जयशंकर-वांग यी मनीला वार्ता: भारत-चीन संबंध सामान्यीकरण की राह पर, सीमा शांति सर्वोच्च प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22 जुलाई 2026 को मनीला में चीन के विदेश मंत्री एवं चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) की पोलित ब्यूरो के सदस्य वांग यी के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) और आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) की बैठकों के इतर हुई इस मुलाकात में जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
वार्ता की पृष्ठभूमि
अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। इसके बाद पिछले अगस्त में तियानजिन में दोनों नेताओं की मुलाकात ने इस सामान्यीकरण की प्रक्रिया को और गति दी। यह ऐसे समय में आया है जब एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
सीमा शांति पर जयशंकर का स्पष्ट संदेश
जयशंकर ने वार्ता में स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य द्विपक्षीय संबंधों की अनिवार्य पूर्वशर्त है। उन्होंने कहा, "सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य संबंधों की पूर्वशर्त है। अक्टूबर 2024 से दोनों पक्ष इस महत्वपूर्ण उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने देना कूटनीति की ज़िम्मेदारी है।
सामान्यीकरण के ठोस कदम
जयशंकर ने दोनों देशों के बीच संबंध सुधार की दिशा में उठाए गए कई व्यावहारिक कदमों का उल्लेख किया। इनमें प्रत्यक्ष उड़ानों की बहाली, वीज़ा व्यवस्था में सुधार, कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुनः आरंभ और सीमा व्यापार की बहाली प्रमुख हैं। गौरतलब है कि ये कदम 2020 की गलवान झड़प के बाद से ठप पड़े संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में उठाए गए हैं।
लंबित मुद्दे और भारत की चिंताएँ
हालाँकि विदेश मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि अभी कई अहम मुद्दों पर काम बाकी है। इनमें भारतीय कंपनियों के लिए निष्पक्ष बाज़ार पहुँच, व्यापार असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चिंताएँ और सरकारी तथा जन-स्तर पर संपर्क को और सुगम बनाना शामिल हैं। भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा हाल के वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुका है, जो नई दिल्ली के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
बहुध्रुवीय विश्व और वैश्विक साझेदारी
जयशंकर ने कहा कि भारत-चीन के स्थिर संबंध बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता के दौरान चीन के सहयोग की भी सराहना की और कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय महत्व के प्रमुख मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान पहले से कहीं अधिक ज़रूरी हो गया है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच और उच्च-स्तरीय संपर्क की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।