वाराणसी मानव तस्करी केस: पीड़िता नाबालिग को ₹2 लाख की सहायता, 3 आरोपी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र में सामने आए मानव तस्करी और दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़िता नाबालिग बालिका को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से ₹2 लाख की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। वाराणसी प्रशासन द्वारा भेजा गया यह प्रस्ताव तत्काल स्वीकृत किया गया, जिसे पीड़िता के पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, मूल रूप से बिहार की रहने वाली पीड़िता नाबालिग बालिका की माँ ने कथित तौर पर पैसों के लालच में एक व्यक्ति से उसकी झूठी शादी करा दी थी। सारनाथ थाना पुलिस ने मानव तस्करी के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए बालिका को बरामद किया और पीड़िता की माँ सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध मानव तस्करी, दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की है।
पीड़िता के पुनर्वास की व्यवस्था
जिलाधिकारी वाराणसी ने बताया कि बालिका को 20 मई को ही बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और उसे राजकीय बाल गृह (बालिका) में रखा गया है। बालिका को मनोचिकित्सकों के माध्यम से काउंसलिंग उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उसे मानसिक और भावनात्मक संबल मिल सके।
प्रशासन के अनुसार, बालिका को पारिवारिक वातावरण में रखने का प्रयास किया जा रहा है और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
यह ऐसे समय में आया है जब योगी सरकार महिला सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखने का दावा करती रही है। सरकार एक ओर महिला अपराध से जुड़े अपराधियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है, वहीं पीड़ितों को आर्थिक मदद के साथ सामाजिक संबल भी प्रदान करने की नीति पर काम कर रही है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इस प्रकार की त्वरित सहायता उन मामलों में दी जाती है जहाँ पीड़ित को तत्काल आर्थिक राहत की आवश्यकता होती है।
आगे की कार्रवाई
तीनों गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध न्यायिक प्रक्रिया जारी है। पीड़िता को दी जा रही काउंसलिंग और कानूनी सहायता के साथ यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वह न्याय प्रक्रिया में प्रभावी रूप से भाग ले सके और उसका समुचित पुनर्वास हो सके।