1 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जयशंकर ने चीन के राष्ट्रीय दिवस पर वांग यी को दी शुभकामनाएं, भारत-चीन संबंध सुधार का संकेत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जयशंकर ने चीन के राष्ट्रीय दिवस पर वांग यी को दी शुभकामनाएं, भारत-चीन संबंध सुधार का संकेत

सारांश

चीन के 77वें राष्ट्रीय दिवस पर जयशंकर की वांग यी को शुभकामनाएं महज औपचारिकता नहीं — यह उस सुधरते रिश्ते की तस्वीर है जो 2020 के गलवान संकट के बाद से धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। लेकिन जयशंकर खुद कह चुके हैं: यह बुनियादी बदलाव नहीं, केवल सबसे बुरे दौर से उबरना है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 1 अक्टूबर 2026 को चीन के राष्ट्रीय दिवस पर वांग यी और चीनी नागरिकों को एक्स पर शुभकामनाएं दीं।
पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना 1 अक्टूबर 1949 को माओत्से तुंग ने की थी।
जयशंकर ने न्यूयॉर्क में कहा था कि भारत-चीन संबंध 2024 और 2025 की तुलना में बेहतर हैं, लेकिन इसे 'बुनियादी बदलाव' नहीं माना जाना चाहिए।
2020 के गलवान संघर्ष के बाद वीजा, सरकारी संपर्क और उड़ानें प्रभावित हुई थीं; सीमा तनाव घटने के साथ धीरे-धीरे बहाली हो रही है।
जयशंकर ने रेखांकित किया कि संबंधों में गिरावट 'तीसरे पक्षों' के लिए फायदेमंद हो सकती है — दोनों देशों के लिए स्थिरता रणनीतिक हित में है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 1 अक्टूबर 2026 को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) की स्थापना की सालगिरह — जिसे चीन में राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है — के अवसर पर चीन के विदेश मंत्री एवं पोलित ब्यूरो के सदस्य वांग यी तथा समस्त चीनी नागरिकों को शुभकामनाएं दीं। यह संदेश ऐसे समय आया है जब हाल के महीनों में भारत-चीन संबंधों में उल्लेखनीय सुधार के संकेत मिले हैं।

एक्स पर जयशंकर का संदेश

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की सालगिरह पर पोलित ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी तथा चीन के लोगों को मेरी शुभकामनाएं।' गौरतलब है कि 1 अक्टूबर 1949 को माओत्से तुंग ने औपचारिक रूप से पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की घोषणा की थी, और तब से यह दिन हर वर्ष PRC के राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

भारत-चीन संबंधों की वर्तमान स्थिति

जयशंकर का यह शुभकामना संदेश द्विपक्षीय रिश्तों के उस दौर में आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव में धीरे-धीरे कमी देखी जा रही है। इससे पहले न्यूयॉर्क की अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने कहा था कि लंबे समय तक चले सीमा तनाव के सबसे खराब दौर की तुलना में भारत-चीन संबंधों में सुधार आया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया था कि दोनों देशों के रिश्ते कितने सामान्य हो पाएंगे, यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जमीनी हालात पर निर्भर करेगा।

जयशंकर ने यह भी कहा था कि भारत-चीन संबंध 2025 के मुकाबले अब बेहतर हैं और 2024 की तुलना में स्थिति में अधिक सुधार हुआ है। साथ ही उन्होंने इस प्रगति को दोनों देशों के संबंधों में किसी बुनियादी बदलाव के रूप में देखने से आगाह किया।

2020 के संकट का संदर्भ

जयशंकर ने कहा था कि '2020 की घटनाओं और उसके बाद लंबे समय तक चले सीमा तनाव की वजह से दोनों देशों के बीच सामान्य संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ था।' गलवान घाटी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच सरकारी स्तर पर संपर्क, वीजा जारी करने और हवाई उड़ानों पर व्यापक प्रभाव पड़ा था — हालांकि व्यापार अपेक्षाकृत निरंतर जारी रहा। उन्होंने धीरे-धीरे बहाल हो रहे इन संपर्कों को सीमा पर तनाव घटने का स्वाभाविक परिणाम बताया, न कि इस बात का प्रमाण कि दोनों देशों के बीच मौजूद बुनियादी मुद्दे सुलझ गए हैं।

रणनीतिक निहितार्थ

जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया था कि 'हमारे रिश्तों में गिरावट वास्तव में हम दोनों में से किसी के लिए फायदेमंद नहीं है — ऐसी स्थिति का लाभ तीसरे पक्ष उठा सकते हैं।' यह बयान उस व्यापक कूटनीतिक समझ की ओर इशारा करता है कि भारत और चीन, दोनों के लिए द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर रखना रणनीतिक हित में है। राष्ट्रीय दिवस पर इस तरह की शुभकामनाएं राजनयिक शिष्टाचार का हिस्सा होती हैं, लेकिन मौजूदा संदर्भ में इनका महत्व अधिक है।

आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-चीन संबंधों की दिशा अगले कुछ महीनों में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों और LAC पर जमीनी स्तर पर गश्त व्यवस्था से तय होगी। जयशंकर की शुभकामनाएं दोनों देशों के बीच संवाद की सतत इच्छा को दर्शाती हैं, जो अंततः दोनों के दीर्घकालिक हित में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय और संदर्भ दोनों महत्वपूर्ण हैं — 2020 के गलवान संकट के बाद यह रिश्ता वर्षों तक लगभग ठंडे बस्ते में रहा। असली सवाल यह है कि क्या यह 'सुधार' केवल सबसे बुरे दौर से उबरना है या दोनों देशों के बीच संरचनात्मक विश्वास की बहाली की शुरुआत — जयशंकर खुद इस फर्क को स्पष्ट कर चुके हैं। LAC पर गश्त व्यवस्था, वीजा सामान्यीकरण और व्यापार असंतुलन जैसे बुनियादी मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। शुभकामनाओं और संबंधों के वास्तविक सामान्यीकरण के बीच की खाई को पाटने के लिए इससे कहीं अधिक ठोस कूटनीतिक प्रयास की आवश्यकता होगी।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने चीन के राष्ट्रीय दिवस पर क्या कहा?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 1 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट करते हुए PRC की स्थापना की सालगिरह पर वांग यी और चीनी नागरिकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा कि 'पोलित ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी तथा चीन के लोगों को मेरी शुभकामनाएं।'
चीन का राष्ट्रीय दिवस क्यों मनाया जाता है?
चीन का राष्ट्रीय दिवस हर वर्ष 1 अक्टूबर को मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1949 में माओत्से तुंग ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की औपचारिक स्थापना की घोषणा की थी। यह PRC के गठन की सालगिरह है और चीन में इसे प्रमुख राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है।
भारत-चीन संबंध अभी कैसे हैं?
जयशंकर के अनुसार, भारत-चीन संबंध 2024 और 2025 की तुलना में बेहतर हुए हैं, लेकिन उन्होंने इसे कोई 'बुनियादी बदलाव' नहीं माना है। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद सीमा तनाव घटने के साथ-साथ कुछ सरकारी संपर्क, वीजा और उड़ानें धीरे-धीरे बहाल हो रही हैं।
2020 में भारत-चीन के बीच क्या हुआ था जिससे रिश्ते प्रभावित हुए?
जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों के जवान हताहत हुए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच सरकारी संपर्क, वीजा और उड़ानें बुरी तरह प्रभावित हुईं और द्विपक्षीय संबंधों में लंबे समय तक तनाव बना रहा।
जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों में गिरावट को लेकर क्या चेतावनी दी?
जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में गिरावट दोनों में से किसी के लिए फायदेमंद नहीं है और ऐसी स्थिति का लाभ 'तीसरे पक्ष' उठा सकते हैं। उनके अनुसार, सामान्यीकरण की गति LAC पर जमीनी हालात पर निर्भर करती रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 12 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले