क्या 12 घंटे की शिफ्ट क्रिएटिविटी की दुश्मन है? विवेक रंजन अग्निहोत्री की राय

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क्या 12 घंटे की शिफ्ट क्रिएटिविटी की दुश्मन है? विवेक रंजन अग्निहोत्री की राय

सारांश

फिल्म निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री ने 12 घंटे की शिफ्ट के मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह समस्या फिल्म इंडस्ट्री में क्रिएटिविटी को प्रभावित कर रही है। क्या समय आ गया है कि इस पर ध्यान दिया जाए?

मुख्य बातें

12 घंटे की शिफ्ट एक गंभीर समस्या है।
यह क्रिएटिविटी को प्रभावित करती है।
लंबे काम के घंटे स्वास्थ्य को भी हानि पहुंचाते हैं।
निर्माताओं और निर्देशकों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सभी पक्षों को मिलकर समाधान निकालना चाहिए।

मुंबई, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म इंडस्ट्री में शूटिंग के दौरान 12 घंटे की शिफ्ट का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। कुछ इसे सही मानते हैं जबकि कुछ इसका विरोध कर रहे हैं। इस बीच, फिल्म निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने राष्ट्र प्रेस के साथ खुलकर अपनी राय साझा की। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में लंबे काम के घंटों के मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में 12 घंटे या उससे भी अधिक की शिफ्ट एक गंभीर समस्या है। यह एक क्रिएटिव फील्ड होते हुए भी फैक्ट्री की तरह बन गया है, जहां लोग थककर चूर हो जाते हैं और उनकी क्रिएटिविटी समाप्त हो जाती है।

अग्निहोत्री ने कहा कि मेकअप, विग, मूंछ-दाढ़ी लगाकर काम करना बहुत कठिन हो जाता है। सात-आठ घंटे के बाद मेकअप भी उतरने लगता है। प्रॉस्थेटिक्स ढीले पड़ने लगते हैं और व्यक्ति शारीरिक-मानसिक रूप से थक जाता है। शाम को इंसान की ऊर्जा अलग होती है, जबकि सुबह की ऊर्जा अलग होती है, लेकिन पैसा बचाने के लिए कम खर्च में अधिक काम करने की कोशिश की जाती है। भारत में अभाव के कारण लोग इसे सहन कर लेते हैं। उनके पास अधिकारों की जानकारी भी कम होती है और कोई सख्त नियम नहीं हैं।

निर्देशक ने कहा कि 12 घंटे लगातार क्रिएटिव काम करना असंभव है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि एक पेंटर से कहा जाए कि वह 12 घंटे पेंटिंग करता रहे या गायक से कहा जाए कि वह गाता रहे, तो वह भी थक जाएगा। फिल्में अब फैक्ट्री की तरह चल रही हैं, जहां 12 घंटे की शिफ्ट 13-14 घंटे तक खिंच जाती है। मुंबई जैसे शहर में आने-जाने में एक-दो घंटे और लगते हैं, जिससे कुल मिलाकर 14-16 घंटे काम होता है। अगले दिन फिर सुबह उठकर आना पड़ता है। खासकर एक्टर्स के लिए यह कठिन है। उन्हें हमेशा सुंदर, खुश और ताजगी भरा दिखना होता है। लंबे घंटों के बाद यह संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि बदलाव की आवश्यकता है ताकि फिल्में बेहतर बन सकें और लोग स्वस्थ रह सकें। विवेक रंजन ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक शिफ्ट के बाद उनकी भी क्रिएटिविटी समाप्त हो जाती है। उनका दिमाग काम नहीं करता, शारीरिक थकान के साथ भावनात्मक रूप से भी थक जाते हैं। इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। फिल्म इंडस्ट्री की यूनियंस, संगठन और सभी पक्षों को मिलकर बैठकर इस समस्या का समाधान निकालना जरूरी है। लंबे समय तक काम न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि क्रिएटिविटी और क्वालिटी को भी प्रभावित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक महत्वपूर्ण विषय है। यह न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि फिल्मों की गुणवत्ता पर भी असर डालता है। इसे सुलझाने के लिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

12 घंटे की शिफ्ट का क्या असर होता है?
12 घंटे की शिफ्ट से क्रिएटिविटी प्रभावित होती है और स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
क्या विवेक रंजन अग्निहोत्री की बातें महत्वपूर्ण हैं?
हां, उनकी बातें फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा हैं।
क्या इस समस्या का समाधान संभव है?
हां, इसके लिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना होगा और उचित नियम बनाने होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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