तीस हजारी कोर्ट का फैसला: सीबीआई के संयुक्त निदेशक रमनीश और दिल्ली पुलिस के वी.के. पांडे को 3 महीने की सजा
सारांश
Key Takeaways
- तीस हजारी कोर्ट ने 28 अप्रैल 2025 को सीबीआई के संयुक्त निदेशक रमनीश और दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी वी.के. पांडे को 3 महीने की सजा सुनाई।
- 18 अप्रैल 2025 को दोनों को मारपीट और आपराधिक अतिक्रमण के आरोपों में दोषी ठहराया गया था।
- मामला अक्टूबर 2000 में एक आईआरएस अधिकारी की गिरफ्तारी से जुड़ा है; शिकायतकर्ता को कथित तौर पर 38 दिन जेल में रहना पड़ा था।
- शिकायतकर्ता को न्याय पाने के लिए 26 वर्ष तक प्रतीक्षा करनी पड़ी।
- अदालत ने सजा के साथ दोनों दोषियों को जमानत भी दे दी।
नई दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट ने 28 अप्रैल 2025 को वर्ष 2000 के एक पुराने मामले में सीबीआई के संयुक्त निदेशक रमनीश और दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी वी.के. पांडे को तीन महीने की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों दोषियों को सजा के साथ-साथ जमानत भी दे दी है। यह मामला अक्टूबर 2000 में एक आईआरएस अधिकारी की गिरफ्तारी और उससे जुड़ी कथित कार्रवाई से संबंधित है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा प्रकरण लगभग 26 वर्ष पुराना है। अक्टूबर 2000 में एक आईआरएस अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें कथित तौर पर 38 दिन तक जेल में रहना पड़ा था। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने कथित रूप से सिस्टम का दुरुपयोग किया था। मामले की सुनवाई दशकों तक न्यायिक प्रक्रिया में चलती रही।
दोषसिद्धि और सजा का फैसला
इससे पहले 18 अप्रैल 2025 को अदालत ने दोनों अधिकारियों को मारपीट और आपराधिक अतिक्रमण के आरोपों में दोषी ठहराया था। सजा पर हुई सुनवाई में शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत से अधिकतम सजा देने की माँग की। उन्होंने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता को न्याय पाने के लिए 26 वर्ष तक प्रतीक्षा करनी पड़ी, इसलिए अदालत को अधिकतम सजा और उचित मुआवजे पर विचार करना चाहिए।
बचाव पक्ष की दलीलें
वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने दोषियों के लिए सजा में नरमी की अपील की। उन्होंने दलील दी कि दोनों अधिकारी अपनी निजी इच्छा से उस घटना में शामिल नहीं थे और न ही किसी व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते उन्होंने कार्रवाई की थी। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि यह पूरा मामला आधिकारिक प्रक्रिया का हिस्सा था और दोनों अधिकारियों ने लंबी विभागीय जाँच तथा ट्रायल का सामना किया है।
अदालत का अंतिम निर्णय
लंबी बहस के बाद अदालत ने दोनों दोषियों को तीन महीने की सजा सुनाते हुए जमानत की अनुमति भी दे दी। गौरतलब है कि यह मामला पिछले कई दशकों से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित था और अब अदालत का अंतिम निर्णय सामने आया है। यह फैसला उन मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है जहाँ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों पर सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगते हैं।