12 वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर, सरकारी योजनाओं का दावा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने सोमवार, 8 जून 2026 को दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा उपायों के व्यापक विस्तार के चलते देश में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकलने में सफल हुए हैं। सरकारी बयान के अनुसार, यह उपलब्धि पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा, खाद्यान्न वितरण और बालिका शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एक साथ किए गए हस्तक्षेपों का परिणाम है।
बहुआयामी गरीबी में गिरावट के आँकड़े
आधिकारिक बयान के अनुसार, देश में बहुआयामी गरीबी की दर 2013-14 में 29.17 प्रतिशत थी, जो 2022-23 में घटकर 11.28 प्रतिशत रह गई — यानी इस अवधि में 17.89 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई। सरकार ने यह भी बताया कि 2004-2014 के बीच औसत महंगाई दर 8.1 प्रतिशत थी, जो 2014-2025 के दौरान घटकर 5.1 प्रतिशत रह गई, जिससे परिवारों की क्रय शक्ति में सुधार हुआ।
जल जीवन मिशन और स्वच्छता में प्रगति
अगस्त 2019 में ग्रामीण भारत के केवल 3.23 करोड़ घरों तक नल से पानी पहुँचता था, जो मई 2026 तक बढ़कर 15.84 करोड़ घरों तक पहुँच गया। 'हर घर जल' अभियान के तहत अब तक 2.77 लाख गाँवों में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज हासिल की जा चुकी है और देश में घरेलू नल जल कवरेज 81.87 प्रतिशत हो गई है।
जल जीवन मिशन (JJM) के लिए 2020-21 से 2026-27 के बीच बजटीय आवंटन में करीब 488 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो बढ़कर ₹67,670 करोड़ तक पहुँच गया है। स्वच्छता के मोर्चे पर, पिछले वर्षों में 12.11 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कवरेज 2014 के 39 प्रतिशत से बढ़कर लगभग सार्वभौमिक स्तर तक पहुँच गई।
स्वास्थ्य, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10.57 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वितरित किए गए हैं, जिससे महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार और घरेलू वायु प्रदूषण में कमी आई है। आयुष्मान भारत योजना के ज़रिए आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत 81 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न दिया गया है।
बालिका शिक्षा और लिंगानुपात में सुधार
सरकार के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर 2013-14 में 4.6 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में घटकर केवल 0.3 प्रतिशत रह गई। माध्यमिक विद्यालयों में लड़कियों का नामांकन 2014-15 के 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 80.2 प्रतिशत हो गया है।
'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के परिणामस्वरूप लिंगानुपात 2011 की जनगणना में 943 से बढ़कर 2021 में प्रति 1,000 पुरुषों पर 1,020 महिलाओं तक पहुँच गया। इसके अलावा, आधार-आधारित राशन वितरण जैसी डिजिटल गवर्नेंस पहलों से सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुँचाया गया है।
आकांक्षी जिले और आगे की राह
सरकार ने बताया कि आकांक्षी जिलों और जनजातीय क्षेत्रों में पानी, स्वच्छता और आजीविका से जुड़ी लक्षित योजनाओं के ज़रिए कल्याणकारी सेवाओं का विस्तार किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन की रफ्तार कोविड के बाद धीमी पड़ी है। गौरतलब है कि इन आँकड़ों की स्वतंत्र सत्यापन प्रक्रिया जारी है और विशेषज्ञों का एक वर्ग क्रियान्वयन की गुणवत्ता पर नज़र बनाए हुए है।