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विश्व बैंक रिपोर्ट: भारत ने 2011–2023 में 49.6 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला — पीयूष गोयल

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विश्व बैंक रिपोर्ट: भारत ने 2011–2023 में 49.6 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला — पीयूष गोयल

सारांश

विश्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट ने भारत की गरीबी उन्मूलन की गति को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया। 2011–2023 के बीच 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए और गरीबी दर 57.7% से 16.1% पर आ गई — पीयूष गोयल ने इसे मोदी नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि करार दिया।

मुख्य बातें

विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के अनुसार 2011–2023 में भारत में 49.6 करोड़ लोग 'लोअर मिडल इनकम' गरीबी रेखा से ऊपर आए।
गरीबी दर 57.7% से घटकर 16.1% रह गई; अत्यधिक गरीबी (3 डॉलर/दिन मानक) 27.1% से 2.6% पर आई।
2017–2023 के बीच कुल रोज़गार में 13.4 करोड़ की वृद्धि, जो कामकाजी उम्र की जनसंख्या वृद्धि से लगभग दोगुनी।
ग्रामीण महिलाओं ने वेतन आधारित कार्यों में बड़े पैमाने पर प्रवेश कर इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई।
99% आबादी तक बिजली पहुँच और लक्षित सामाजिक हस्तांतरण कार्यक्रमों को विश्व बैंक ने प्रमुख कारक बताया।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लक्षित नीतियों और सुदृढ़ शासन की उपलब्धि बताया।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 31 अक्टूबर 2026 को विश्व बैंक समूह की 'अक्टूबर 2026 पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ' का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत ने आधुनिक इतिहास में गरीबी उन्मूलन के सबसे तीव्र और व्यापक प्रयासों में से एक को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, 2011 से 2023 के बीच 49.6 करोड़ भारतीय नागरिक 'लोअर मिडल इनकम' गरीबी रेखा से ऊपर उठ गए, जिससे देश की गरीबी दर 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत रह गई।

विश्व बैंक रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े

विश्व बैंक की इस ताज़ा रिपोर्ट में भारत के गरीबी उन्मूलन को बहुआयामी दृष्टिकोण से परखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि 3 डॉलर प्रतिदिन (2021 पीपीपी) के मानक से मूल्यांकन किया जाए, तो भारत में अत्यधिक गरीबी 27.1 प्रतिशत से घटकर महज 2.6 प्रतिशत रह गई है। यह गिरावट वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय मानी जा रही है। गोयल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "2011 से 2023 के बीच, 49.6 करोड़ नागरिक 'लोअर मिडल इनकम' गरीबी रेखा (4.20 डॉलर प्रतिदिन, 2021 पीपीपी) से ऊपर आ गए हैं, जिससे गरीबी दर 57.7 प्रतिशत से गिरकर 16.1 प्रतिशत हो गई है।"

रोज़गार वृद्धि और महिलाओं की भूमिका

2017 से 2023 के बीच देश में कुल रोज़गार में 13.4 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई, जो इसी अवधि में कामकाजी उम्र की आबादी में हुई वृद्धि से लगभग दोगुनी है। गोयल ने विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में महिलाओं ने वेतन आधारित कार्यों में प्रवेश किया, जिससे परिवारों में कमाने वालों की संख्या बढ़ी और घरेलू आय में इजाफा हुआ।

यह ऐसे समय में आया है जब महिला श्रम बल भागीदारी को लेकर वैश्विक बहस तेज़ है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में इस बदलाव का श्रेय मजबूत उपभोग, महिला नेतृत्व वाले रोज़गार और व्यापक सामाजिक हस्तांतरण कार्यक्रमों को दिया गया है — जिनमें लक्षित खाद्य सुरक्षा और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) शामिल हैं।

बुनियादी ढाँचे और ग्रामीण शहरी समानता

रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, 99 प्रतिशत आबादी तक बिजली की पहुँच सुनिश्चित होने से नागरिकों के लिए बुनियादी जीवन स्तर में सुधार एक ठोस वास्तविकता बन गया है। गौरतलब है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कल्याणकारी लाभ पहुँचे हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण भारत ने तेज़ गति से प्रगति करते हुए ऐतिहासिक असमानता को व्यवस्थित रूप से कम किया है।

सरकार का पक्ष

गोयल ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू लक्षित नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और सुदृढ़ शासन को दिया। उन्होंने कहा, "सुशासन को अंततः जनता के भरोसे से मापा जाता है। यही बदलाव एनडीए और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लोगों के निरंतर विश्वास का आधार है। 140 करोड़ भारतीयों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अडिग है।"

आगे की राह

गोयल के अनुसार, सरकार विकास के अवसरों का विस्तार करते हुए एक आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में कार्यरत रहेगी। विश्व बैंक की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अपनी नीतियाँ केंद्रित कर रहा है — और इस डेटा को उस दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी व्याख्या संदर्भ के साथ होनी चाहिए — 'लोअर मिडल इनकम' गरीबी रेखा का मानक 4.20 डॉलर प्रतिदिन है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर निम्न स्तर पर है, और इस रेखा के ठीक ऊपर आना भी आर्थिक सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। 13.4 करोड़ रोज़गार की वृद्धि सराहनीय है, लेकिन इनमें से कितने औपचारिक, स्थायी और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हैं — यह आंकड़ा रिपोर्ट में अनुपस्थित है। असली कसौटी यह है कि क्या यह बदलाव टिकाऊ है: जलवायु संकट, ऑटोमेशन और वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच इन 49.6 करोड़ लोगों की स्थिति को मजबूत बनाए रखना अगली बड़ी चुनौती है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ में भारत के बारे में क्या कहा गया?
रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2011 से 2023 के बीच 49.6 करोड़ लोगों को 'लोअर मिडल इनकम' गरीबी रेखा (4.20 डॉलर प्रतिदिन, 2021 पीपीपी) से ऊपर उठाया और गरीबी दर 57.7% से घटाकर 16.1% पर लाई। इसे आधुनिक इतिहास के सबसे तेज़ और व्यापक गरीबी उन्मूलन प्रयासों में से एक बताया गया है।
भारत में अत्यधिक गरीबी की स्थिति क्या है?
विश्व बैंक रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार 3 डॉलर प्रतिदिन (2021 पीपीपी) के मानक पर भारत में अत्यधिक गरीबी 27.1% से घटकर 2.6% रह गई है। यह गिरावट 2011 से 2023 के बीच दर्ज की गई है।
इस गरीबी उन्मूलन में किन कारकों की भूमिका रही?
विश्व बैंक ने मजबूत उपभोग वृद्धि, ग्रामीण महिलाओं की वेतन आधारित रोज़गार में बढ़ती भागीदारी और व्यापक सामाजिक हस्तांतरण कार्यक्रमों को प्रमुख कारक बताया। इनमें लक्षित खाद्य सुरक्षा और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसी योजनाएँ शामिल हैं।
पीयूष गोयल ने इस रिपोर्ट पर क्या प्रतिक्रिया दी?
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स पर पोस्ट कर इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू लक्षित नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और सुदृढ़ शासन को दिया। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता अडिग है।
2017 से 2023 के बीच भारत में रोज़गार कितना बढ़ा?
विश्व बैंक रिपोर्ट के अनुसार 2017 से 2023 के बीच भारत में कुल रोज़गार में 13.4 करोड़ की वृद्धि हुई, जो इसी अवधि में कामकाजी उम्र की जनसंख्या में हुई वृद्धि से लगभग दोगुनी है।
राष्ट्र प्रेस
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