UNGA में जयशंकर का आह्वान: खाड़ी और यूक्रेन संघर्ष तुरंत बंद हों, भारत शांति प्रयासों में सहयोग को तैयार
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन में जारी सशस्त्र संघर्षों को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि ये युद्ध अपने भौगोलिक क्षेत्रों की सीमाओं से कहीं आगे जाकर वैश्विक विकास को बाधित कर रहे हैं और आर्थिक प्रगति की रफ्तार धीमी कर रहे हैं।
जयशंकर का मुख्य संदेश
जयशंकर ने महासभा के मंच से कहा, "जारी लड़ाई को लेकर हम बेहद चिंतित हैं।" उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि समुद्री जहाजों पर कार्यरत नाविकों की सुरक्षा तथा ऊर्जा और खाद्यान्न की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के मामले में हर संभव सहयोग देने के लिए तत्पर है।
खाड़ी क्षेत्र पर भारत का रुख
खाड़ी संघर्ष का उल्लेख करते हुए जयशंकर ने कहा कि यह लड़ाई पहले से ही नाजुक क्षेत्रीय परिस्थितियों को और अधिक गंभीर बना रही है। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की: "भारत सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा एवं व्यापार की आवाजाही बिना रुकावट जारी रखने की अपील करता है।" यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी में तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित कर रहा है।
यूक्रेन संघर्ष और मोदी के शांति संदेश की याद
यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दिए गए संदेश का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि जैसा कि मोदी ने कहा है, "अब अंतहीन युद्ध का रास्ता छोड़कर शांति की ओर बढ़ना होगा।" जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत यूक्रेन में शांति स्थापना के लिए चल रही अंतरराष्ट्रीय कोशिशों का समर्थन करता है।
इज़रायल फिलिस्तीन: दो राष्ट्र समाधान का समर्थन
पश्चिम एशिया के संकट पर जयशंकर ने इज़रायल और फिलिस्तीन के बीच दो राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के दीर्घकालिक समर्थन को एक बार फिर दोहराया। उनके अनुसार, स्थायी शांति के लिए इज़रायल और फिलिस्तीन का दो अलग अलग संप्रभु राष्ट्रों के रूप में सह अस्तित्व अनिवार्य है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए मानवीय सहायता और राहत कार्यों में अपना योगदान जारी रखे हुए है। गौरतलब है कि यह भारत की परंपरागत विदेश नीति के अनुरूप है, जो एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की वकालत करती रही है।
वैश्विक प्रभाव और भारत की भूमिका
जयशंकर की यह अपील ऐसे समय में आई है जब दोनों संघर्ष — खाड़ी और यूक्रेन — वैश्विक खाद्य, ऊर्जा और वस्तु आपूर्ति शृंखलाओं पर गहरा असर डाल रहे हैं, जिसका सर्वाधिक बोझ विकासशील देशों पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस मंच पर भारत ने एक बार फिर खुद को संघर्षों में मध्यस्थता और संवाद के पक्षधर के रूप में स्थापित किया। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि भारत की यह कूटनीतिक पहल किसी ठोस बहुपक्षीय कदम का रूप लेती है या नहीं।