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वाराणसी पॉक्सो कोर्ट ने रवि कुमार पटेल को बाल यौन शोषण में आजीवन कारावास, ₹2.75 लाख जुर्माना

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वाराणसी पॉक्सो कोर्ट ने रवि कुमार पटेल को बाल यौन शोषण में आजीवन कारावास, ₹2.75 लाख जुर्माना

सारांश

वाराणसी की पॉक्सो अदालत ने रवि कुमार पटेल को बाल यौन शोषण, CSAM संग्रह और आपराधिक साजिश का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और ₹2.75 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। CBI ने जून 2022 में मामला दर्ज कर सितंबर 2022 में चार्जशीट दाखिल की थी।

मुख्य बातें

वाराणसी की पॉक्सो अदालत ने रवि कुमार पटेल को आजीवन कारावास और ₹2,75,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
दोषी को IPC, पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट के तहत दुष्कर्म, गंभीर यौन उत्पीड़न, CSAM संग्रह और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया गया।
CBI ने यह मामला जून 2022 में दर्ज किया और 6 सितंबर 2022 को चार्जशीट दाखिल की।
23 मार्च 2023 को अदालत ने आरोप तय किए; ट्रायल के दौरान फोरेंसिक और चिकित्सा विशेषज्ञों की गवाही पेश की गई।
जांच के दौरान नाबालिग पीड़ित को तुरंत बचाया गया और उसकी काउंसलिंग कराई गई।

वाराणसी की पॉक्सो अदालत ने बाल यौन शोषण के दोषी रवि कुमार पटेल को आजीवन कारावास और ₹2,75,000 के जुर्माने की सजा सुनाई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट और ट्रायल के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। यह मामला जून 2022 में दर्ज किया गया था और बाद में इसमें गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोप भी जोड़े गए थे।

मामले का पूरा घटनाक्रम

CBI ने जून 2022 में यह मुकदमा दर्ज किया था। शुरुआत में आरोप बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एकत्र करने, भेजने और प्रकाशित करने तक सीमित थे। जांच आगे बढ़ने पर CBI को पता चला कि आरोपी ने एक नाबालिग बच्चे के साथ गंभीर यौन उत्पीड़न भी किया था। इसके तुरंत बाद पीड़ित बच्चे को बचाकर सुरक्षित संरक्षण में लिया गया।

दोषसिद्धि के आधार

अदालत ने रवि कुमार पटेल को भारतीय दंड संहिता (IPC), पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट के तहत कई गंभीर अपराधों का दोषी ठहराया। इनमें दुष्कर्म, पेनिट्रेटिव सेक्सुअल ऑफेंस, पोर्नोग्राफिक उद्देश्यों के लिए बच्चे का उपयोग, बाल अश्लील सामग्री को संग्रहीत करना और आपराधिक साजिश शामिल हैं। CBI ने 6 सितंबर 2022 को चार्जशीट दाखिल की और 23 मार्च 2023 को अदालत ने आरोपी पर आरोप तय किए।

CBI की जांच प्रक्रिया

CBI ने इस मामले की जांच अत्यंत संवेदनशीलता के साथ की। फोरेंसिक विशेषज्ञों, बाल यौन शोषण मामलों के चिकित्सा विशेषज्ञों और बाल संरक्षण अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। जांच के दौरान नाबालिग पीड़ित की काउंसलिंग कराई गई ताकि उसकी भावनात्मक स्थिति स्थिर रहे। गौरतलब है कि यह मामला उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसके तहत CBI देश भर में CSAM से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है।

CBI की प्रतिबद्धता

CBI ने स्पष्ट किया है कि बाल यौन शोषण और उत्पीड़न से जुड़े मामलों को एजेंसी सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। ब्यूरो ने दोहराया कि वह बच्चों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध रहेगा।

आगे की राह

अदालत के इस फैसले को बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में CSAM से जुड़े मामलों की संख्या में वृद्धि की चिंता लगातार जताई जा रही है। दोषी अब उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है, जबकि पीड़ित बच्चे का पुनर्वास जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए ऐसे फैसले प्रणाली की क्षमता का संकेत देते हैं। असली सवाल यह है कि क्या पीड़ित पुनर्वास तंत्र उतना ही मजबूत है जितना अभियोजन — क्योंकि न्याय केवल सजा में नहीं, बच्चे की वापसी में भी है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी पॉक्सो कोर्ट ने रवि कुमार पटेल को क्या सजा सुनाई?
अदालत ने रवि कुमार पटेल को आजीवन कारावास और ₹2,75,000 के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह सजा IPC, पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट के तहत कई गंभीर अपराधों में दोषी पाए जाने पर दी गई।
इस मामले की जांच कैसे शुरू हुई?
CBI ने जून 2022 में यह मामला बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के इलेक्ट्रॉनिक संग्रह और प्रसार के आरोपों पर दर्ज किया था। जांच आगे बढ़ने पर एक नाबालिग के साथ प्रत्यक्ष यौन उत्पीड़न के साक्ष्य भी सामने आए।
रवि कुमार पटेल पर किन-किन धाराओं में आरोप लगाए गए?
आरोपी पर दुष्कर्म, पेनिट्रेटिव सेक्सुअल ऑफेंस, पोर्नोग्राफिक उद्देश्यों के लिए बच्चे का उपयोग, CSAM संग्रह और आपराधिक साजिश के आरोप IPC, पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट के तहत लगाए गए।
CBI ने इस मामले में चार्जशीट कब दाखिल की?
CBI ने 6 सितंबर 2022 को रवि कुमार पटेल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद 23 मार्च 2023 को अदालत ने आरोपी पर आरोप तय किए और ट्रायल प्रक्रिया शुरू हुई।
पीड़ित नाबालिग के लिए क्या कदम उठाए गए?
जांच के दौरान पीड़ित बच्चे को तुरंत बचाकर सुरक्षित संरक्षण में लिया गया। CBI ने बाल संरक्षण अधिकारियों के साथ समन्वय करते हुए पीड़ित की काउंसलिंग कराई ताकि उसकी भावनात्मक स्थिति स्थिर रहे।
राष्ट्र प्रेस
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