31 अक्टूबर 2026
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जयशंकर ने अटलांटा G20 में काजा कैलास से यूक्रेन और खाड़ी संघर्ष पर की अहम चर्चा

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जयशंकर ने अटलांटा G20 में काजा कैलास से यूक्रेन और खाड़ी संघर्ष पर की अहम चर्चा

सारांश

अटलांटा G20 के हाशिये पर जयशंकर और ईयू की काजा कैलास की मुलाकात महज़ शिष्टाचार नहीं थी — भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ग्लोबल साउथ शिपिंग हमलों की सबसे बड़ी कीमत चुका रहा है, और कूटनीति को सैन्य समाधान से आगे रखना होगा।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 31 अक्टूबर 2026 को अटलांटा G20 के दौरान ईयू एचआरवीपी काजा कैलास से मुलाकात कर यूक्रेन और खाड़ी संघर्ष पर चर्चा की।
इससे पहले 25 अक्टूबर 2026 को दोनों नेताओं के बीच फोन पर राजनयिक समन्वय पर बातचीत हुई थी।
कैलास ने काला सागर में नौवहन स्वतंत्रता की व्यवस्था का आह्वान किया और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर टोल के विरुद्ध ईयू के विरोध की पुष्टि की।
जयशंकर ने कहा कि ग्लोबल साउथ असैन्य नौवहन हमलों की असंगत कीमत चुका रहा है, जिससे ईंधन, भोजन और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
भारत ने UNCLOS के ढाँचे के तहत नौवहन सुरक्षा और शिपिंग हमलों की तत्काल समाप्ति की माँग की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 31 अक्टूबर 2026 को अटलांटा में आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान यूरोपीय संघ की विदेश एवं सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कैलास से मुलाकात कर यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी की स्थिति पर गहन विचार-विमर्श किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक समुद्री मार्गों पर बढ़ते हमले ऊर्जा, खाद्य आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्होंने ईयू एचआरवीपी काजा कैलास के साथ यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी की स्थिति पर चर्चा की। गौरतलब है कि इससे पहले 25 अक्टूबर 2026 को भी दोनों नेताओं ने फोन पर राजनयिक समन्वय के लिए बातचीत की थी, जिसमें खाड़ी क्षेत्र सहित वैश्विक संकटों पर विचार साझा किए गए थे।

G20 बैठक के पहले पूर्ण सत्र में कैलास ने भी रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व संघर्ष से उत्पन्न वैश्विक खतरों को रेखांकित किया।

काजा कैलास का रुख

कैलास ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि 'यूक्रेन पर रूस का हमला और मध्य पूर्व संकट ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति, व्यापार और नेविगेशन की स्वतंत्रता के लिए बड़ा खतरा है। समुद्री मार्ग वैश्विक जीवन रेखाएं हैं।' उन्होंने काला सागर में नौवहन स्वतंत्रता की व्यवस्था बनाने का आह्वान किया और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर टोल व शुल्क के विरुद्ध यूरोपीय संघ के दृढ़ विरोध की पुनः पुष्टि की।

कैलास ने यह भी कहा कि 'ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।'

भारत का स्पष्ट संदेश

जयशंकर ने सत्र में भारत के रुख को दृढ़ता से सामने रखा। उन्होंने कहा कि सैन्य समाधान वैश्विक चुनौतियों का स्थायी हल नहीं हैं और कूटनीति को पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ की चिंता उठाते हुए एक्स पर लिखा कि 'वैश्विक दक्षिण असैन्य नौवहन और नाविकों पर हमलों के परिणामों को असमान रूप से भुगत रहा है, जिससे ईंधन, भोजन और उर्वरकों की उपलब्धता और लागत खतरे में पड़ रही है।'

विदेश मंत्री ने UNCLOS (संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय) के ढाँचे के अंतर्गत नौवहन की स्वतंत्रता की सुरक्षा और शिपिंग पर हमलों की तत्काल समाप्ति की ज़रूरत पर भी बल दिया।

व्यापक संदर्भ और महत्व

यह बैठक ऐसे नाज़ुक दौर में हुई जब लाल सागर और अदन की खाड़ी में शिपिंग हमलों के कारण वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हो रहे हैं, जिसका सबसे अधिक असर विकासशील देशों पर पड़ रहा है। भारत, जो ऊर्जा आयात और खाद्य निर्यात दोनों के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भर है, इन व्यवधानों से सीधे प्रभावित होता है। यह Nवीं ऐसी राजनयिक बातचीत है जिसमें भारत ने बहुपक्षीय मंच पर कूटनीति-प्रथम दृष्टिकोण को आगे रखा है।

आगे चलकर, G20 मंच पर बनी सहमति और द्विपक्षीय संवाद यह तय करेंगे कि यूक्रेन तथा मध्य पूर्व संघर्ष से उपजे समुद्री खतरों से निपटने में वैश्विक कूटनीति कितनी प्रभावी रह पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अक्सर पश्चिमी सुरक्षा चिंताओं की छाया में दब जाता है। UNCLOS का स्पष्ट उल्लेख भारत की उस परंपरागत नीति को दोहराता है जो नियम-आधारित व्यवस्था की वकालत करती है, लेकिन किसी एक शक्ति-गुट की छत्रछाया में नहीं। विरोधाभास यह है कि भारत यूक्रेन पर रूस की निंदा किए बिना समुद्री स्वतंत्रता की माँग करता है — एक संतुलन जो रणनीतिक स्वायत्तता की देन है, पर जिसे यूरोपीय साझेदार हमेशा पर्याप्त नहीं मानते। यह देखना होगा कि अटलांटा की इस बातचीत से G20 के साझा दस्तावेज़ में कोई ठोस प्रतिबद्धता उभरती है या नहीं।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और काजा कैलास की G20 बैठक में क्या हुआ?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 31 अक्टूबर 2026 को अटलांटा में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईयू की उच्च प्रतिनिधि काजा कैलास से मुलाकात की और यूक्रेन संघर्ष तथा खाड़ी की स्थिति पर विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक समुद्री मार्गों पर हमलों से ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति खतरे में है।
भारत ने G20 में नौवहन स्वतंत्रता पर क्या रुख अपनाया?
भारत ने UNCLOS के ढाँचे के अंतर्गत नौवहन की स्वतंत्रता की सुरक्षा और असैन्य जहाज़ों पर हमलों की तत्काल समाप्ति की माँग की। जयशंकर ने विशेष रूप से कहा कि ग्लोबल साउथ इन हमलों की असंगत कीमत चुका रहा है, जिससे ईंधन, भोजन और उर्वरकों की उपलब्धता और लागत प्रभावित हो रही है।
काजा कैलास ने काला सागर पर क्या कहा?
काजा कैलास ने G20 बैठक में काला सागर में नौवहन स्वतंत्रता की व्यवस्था बनाने का आह्वान किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर टोल और शुल्क के विरुद्ध यूरोपीय संघ के विरोध की पुनः पुष्टि करते हुए कहा कि समुद्री मार्ग वैश्विक जीवन रेखाएं हैं।
जयशंकर और कैलास के बीच पहले कब बातचीत हुई थी?
दोनों नेताओं ने 25 अक्टूबर 2026 को फोन पर बातचीत की थी, जिसमें राजनयिक पदों पर समन्वय और खाड़ी क्षेत्र सहित वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई थी। अटलांटा की यह बैठक उसी संवाद की अगली कड़ी है।
ग्लोबल साउथ पर शिपिंग हमलों का क्या असर है?
जयशंकर के अनुसार, असैन्य नौवहन और नाविकों पर हमलों के परिणाम विकासशील देशों पर असमान रूप से पड़ रहे हैं। इससे ईंधन, भोजन और उर्वरकों की उपलब्धता तथा लागत पर सीधा असर पड़ रहा है, जो उन देशों की आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
राष्ट्र प्रेस
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