क्या राजनीति अब अर्थव्यवस्था पर हावी हो रही है? वैश्विक व्यवस्था में बदलाव: एस. जयशंकर

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क्या राजनीति अब अर्थव्यवस्था पर हावी हो रही है? वैश्विक व्यवस्था में बदलाव: एस. जयशंकर

सारांश

क्या राजनीति वास्तव में अर्थव्यवस्था पर हावी होती जा रही है? विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस पर अपने विचार साझा किए हैं। जानें कैसे वैश्विक व्यवस्था में बदलाव हो रहा है और भारत इस चुनौती का सामना कैसे करेगा।

Key Takeaways

  • राजनीति का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव बढ़ रहा है।
  • वैश्विक व्यवस्था में बदलाव आ रहा है।
  • भारत ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत वैश्विक चुनौतियों का सामना करेगा।
  • सप्लाई चेन में अस्थिरता की समस्या बढ़ रही है।
  • नई व्यापार समझौतों और कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

कोलकाता, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि आज के समय में राजनीति अर्थव्यवस्था पर हावी होती जा रही है। यह बयान उन्होंने आईआईएम कोलकाता के जोका कैंपस में मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिलने के बाद दिया।

उन्होंने कहा, "यह वह समय है जब राजनीति आर्थिक मुद्दों से ऊपर जा रही है, और यह केवल मजाक नहीं है।"

वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने कहा कि अमेरिका अब नए नियमों के साथ कार्य कर रहा है और पुराने अंतरराष्ट्रीय प्रणाली की जगह अधिकांश देशों के साथ सीधे द्विपक्षीय संबंध बना रहा है। वहीं, चीन पहले से ही अपने नियमों के आधार पर काम कर रहा है और अब इसे और तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा, "ऐसी स्थिति में अन्य देशों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि उनका ध्यान अमेरिका और चीन के बीच होने वाली प्रतिस्पर्धा पर होना चाहिए या उन समझौतों और लेन-देन पर जो समय-समय पर होते हैं।"

एस. जयशंकर ने आगे कहा कि वैश्वीकरण, अलगाव और सप्लाई की असुरक्षा जैसे दबावों का सामना करते हुए बाकी देश सुरक्षित रास्ते खोज रहे हैं।

उन्होंने कहा, “दुनिया के देश अब हर स्थिति के लिए तैयार हो रहे हैं। वे अमेरिका और चीन दोनों के साथ सीधे संबंध बनाए रखते हैं, लेकिन सीधे पक्ष लेने से बचते हैं जब तक ऐसा करना उनके लिए फायदेमंद न हो। इसके साथ ही वे एक-दूसरे के साथ भी नई संभावनाएं तलाश रहे हैं और इसे पहले से ज्यादा गंभीरता से ले रहे हैं। इसका एक उदाहरण यह है कि आज दुनिया में विभिन्न क्षेत्रों के बीच मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर उत्साह बढ़ रहा है।”

उन्होंने सप्लाई चेन की वर्तमान स्थिति पर कहा कि दुनिया में लगभग एक-तिहाई उत्पादन अभी चीन में होता है, इसलिए अब विश्व बाजार में भरोसे और स्थिरता की आवश्यकता पहले से ज्यादा बढ़ गई है। युद्ध, विवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी घटनाओं ने सप्लाई चेन में रुकावट का खतरा और बढ़ा दिया है।

उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति बताते हुए कहा, “अमेरिका अब बड़े आयातक से बदलकर पारंपरिक ऊर्जा का बड़ा निर्यातक बन गया है। वहीं चीन नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया पर हावी है।”

व्यापार विवादों की बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि सप्लाई की अनिश्चितता और मांग में अस्थिरता से स्थिति और जटिल हो जाती है।

उन्होंने कहा, “टैरिफ में बदलाव ने वैश्विक व्यापार को और अधिक अस्थिर बना दिया है। वहीं वित्तीय दुनिया में प्रतिबंध, संपत्तियों की जब्ती और ब्लॉकचेन तकनीक जैसी चीजें अब नई वास्तविकता बन चुकी हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत का ‘मेक इन इंडिया’ अभियान इन वैश्विक चुनौतियों का एक बड़ा समाधान है।

उन्होंने कहा, “भारत इन बदलावों का सामना कैसे करेगा? हम अपनी राष्ट्रीय क्षमता बढ़ाकर, कमजोरियों को कम करके और वैश्विक प्रभाव बढ़ाकर यह लक्ष्य हासिल करेंगे। जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ रहा है और हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, हम वैश्विक स्तर पर और जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो रहे हैं।”

जयशंकर ने कहा कि एक मजबूत देश के पास बड़ी औद्योगिक क्षमता होनी चाहिए और यह बात हमेशा नीति-निर्माताओं द्वारा गंभीरता से नहीं ली गई थी, खासकर 2014 से पहले।

उन्होंने कहा, “तेज औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना अब हमारी प्राथमिकता है। पिछले दशक में ‘मेक इन इंडिया’ पर दिया गया जोर हमारे सोच और लक्ष्य में बदलाव को दर्शाता है।”

उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे ‘मेक इन इंडिया’ मजबूत होगा, ‘रिसर्च इन इंडिया, ‘इनोवेट इन इंडिया, और ‘डिजाइन इन इंडिया’ भी आगे बढ़ेंगे।”

अंत में उन्होंने कहा कि अनिश्चित दुनिया में सप्लाई स्रोतों को विविध बनाना जरूरी है ताकि देश की जरूरतें पूरी होती रहें। उन्होंने कहा, “हम नए व्यापार समझौते बनाने और कनेक्टिविटी बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। यह केवल हमारी नीति की प्राथमिकताओं को नहीं दिखाता, बल्कि यह भी बताता है कि दुनिया भारत के साथ संबंधों को कितना महत्व देती है।”

Point of View

यह स्पष्ट है कि एस. जयशंकर का यह बयान वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के बीच बढ़ते संबंधों को दर्शाता है। भारत को इन बदलावों के प्रति सजग रहकर अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी होगी।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

एस. जयशंकर ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि आज की राजनीति अर्थव्यवस्था पर हावी हो रही है और वैश्विक व्यवस्था में बदलाव आ रहा है।
भारत इन चुनौतियों का सामना कैसे करेगा?
भारत अपनी राष्ट्रीय क्षमता बढ़ाकर और वैश्विक प्रभाव बढ़ाकर इन बदलावों का सामना करेगा।
वैश्वीकरण के बारे में क्या कहा गया?
जयशंकर ने बताया कि वैश्वीकरण, अलगाव और सप्लाई की असुरक्षा जैसे दबावों का सामना करते हुए अन्य देश सुरक्षित रास्ते खोज रहे हैं।
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