26 अगस्त 2026
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डोभाल-वांग यी वार्ता: भारत-चीन सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान पर 25वीं बैठक में बनी सहमति

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डोभाल-वांग यी वार्ता: भारत-चीन सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान पर 25वीं बैठक में बनी सहमति

सारांश

बीजिंग में 25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता में एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान पर काम जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। कजान और तियानजिन शिखर सहमतियों को लागू करने की प्रगति की समीक्षा हुई, और कैलाश मानसरोवर यात्रा व सीमा व्यापार की बहाली पर संतोष जताया गया।

मुख्य बातें

एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में भारत-चीन सीमा प्रश्न पर 25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता हुई।
दोनों पक्षों ने सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान तलाशने का काम जारी रखने पर सहमति जताई।
PM मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कजान (अक्टूबर 2024) और तियानजिन (अगस्त 2025) शिखर सम्मेलनों में बनी सहमतियों को लागू करने की प्रगति की समीक्षा की गई।
कैलाश मानसरोवर यात्रा और तीन सीमा व्यापारिक दर्रों के ज़रिए सीमा व्यापार की बहाली पर दोनों पक्षों ने संतोष व्यक्त किया।
डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की।
चीन ने भारत-चीन संबंधों को 'वैश्विक और रणनीतिक महत्व' वाला बताया और 'ड्रैगन व हाथी के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व' का आह्वान किया।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं वार्ता में भाग लिया, जहाँ दोनों देशों ने सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान तलाशने का काम जारी रखने पर सहमति जताई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने को द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति के लिए अनिवार्य शर्त बताया गया।

बैठक का मुख्य घटनाक्रम

एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री तथा चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो सदस्य वांग यी — जो चीनी विशेष प्रतिनिधि और केंद्रीय विदेश मामलों के आयोग के कार्यालय के निदेशक भी हैं — के बीच सीमा मुद्दे और द्विपक्षीय संबंधों पर 'व्यापक, गहन, मैत्रीपूर्ण और स्पष्ट' चर्चा हुई। डोभाल वांग यी के निमंत्रण पर दो दिवसीय बीजिंग दौरे पर थे और उन्होंने इसी दौरान चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की।

नेताओं की सहमति को लागू करने पर ज़ोर

दोनों पक्षों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अक्टूबर 2024 में कजान और अगस्त 2025 में तियानजिन में बनी महत्वपूर्ण सहमतियों को लागू करने में हुई प्रगति की समीक्षा की। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन में और रचनात्मक व दूरदर्शी भावना के साथ, दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने भारत-चीन सीमा प्रश्न पर स्पष्ट और गहन विचारों का आदान-प्रदान किया और अपने समग्र और दीर्घकालिक हितों के संदर्भ में सीमा प्रश्न का राजनीतिक समाधान तलाशने के लिए अपना काम जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।'

लोगों के बीच संपर्क और सीमा व्यापार की बहाली

दोनों पक्षों ने लोगों के बीच आपसी संपर्क और सीमा पार आदान-प्रदान के फिर से शुरू होने पर संतोष व्यक्त किया। इसमें जारी कैलाश मानसरोवर यात्रा और तीन निर्धारित सीमा व्यापारिक दर्रों के माध्यम से सीमा व्यापार की बहाली शामिल है — जो 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद से ठप पड़े थे। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं।

चीन का रुख: 'ड्रैगन और हाथी का सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व'

चीनी विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों को 'महत्वपूर्ण पड़ोसी और प्रमुख विकासशील देशों के प्रतिनिधि' बताया। वांग यी ने कहा, 'चीन-भारत संबंध द्विपक्षीय दायरे से आगे निकल चुके हैं और वैश्विक और रणनीतिक महत्व रखते हैं।' उन्होंने 'ड्रैगन और हाथी के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व' का आह्वान करते हुए कहा कि बीजिंग आपसी समझ बढ़ाने, मतभेद खत्म करने और नई दिल्ली के साथ 'अच्छे पड़ोसी और मैत्रीपूर्ण मित्र तथा परस्पर लाभकारी साझेदार' बनने के लिए तैयार है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह 25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता है, जो दर्शाती है कि सीमा प्रश्न दशकों से बातचीत की मेज़ पर है। दोनों पक्षों ने आपसी हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। अगली बैठक की तिथि और स्थान की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन राजनयिक सूत्रों के अनुसार संवाद की गति बनाए रखने पर दोनों पक्ष सहमत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर ज़मीनी स्थिति में बदलाव की गति अत्यंत धीमी रही है। कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा व्यापार की बहाली सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन ये 2020 से पहले की स्थिति की बहाली मात्र हैं — कोई नई उपलब्धि नहीं। असली कसौटी यह होगी कि क्या यह कूटनीतिक गर्मजोशी देपसांग और डेमचोक जैसे शेष घर्षण बिंदुओं पर ठोस समझौते में बदलती है, जिसका अभी तक कोई सार्वजनिक संकेत नहीं मिला है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-चीन विशेष प्रतिनिधि वार्ता क्या है और 25वीं बैठक क्यों महत्वपूर्ण है?
यह भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए स्थापित एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता तंत्र है। 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में हुई 25वीं बैठक इसलिए अहम है क्योंकि इसमें दोनों देशों ने सीमा प्रश्न के राजनीतिक समाधान पर काम जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई और नेताओं के बीच बनी सहमतियों की प्रगति की समीक्षा की।
डोभाल और वांग यी की बैठक में क्या निर्णय हुए?
दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान तलाशने का काम जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा और तीन सीमा व्यापारिक दर्रों के ज़रिए सीमा व्यापार की बहाली पर संतोष व्यक्त किया गया। डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की।
कजान और तियानजिन में PM मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच क्या सहमति बनी थी?
अक्टूबर 2024 में कजान और अगस्त 2025 में तियानजिन में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के सुधार और विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण सहमतियाँ बनी थीं। इन्हीं सहमतियों को लागू करने की प्रगति की समीक्षा 25वीं वार्ता में की गई।
कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा व्यापार की बहाली का क्या महत्व है?
2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद से कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा व्यापार बाधित हो गए थे। इनकी बहाली दोनों देशों के बीच सामान्यीकरण की प्रक्रिया का संकेत है और लोगों के बीच आपसी संपर्क फिर से स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
चीन ने भारत-चीन संबंधों को लेकर क्या रुख अपनाया?
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन-भारत संबंध 'वैश्विक और रणनीतिक महत्व' रखते हैं और द्विपक्षीय दायरे से आगे निकल चुके हैं। उन्होंने 'ड्रैगन और हाथी के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व' का आह्वान करते हुए मतभेद खत्म करने और अच्छे पड़ोसी बनने की इच्छा जताई।
राष्ट्र प्रेस
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