जयशंकर ने चीन के राष्ट्रीय दिवस पर वांग यी को दी शुभकामनाएं, भारत-चीन संबंध सुधार का संकेत
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 1 अक्टूबर 2026 को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) की स्थापना की सालगिरह — जिसे चीन में राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है — के अवसर पर चीन के विदेश मंत्री एवं पोलित ब्यूरो के सदस्य वांग यी तथा समस्त चीनी नागरिकों को शुभकामनाएं दीं। यह संदेश ऐसे समय आया है जब हाल के महीनों में भारत-चीन संबंधों में उल्लेखनीय सुधार के संकेत मिले हैं।
एक्स पर जयशंकर का संदेश
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की सालगिरह पर पोलित ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी तथा चीन के लोगों को मेरी शुभकामनाएं।' गौरतलब है कि 1 अक्टूबर 1949 को माओत्से तुंग ने औपचारिक रूप से पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की घोषणा की थी, और तब से यह दिन हर वर्ष PRC के राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
भारत-चीन संबंधों की वर्तमान स्थिति
जयशंकर का यह शुभकामना संदेश द्विपक्षीय रिश्तों के उस दौर में आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव में धीरे-धीरे कमी देखी जा रही है। इससे पहले न्यूयॉर्क की अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने कहा था कि लंबे समय तक चले सीमा तनाव के सबसे खराब दौर की तुलना में भारत-चीन संबंधों में सुधार आया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया था कि दोनों देशों के रिश्ते कितने सामान्य हो पाएंगे, यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जमीनी हालात पर निर्भर करेगा।
जयशंकर ने यह भी कहा था कि भारत-चीन संबंध 2025 के मुकाबले अब बेहतर हैं और 2024 की तुलना में स्थिति में अधिक सुधार हुआ है। साथ ही उन्होंने इस प्रगति को दोनों देशों के संबंधों में किसी बुनियादी बदलाव के रूप में देखने से आगाह किया।
2020 के संकट का संदर्भ
जयशंकर ने कहा था कि '2020 की घटनाओं और उसके बाद लंबे समय तक चले सीमा तनाव की वजह से दोनों देशों के बीच सामान्य संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ था।' गलवान घाटी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच सरकारी स्तर पर संपर्क, वीजा जारी करने और हवाई उड़ानों पर व्यापक प्रभाव पड़ा था — हालांकि व्यापार अपेक्षाकृत निरंतर जारी रहा। उन्होंने धीरे-धीरे बहाल हो रहे इन संपर्कों को सीमा पर तनाव घटने का स्वाभाविक परिणाम बताया, न कि इस बात का प्रमाण कि दोनों देशों के बीच मौजूद बुनियादी मुद्दे सुलझ गए हैं।
रणनीतिक निहितार्थ
जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया था कि 'हमारे रिश्तों में गिरावट वास्तव में हम दोनों में से किसी के लिए फायदेमंद नहीं है — ऐसी स्थिति का लाभ तीसरे पक्ष उठा सकते हैं।' यह बयान उस व्यापक कूटनीतिक समझ की ओर इशारा करता है कि भारत और चीन, दोनों के लिए द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर रखना रणनीतिक हित में है। राष्ट्रीय दिवस पर इस तरह की शुभकामनाएं राजनयिक शिष्टाचार का हिस्सा होती हैं, लेकिन मौजूदा संदर्भ में इनका महत्व अधिक है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-चीन संबंधों की दिशा अगले कुछ महीनों में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों और LAC पर जमीनी स्तर पर गश्त व्यवस्था से तय होगी। जयशंकर की शुभकामनाएं दोनों देशों के बीच संवाद की सतत इच्छा को दर्शाती हैं, जो अंततः दोनों के दीर्घकालिक हित में है।