चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के दो IAS अधिकारियों को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया
सारांश
Key Takeaways
- प्रियंका सिंगला और पी. मोहनगांधी की नियुक्ति महत्वपूर्ण है।
- चुनाव आयोग की यह कार्रवाई चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए है।
- मतदान तिथियाँ 23 और 29 अप्रैल को होंगी।
कोलकाता, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को पश्चिम बंगाल कैडर के दो और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों को अन्य राज्यों में केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया।
इन अधिकारियों में प्रमुख प्रियंका सिंगला शामिल हैं, जो पश्चिम बंगाल कैडर की 2012 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में राज्य के नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव के रूप में कार्यरत हैं।
दूसरे अधिकारी पी. मोहनगांधी हैं, जो 2004 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में राज्य के वाणिज्य और उद्योग विभाग में सचिव के पद पर तैनात हैं।
इसके पूर्व, चुनाव आयोग ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सचिव अंतरा आचार्य और खाद्य प्रसंस्करण सचिव परवेज अहमद सिद्दीकी को भी केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया था।
हालांकि, सिद्दीकी और आचार्य ने अपने-अपने विभागों में प्रशासनिक कार्यभार का हवाला देते हुए चुनाव आयोग से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया।
17 मार्च को, पश्चिम बंगाल के पूर्व गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना को आयोग द्वारा तमिलनाडु में केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में स्थानांतरित किया गया था।
मतदान तिथियों की घोषणा होने की रात ही आयोग ने तत्कालीन पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रबर्ती को उनके पद से हटा दिया था और उन्हें राज्य की चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने से रोक दिया गया था।
चक्रबर्ती की जगह दुष्यंत नारियाला और मीना की जगह शंघमित्र घोष को नियुक्त किया गया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चक्रबर्ती और मीना को हटाए जाने की कड़ी आलोचना की थी और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई थी।
पश्चिम बंगाल में चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे। परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।