31 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मथुरा पॉक्सो अदालत ने श्याम बिहारी को सुनाई आजीवन कारावास की सजा, ₹1.43 लाख जुर्माना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मथुरा पॉक्सो अदालत ने श्याम बिहारी को सुनाई आजीवन कारावास की सजा, ₹1.43 लाख जुर्माना

सारांश

मथुरा की पॉक्सो विशेष अदालत ने श्याम बिहारी को नाबालिग बच्ची के यौन शोषण, बलात्कार और CSAM रखने का दोषी ठहराया। सीबीआई की जाँच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मिली आजीवन कारावास की यह सजा बाल सुरक्षा कानूनों के कड़े क्रियान्वयन का उदाहरण है।

मुख्य बातें

मथुरा की पॉक्सो विशेष अदालत ने श्याम बिहारी को नाबालिग बच्ची के यौन शोषण मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने दोषी पर ₹1.43 लाख का जुर्माना भी लगाया।
सीबीआई ने 17 जून 2025 को मामला दर्ज किया और 14 अगस्त 2025 को चार्जशीट दाखिल की।
ट्रायल कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2025 को आरोप तय किए; दोषसिद्धि पॉक्सो अधिनियम, 2012 , IPC और IT अधिनियम, 2000 के तहत हुई।
आरोपों में बलात्कार, गंभीर यौन हमला, बच्चे का अश्लील उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल और CSAM रखना शामिल है।

उत्तर प्रदेश के मथुरा में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम, 2012 के तहत गठित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने एक नाबालिग बच्ची के यौन शोषण के मामले में आरोपी श्याम बिहारी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 31 अक्टूबर 2026 को बताया कि अदालत ने दोषी पर ₹1.43 लाख का जुर्माना भी लगाया है।

अपराध और आरोपों का विवरण

सीबीआई के अनुसार, अदालत ने श्याम बिहारी को पॉक्सो अधिनियम, 2012, भारतीय दंड संहिता (IPC) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 के तहत विभिन्न संगीन अपराधों का दोषी पाया। इन अपराधों में बलात्कार, गंभीर यौन हमला, अश्लील उद्देश्यों के लिए बच्चे का इस्तेमाल करना और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) अपने पास रखना शामिल है।

सीबीआई ने 17 जून 2025 को श्याम बिहारी के विरुद्ध मामला दर्ज किया था। उस पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री एकत्र करने, प्रसारित करने और प्रकाशित करने का आरोप था। जाँच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि उसने एक नाबालिग बच्ची के साथ गंभीर यौन हमला भी किया था।

जाँच प्रक्रिया और पीड़िता की सुरक्षा

सीबीआई ने जाँच के दौरान नाबालिग पीड़िता की पहचान की और उसकी सुरक्षा, गरिमा एवं मानसिक स्थिति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। पीड़िता को उचित काउंसलिंग प्रदान की गई। एजेंसी ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों, बाल यौन शोषण मामलों के विशेषज्ञ चिकित्सकों और बाल संरक्षण अधिकारियों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखा।

डिजिटल साक्ष्यों को विधिसम्मत तरीके से एकत्र, संभाल और सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया गया, जो अंततः अदालत में दोषसिद्धि का आधार बना।

मुकदमे का घटनाक्रम

जाँच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 14 अगस्त 2025 को आरोपी के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2025 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए। मुकदमे की समाप्ति के बाद अदालत ने श्याम बिहारी को सभी आरोपों में दोषी पाते हुए पॉक्सो अधिनियम, 2012, IPC और IT अधिनियम, 2000 की प्रासंगिक धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

सीबीआई की प्रतिबद्धता

सीबीआई ने स्पष्ट किया कि वह बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े अपराधों की जाँच और अभियोजन के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। एजेंसी ऐसे मामलों को उच्च प्राथमिकता देती है, जिसमें बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों और उनकी गरिमा का पूरा ध्यान रखा जाता है।

गौरतलब है कि यह मामला डिजिटल माध्यम से बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार और वास्तविक यौन हमले के संयुक्त अपराधों का है — एक ऐसी प्रवृत्ति जिस पर देशभर की अदालतें और जाँच एजेंसियाँ अब कड़ा रुख अपना रही हैं। यह दोषसिद्धि पॉक्सो मामलों में त्वरित और कठोर न्यायिक कार्रवाई की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण संदेश है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह दर्शाता है कि जब डिजिटल साक्ष्य संग्रह, बाल संरक्षण प्रोटोकॉल और त्वरित अभियोजन एकसाथ काम करें तो पॉक्सो कानून वास्तव में दाँत दिखा सकता है। सीबीआई ने जून 2025 से अक्टूबर 2026 तक — यानी लगभग सोलह महीनों में — मामला दर्ज करने से सजा तक की यात्रा पूरी की, जो सामान्यतः वर्षों खिंचने वाले POCSO मुकदमों में एक उल्लेखनीय गति है। असली चुनौती यह है कि इस मॉडल को उन हज़ारों मामलों तक पहुँचाया जाए जहाँ राज्य पुलिस जाँच करती है और डिजिटल फॉरेंसिक क्षमता कहीं कमज़ोर है। एक दोषसिद्धि न्याय का प्रतीक है; प्रणालीगत सुधार ही बच्चों की असली सुरक्षा होगी।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मथुरा पॉक्सो मामले में किसे और क्या सजा मिली?
मथुरा की पॉक्सो विशेष अदालत ने आरोपी श्याम बिहारी को नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार, गंभीर यौन हमला, अश्लील उद्देश्यों के लिए बच्चे का इस्तेमाल और CSAM रखने का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने ₹1.43 लाख का जुर्माना भी लगाया।
इस मामले की जाँच किसने और कब की?
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 17 जून 2025 को श्याम बिहारी के विरुद्ध मामला दर्ज किया। जाँच के बाद 14 अगस्त 2025 को चार्जशीट दाखिल की गई और ट्रायल कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2025 को आरोप तय किए।
आरोपी पर कौन-कौन से कानूनों के तहत सजा सुनाई गई?
श्याम बिहारी को पॉक्सो अधिनियम, 2012, भारतीय दंड संहिता (IPC) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 की प्रासंगिक धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया। IT अधिनियम के तहत आरोप इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से CSAM एकत्र करने, भेजने और प्रकाशित करने से संबंधित थे।
जाँच के दौरान पीड़िता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की गई?
सीबीआई ने पीड़िता की पहचान करने के बाद उसकी सुरक्षा, गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उसे उचित काउंसलिंग प्रदान की गई और फॉरेंसिक विशेषज्ञों, विशेषज्ञ चिकित्सकों तथा बाल संरक्षण अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखा गया।
पॉक्सो मामलों में सीबीआई की क्या भूमिका होती है?
सीबीआई बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े गंभीर मामलों को उच्च प्राथमिकता देती है। यह एजेंसी डिजिटल साक्ष्य संग्रह, फॉरेंसिक जाँच और बाल संरक्षण प्रोटोकॉल के पालन के साथ अभियोजन सुनिश्चित करती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले