27 सितंबर 2026
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UNGA में जयशंकर का आह्वान: खाड़ी और यूक्रेन संघर्ष तुरंत बंद हों, भारत शांति प्रयासों में सहयोग को तैयार

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UNGA में जयशंकर का आह्वान: खाड़ी और यूक्रेन संघर्ष तुरंत बंद हों, भारत शांति प्रयासों में सहयोग को तैयार

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर ने UNGA के मंच से खाड़ी और यूक्रेन में युद्ध तुरंत बंद करने की अपील की, मोदी के 'अंतहीन युद्ध छोड़ो' संदेश को दुनिया के सामने रखा और इज़रायल फिलिस्तीन पर दो राष्ट्र समाधान का समर्थन दोहराया। भारत ने खाद्य, ऊर्जा सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा पर जोर देते हुए मध्यस्थ की भूमिका में खुद को फिर से स्थापित किया।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 27 सितंबर 2026 को UNGA में खाड़ी और यूक्रेन संघर्षों को तत्काल समाप्त करने की अपील की।
जयशंकर ने कहा कि ये युद्ध वैश्विक विकास को बाधित कर रहे हैं और खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश दोहराया — "अंतहीन युद्ध छोड़कर शांति की ओर बढ़ना होगा" — जो उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन को दिया था।
भारत ने इज़रायल फिलिस्तीन विवाद में दो राष्ट्र समाधान के समर्थन को दोहराया।
जयशंकर ने फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए भारतीय मानवीय सहायता जारी रहने की पुष्टि की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन में जारी सशस्त्र संघर्षों को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि ये युद्ध अपने भौगोलिक क्षेत्रों की सीमाओं से कहीं आगे जाकर वैश्विक विकास को बाधित कर रहे हैं और आर्थिक प्रगति की रफ्तार धीमी कर रहे हैं।

जयशंकर का मुख्य संदेश

जयशंकर ने महासभा के मंच से कहा, "जारी लड़ाई को लेकर हम बेहद चिंतित हैं।" उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि समुद्री जहाजों पर कार्यरत नाविकों की सुरक्षा तथा ऊर्जा और खाद्यान्न की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के मामले में हर संभव सहयोग देने के लिए तत्पर है।

खाड़ी क्षेत्र पर भारत का रुख

खाड़ी संघर्ष का उल्लेख करते हुए जयशंकर ने कहा कि यह लड़ाई पहले से ही नाजुक क्षेत्रीय परिस्थितियों को और अधिक गंभीर बना रही है। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की: "भारत सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा एवं व्यापार की आवाजाही बिना रुकावट जारी रखने की अपील करता है।" यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी में तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति शृंखला को प्रभावित कर रहा है।

यूक्रेन संघर्ष और मोदी के शांति संदेश की याद

यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दिए गए संदेश का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि जैसा कि मोदी ने कहा है, "अब अंतहीन युद्ध का रास्ता छोड़कर शांति की ओर बढ़ना होगा।" जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत यूक्रेन में शांति स्थापना के लिए चल रही अंतरराष्ट्रीय कोशिशों का समर्थन करता है।

इज़रायल फिलिस्तीन: दो राष्ट्र समाधान का समर्थन

पश्चिम एशिया के संकट पर जयशंकर ने इज़रायल और फिलिस्तीन के बीच दो राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के दीर्घकालिक समर्थन को एक बार फिर दोहराया। उनके अनुसार, स्थायी शांति के लिए इज़रायल और फिलिस्तीन का दो अलग अलग संप्रभु राष्ट्रों के रूप में सह अस्तित्व अनिवार्य है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए मानवीय सहायता और राहत कार्यों में अपना योगदान जारी रखे हुए है। गौरतलब है कि यह भारत की परंपरागत विदेश नीति के अनुरूप है, जो एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की वकालत करती रही है।

वैश्विक प्रभाव और भारत की भूमिका

जयशंकर की यह अपील ऐसे समय में आई है जब दोनों संघर्ष — खाड़ी और यूक्रेन — वैश्विक खाद्य, ऊर्जा और वस्तु आपूर्ति शृंखलाओं पर गहरा असर डाल रहे हैं, जिसका सर्वाधिक बोझ विकासशील देशों पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस मंच पर भारत ने एक बार फिर खुद को संघर्षों में मध्यस्थता और संवाद के पक्षधर के रूप में स्थापित किया। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि भारत की यह कूटनीतिक पहल किसी ठोस बहुपक्षीय कदम का रूप लेती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि ग्लोबल साउथ इसे संतुलित नेतृत्व। असली सवाल यह है कि क्या भारत की 'मध्यस्थ' छवि महज वाक्पटुता तक सीमित है या उसके पीछे कोई ठोस कूटनीतिक रोडमैप है। यूक्रेन में भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा है और खाड़ी में उसके व्यापारिक हित जटिल हैं — ऐसे में 'संयम' की अपील की विश्वसनीयता परखी जाएगी। मोदी के 'युद्ध का युग नहीं' वाले वाक्य की अंतरराष्ट्रीय अनुगूँज तो है, पर उसे नीतिगत दबाव में बदलने की क्षमता अभी साबित होनी बाकी है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UNGA में जयशंकर ने क्या कहा?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन में जारी संघर्षों को तत्काल समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ये युद्ध वैश्विक विकास को बाधित कर रहे हैं और खाद्य ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डाल रहे हैं।
भारत का यूक्रेन युद्ध पर क्या रुख है?
भारत यूक्रेन में शांति बहाली के लिए चल रही कोशिशों का समर्थन करता है। जयशंकर ने प्रधानमंत्री मोदी का वह संदेश दोहराया जो उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन को दिया था — 'अब अंतहीन युद्ध का रास्ता छोड़कर शांति की ओर बढ़ना होगा।'
जयशंकर ने इज़रायल फिलिस्तीन मुद्दे पर क्या कहा?
जयशंकर ने इज़रायल और फिलिस्तीन के बीच दो राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया, जिसके तहत दोनों देश संप्रभु राष्ट्रों के रूप में शांतिपूर्वक सह अस्तित्व में रहें। उन्होंने यह भी बताया कि भारत फिलिस्तीनी नागरिकों को मानवीय सहायता देना जारी रखे हुए है।
खाड़ी संघर्ष में भारत की क्या माँग है?
भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव घटाने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा व्यापार की आवाजाही निर्बाध रखने की अपील की है। जयशंकर ने समुद्री जहाजों पर कार्यरत नाविकों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता बताया।
भारत खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा में कैसे योगदान दे रहा है?
जयशंकर के अनुसार भारत खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। भारत ने संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में आपूर्ति बाधित न हो, इसे सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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