जयशंकर ने अटलांटा G20 में काजा कैलास से यूक्रेन और खाड़ी संघर्ष पर की अहम चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 31 अक्टूबर 2026 को अटलांटा में आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान यूरोपीय संघ की विदेश एवं सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कैलास से मुलाकात कर यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी की स्थिति पर गहन विचार-विमर्श किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक समुद्री मार्गों पर बढ़ते हमले ऊर्जा, खाद्य आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्होंने ईयू एचआरवीपी काजा कैलास के साथ यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी की स्थिति पर चर्चा की। गौरतलब है कि इससे पहले 25 अक्टूबर 2026 को भी दोनों नेताओं ने फोन पर राजनयिक समन्वय के लिए बातचीत की थी, जिसमें खाड़ी क्षेत्र सहित वैश्विक संकटों पर विचार साझा किए गए थे।
G20 बैठक के पहले पूर्ण सत्र में कैलास ने भी रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व संघर्ष से उत्पन्न वैश्विक खतरों को रेखांकित किया।
काजा कैलास का रुख
कैलास ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि 'यूक्रेन पर रूस का हमला और मध्य पूर्व संकट ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति, व्यापार और नेविगेशन की स्वतंत्रता के लिए बड़ा खतरा है। समुद्री मार्ग वैश्विक जीवन रेखाएं हैं।' उन्होंने काला सागर में नौवहन स्वतंत्रता की व्यवस्था बनाने का आह्वान किया और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर टोल व शुल्क के विरुद्ध यूरोपीय संघ के दृढ़ विरोध की पुनः पुष्टि की।
कैलास ने यह भी कहा कि 'ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।'
भारत का स्पष्ट संदेश
जयशंकर ने सत्र में भारत के रुख को दृढ़ता से सामने रखा। उन्होंने कहा कि सैन्य समाधान वैश्विक चुनौतियों का स्थायी हल नहीं हैं और कूटनीति को पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ की चिंता उठाते हुए एक्स पर लिखा कि 'वैश्विक दक्षिण असैन्य नौवहन और नाविकों पर हमलों के परिणामों को असमान रूप से भुगत रहा है, जिससे ईंधन, भोजन और उर्वरकों की उपलब्धता और लागत खतरे में पड़ रही है।'
विदेश मंत्री ने UNCLOS (संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय) के ढाँचे के अंतर्गत नौवहन की स्वतंत्रता की सुरक्षा और शिपिंग पर हमलों की तत्काल समाप्ति की ज़रूरत पर भी बल दिया।
व्यापक संदर्भ और महत्व
यह बैठक ऐसे नाज़ुक दौर में हुई जब लाल सागर और अदन की खाड़ी में शिपिंग हमलों के कारण वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हो रहे हैं, जिसका सबसे अधिक असर विकासशील देशों पर पड़ रहा है। भारत, जो ऊर्जा आयात और खाद्य निर्यात दोनों के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भर है, इन व्यवधानों से सीधे प्रभावित होता है। यह Nवीं ऐसी राजनयिक बातचीत है जिसमें भारत ने बहुपक्षीय मंच पर कूटनीति-प्रथम दृष्टिकोण को आगे रखा है।
आगे चलकर, G20 मंच पर बनी सहमति और द्विपक्षीय संवाद यह तय करेंगे कि यूक्रेन तथा मध्य पूर्व संघर्ष से उपजे समुद्री खतरों से निपटने में वैश्विक कूटनीति कितनी प्रभावी रह पाती है।