और कुछ संपर्क बहाल होने लगे हैं।
क्या भारत चीन के बीच सभी मतभेद सुलझ गए हैं?
नहीं। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि उड़ानों और सरकारी संपर्कों की बहाली को इस बात का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए कि दोनों देशों के बीच मौजूदा समस्याएं खत्म हो गई हैं। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सीमा पर ठोस और टिकाऊ शांति अनिवार्य शर्त है।
जयशंकर ने 'तीसरे पक्ष' का ज़िक्र किस संदर्भ में किया?
जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच लंबे समय तक रिश्तों में गिरावट बने रहने से तीसरे पक्ष फायदा उठा सकते हैं। इसीलिए भारत की सोच यह है कि ऐसे विवाद में उलझे रहना उचित नहीं जिसका लाभ किसी और को मिले।
भारत चीन के साथ संबंधों को बाकी देशों के साथ कैसे संतुलित करता है?
जयशंकर के अनुसार, भारत चीन के साथ संबंधों को अमेरिका, यूरोप, जापान और रूस के साथ साझेदारी के संदर्भ में संतुलित रूप से देखता है। भारत किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचते हुए अपने हितों के अनुरूप व्यावहारिक समाधान तलाशने की नीति अपनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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