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जयशंकर का बड़ा बयान: रणनीतिक स्वायत्तता में अब अमेरिका चल रहा भारत की राह पर

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जयशंकर का बड़ा बयान: रणनीतिक स्वायत्तता में अब अमेरिका चल रहा भारत की राह पर

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर का न्यूयॉर्क में तीखा कूटनीतिक संदेश — जो नीति कभी भारत को 'गैर-प्रतिबद्ध' कहकर कटघरे में खड़ा करती थी, आज वॉशिंगटन उसी नीति को 'पूरे जोश के साथ' अपना रहा है। च्यूइंगम के मज़ेदार उदाहरण के साथ जयशंकर ने दुनिया को एक बहुध्रुवीय भविष्य का आईना दिखाया।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 29 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में कहा कि अमेरिका अब भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति अपना रहा है।
जयशंकर ने कहा — 'हमारे बारे में जो बातें पहले कही जाती थीं, आज वॉशिंगटन वही काम पूरे जोश के साथ कर रहा है।' राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका एक साथ चीन, रूस, यूक्रेन और यूरोप से कूटनीति चला रहा है।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है — शक्ति कई देशों में बँटेगी।
पूर्व अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डैनियल रसेल के साथ संवाद में जयशंकर ने 'च्यूइंगम' उदाहरण से वैश्विक कूटनीति की नई हकीकत समझाई।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 29 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत जो नीति दशकों से अपनाता आया है — अपने हितों के अनुसार स्वतंत्र रूप से कई देशों के साथ एक साथ संबंध बनाए रखना — वही रणनीतिक स्वायत्तता अब अमेरिका भी अपनाने लगा है। उनके अनुसार, यह बदलाव एक बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था की ओर संक्रमण का स्पष्ट संकेत है।

जयशंकर ने क्या कहा

जयशंकर ने अमेरिका के पूर्व सहायक विदेश मंत्री डैनियल रसेल के साथ संवाद के दौरान कहा, 'हमारे बारे में जो बातें पहले कही जाती थीं, आज वॉशिंगटन वही काम पूरे जोश के साथ कर रहा है।' उन्होंने आगे स्पष्ट किया: 'आप चीन से बात कर रहे हैं, रूस से बात कर रहे हैं, यूक्रेन से बात कर रहे हैं और एशिया के दूसरे हिस्सों या यूरोप के साथ भी संबंध संभाल रहे हैं।'

जयशंकर का इशारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की उस कूटनीतिक शैली की ओर था, जिसमें परस्पर विरोधी हितों वाले देशों के साथ भी एक साथ संपर्क बनाए रखा जा रहा है।

च्यूइंग गम वाला दिलचस्प उदाहरण

रसेल ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर सवाल उठाते हुए अमेरिकी कहावत 'च्यूइंग गम चबाना और चलना' का ज़िक्र किया — यानी एक साथ कई काम संभालने की क्षमता। जयशंकर ने इसी उदाहरण को आगे बढ़ाते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'मुझे लगता है कि वॉशिंगटन में उस च्यूइंगम की काफी बड़ी सप्लाई है।'

यह टिप्पणी इस संदर्भ में थी कि अमेरिका अब एक साथ चीन, रूस, यूक्रेन और यूरोप — सभी के साथ समानांतर कूटनीति चला रहा है, जो कभी भारत जैसे देशों की नीति की आलोचना करने वाला था।

दोहरे मानदंडों का अंत

जयशंकर ने कहा कि एक समय था जब भारत जैसे देशों से कहा जाता था कि वे बहुत ज़्यादा विकल्प न रखें और किसी एक देश पर अपने संबंध केंद्रित करें। इसके उलट अमेरिका स्वयं वैश्विक शक्ति होने के नाते सभी के साथ रिश्ते बनाए रखता था। उन्होंने कहा, 'आज यह दिखावा सभी के लिए खत्म हो चुका है। अब हर कोई खुले तौर पर हर किसी के साथ रिश्ते रख रहा है।'

यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका संबंध व्यापार, रक्षा और तकनीक के क्षेत्रों में नई करवटें ले रहे हैं, और ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति पारंपरिक गठबंधन ढाँचों से अलग दिशा में बढ़ती दिख रही है।

बहुध्रुवीय विश्व की ओर

जयशंकर ने कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है — जहाँ शक्ति केवल एक या दो देशों के हाथ में नहीं, बल्कि कई देशों के बीच बँटी होगी। च्यूइंगम वाले उदाहरण को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, 'हर कोई इसे चबाने वाला है।' उनके अनुसार, 'हर देश किसी भी स्थिति में अपने हितों को ज़्यादा साफ तरीके से तय करते हुए अपने लिए सबसे बेहतर डील हासिल करने की कोशिश करेगा।'

गौरतलब है कि जयशंकर की यह टिप्पणियाँ संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौसम में आई हैं, जब वैश्विक नेताओं के बीच कूटनीतिक सक्रियता अपने चरम पर होती है। भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति — जिसे कभी अस्पष्टता या ढुलमुल रवैया कहकर आलोचना झेलनी पड़ती थी — आज एक मान्य वैश्विक कूटनीतिक मॉडल बनती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह आज ट्रंप प्रशासन के तहत ठीक वही बहु-दिशात्मक कूटनीति चला रहा है। लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या भारत इस बदलती विश्व व्यवस्था में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को केवल एक बौद्धिक तर्क के रूप में पेश करता रहेगा, या इसे ठोस आर्थिक और सुरक्षा लाभों में परिवर्तित करने की क्षमता भी दिखाएगा? बहुध्रुवीयता का उदय भारत के लिए अवसर तो है, पर इसके लिए केवल वक्तृत्व नहीं, बल्कि संस्थागत तैयारी भी चाहिए।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने रणनीतिक स्वायत्तता पर क्या बयान दिया?
विदेश मंत्री जयशंकर ने न्यूयॉर्क में कहा कि भारत जो नीति दशकों से अपनाता आया है — कई देशों के साथ एक साथ संबंध बनाए रखना — वही अब अमेरिका भी कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हमारे बारे में जो बातें पहले कही जाती थीं, आज वॉशिंगटन वही काम पूरे जोश के साथ कर रहा है।'
रणनीतिक स्वायत्तता का मतलब क्या है?
रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ है किसी देश की यह क्षमता कि वह किसी एक गठबंधन या महाशक्ति पर निर्भर हुए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र विदेश नीति निर्णय ले सके। भारत इस नीति को शीत युद्ध काल से अपनाता आया है, जिसे पहले 'गुटनिरपेक्षता' और बाद में 'रणनीतिक स्वायत्तता' कहा गया।
जयशंकर ने च्यूइंगम का उदाहरण क्यों दिया?
पूर्व अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डैनियल रसेल ने 'च्यूइंग गम चबाना और चलना' — यानी एक साथ कई काम करने की क्षमता — का ज़िक्र किया। जयशंकर ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा कि वॉशिंगटन में इस च्यूइंगम की 'काफी बड़ी सप्लाई' है, यह दर्शाते हुए कि अमेरिका अब खुद परस्पर विरोधी देशों के साथ एक साथ कूटनीति चला रहा है।
जयशंकर के अनुसार बहुध्रुवीय विश्व क्या होगा?
जयशंकर ने कहा कि बहुध्रुवीय विश्व वह व्यवस्था है जहाँ शक्ति केवल एक या दो देशों के हाथ में नहीं, बल्कि कई देशों के बीच बँटी होगी। उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था में हर देश अपने हितों को साफ तरीके से तय करते हुए सबसे बेहतर डील हासिल करने की कोशिश करेगा।
यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में क्यों अहम है?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति पारंपरिक पश्चिमी गठबंधन ढाँचों से अलग दिशा में जा रही है और भारत-अमेरिका संबंध व्यापार व रक्षा में नए मोड़ पर हैं। जयशंकर का संदेश यह है कि भारत की दशकों पुरानी नीति अब वैश्विक कूटनीति का मानक बनती जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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