गाजीपुर पॉक्सो केस: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी सिकंदर राजभर को 12 साल कठोर कारावास, ₹25,000 जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद न्यायालय के पॉक्सो कोर्ट ने 23 जुलाई 2026 को एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी सिकंदर राजभर को दोषी करार देते हुए 12 वर्ष के कठोर कारावास और ₹25,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई। यह फैसला पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश राम अवतार प्रसाद ने गुण-दोष के आधार पर सुनाया, जो वर्ष 2017 में दर्ज हुए इस मामले का अंतिम निर्णय है।
मुख्य घटनाक्रम
कासिमाबाद थाना क्षेत्र के एक गाँव के निवासी सिकंदर राजभर ने अपनी पड़ोसी नाबालिग लड़की को शादी का झाँसा देकर बहला-फुसलाकर भगा लिया था और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। कुछ दिनों बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। पीड़िता की माँ की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।
सहायक शासकीय अधिवक्ता रामकुमार राय ने बताया कि मामले में कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिसके बाद न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी पाया।
सजा का विवरण
न्यायालय ने सिकंदर राजभर को तीन अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई। धारा 8 पॉक्सो एक्ट के तहत 12 वर्ष का कठोर कारावास और ₹25,000 अर्थदंड (न चुकाने पर 1 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास); धारा 363 भादवि (अपहरण) के तहत 5 वर्ष का साधारण कारावास और ₹5,000 अर्थदंड (न चुकाने पर 7 दिन का अतिरिक्त कारावास); तथा धारा 366 भादवि के तहत 7 वर्ष का साधारण कारावास और ₹10,000 अर्थदंड (न चुकाने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास) की सजा दी गई।
ऑपरेशन कन्विक्शन की भूमिका
गाजीपुर पुलिस के अनुसार, यह सजा पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा संचालित 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान के अंतर्गत मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन पक्ष की लगातार प्रभावी पैरवी का परिणाम है। पुलिस ने बताया कि 23 जुलाई को न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि सुनाई गई।
यह अभियान उत्तर प्रदेश में लंबित पॉक्सो और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा है।
आम जनता पर असर
यह फैसला उन परिवारों के लिए एक संदेश है जो पॉक्सो मामलों में न्याय की प्रतीक्षा में हैं। 2017 से शुरू हुई इस कानूनी लड़ाई में पीड़िता की माँ ने मुकदमा दर्ज कराया था, और लगभग नौ वर्षों के बाद न्यायालय ने दोषसिद्धि सुनिश्चित की।
क्या होगा आगे
दोषी सिकंदर राजभर के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। यदि अर्थदंड की राशि निर्धारित समय में नहीं चुकाई जाती, तो न्यायालय के आदेश के अनुसार अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। गाजीपुर पुलिस ने संकेत दिया है कि 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत अन्य लंबित मामलों में भी इसी तरह प्रभावी पैरवी जारी रहेगी।