काम से संतुलन की अहमियत समझी: हितेन तेजवानी की प्रेरक यात्रा
सारांश
Key Takeaways
- काम और जीवन का संतुलन महत्वपूर्ण है।
- महनत से ही सफलता मिलती है।
- नई कलाकारों को अपनी ताकत और कमजोरियां पहचाननी चाहिए।
- मानसिक शांति बनाए रखना आवश्यक है।
- परिवार के साथ समय बिताना भी जरूरी है।
नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। टीवी उद्योग की दुनिया जितनी आकर्षक लगती है, इसके पीछे की मेहनत और संघर्ष उतना ही गहरा होता है। कलाकारों को लगातार शूटिंग करनी होती है और कभी-कभी दिन-रात काम करना पड़ता है। इस संदर्भ में, टीवी अभिनेता हितेन तेजवानी ने राष्ट्र प्रेस को दिए एक साक्षात्कार में अपने करियर के प्रारंभिक वर्षों की मेहनत और वर्तमान दृष्टिकोण के बारे में खुलकर चर्चा की।
उन्होंने साझा किया कि एक समय ऐसा था, जब वह 24 घंटे में लगभग 18 से 19 घंटे काम करते थे।
हितेन ने कहा, ''टीवी इंडस्ट्री में मेरे प्रारंभिक दिनों में मेरा ध्यान केवल काम पर केंद्रित था। उस समय मैं लगातार शूटिंग में व्यस्त रहता था, और मुझे नींद के लिए बहुत कम समय मिलता था। कई बार तो, मैं 24 घंटे में 18 से 19 घंटे लगातार काम करता था और मुश्किल से कुछ घंटे सो पाता था।''
उन्होंने आगे कहा, ''उस वक्त मेरे अंदर काम के प्रति एक अद्वितीय जुनून था। मेरा एकमात्र ध्यान था कि मैं अपने काम को किस तरह और बेहतर बना सकता हूँ। वही मेहनत और लगन मुझे आज इस मुकाम तक लेकर आई है। अगर मैंने उस समय इतनी मेहनत न की होती, तो शायद आज मैं यहां तक नहीं पहुंच पाता।''
अभिनेता ने कहा, ''समय के साथ इंसान का नजरिया बदलता है। दो दशक से अधिक समय तक इस इंडस्ट्री में काम करने के बाद, अब मुझे एहसास होता है कि जीवन में केवल काम ही सब कुछ नहीं होता। लगातार काम करने के बाद एक ऐसा मोड़ आता है, जब इंसान को संतुलन की अहमियत समझ में आने लगती है। अब मैं कोशिश करता हूँ कि काम के घंटे सीमित रहें, ताकि मुझे आराम और परिवार के लिए भी पर्याप्त समय मिल सके।''
हितेन ने कहा, ''आज मैं अपने काम को पूरी ईमानदारी और मेहनत से करता हूँ, लेकिन साथ ही यह भी ध्यान रखता हूँ कि जीवन के अन्य पहलुओं को नजरअंदाज न करूँ। मुझे परिवार के साथ समय बिताना है, आराम करना है और मानसिक शांति बनाए रखनी है, क्योंकि यह उतना ही आवश्यक है, जितना कि पेशेवर सफलता हासिल करना।''
उन्होंने नए कलाकारों को भी सलाह दी। हितेन ने कहा, ''जो लोग इस इंडस्ट्री में आना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले अपने आप को समझना चाहिए। उन्हें जानना चाहिए कि उनकी ताकतें क्या हैं और कमजोरियां क्या हैं। जब इंसान अपनी कमजोरियों को पहचान लेता है, तभी वह उन्हें सुधारने की दिशा में काम कर सकता है।''