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12 वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर, सरकारी योजनाओं का दावा

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12 वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर, सरकारी योजनाओं का दावा

सारांश

केंद्र सरकार का दावा है कि 12 वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले। बहुआयामी गरीबी दर 29.17% से घटकर 11.28% हुई, नल जल कवरेज 81.87% पहुँची और 81 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न मिला — यह आँकड़े सरकारी बयान पर आधारित हैं।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार के अनुसार पिछले 12 वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले।
बहुआयामी गरीबी दर 2013-14 के 29.17% से घटकर 2022-23 में 11.28% हुई — 17.89 प्रतिशत अंक की कमी।
जल जीवन मिशन के तहत नल जल कवरेज 3.23 करोड़ घरों (2019) से बढ़कर 15.84 करोड़ घरों (मई 2026) तक पहुँची; 2.77 लाख गाँवों में 100% कवरेज।
PMGKAY के तहत 81 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न; उज्ज्वला योजना के तहत 10.57 करोड़ मुफ्त LPG कनेक्शन।
लड़कियों का स्कूल छोड़ने की दर 4.6% (2013-14) से घटकर 0.3% (2024-25); लिंगानुपात 943 से बढ़कर 1,020 प्रति 1,000 पुरुष।
JJM के लिए बजटीय आवंटन 488% बढ़कर ₹67,670 करोड़ हुआ।

केंद्र सरकार ने सोमवार, 8 जून 2026 को दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा उपायों के व्यापक विस्तार के चलते देश में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकलने में सफल हुए हैं। सरकारी बयान के अनुसार, यह उपलब्धि पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा, खाद्यान्न वितरण और बालिका शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एक साथ किए गए हस्तक्षेपों का परिणाम है।

बहुआयामी गरीबी में गिरावट के आँकड़े

आधिकारिक बयान के अनुसार, देश में बहुआयामी गरीबी की दर 2013-14 में 29.17 प्रतिशत थी, जो 2022-23 में घटकर 11.28 प्रतिशत रह गई — यानी इस अवधि में 17.89 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई। सरकार ने यह भी बताया कि 2004-2014 के बीच औसत महंगाई दर 8.1 प्रतिशत थी, जो 2014-2025 के दौरान घटकर 5.1 प्रतिशत रह गई, जिससे परिवारों की क्रय शक्ति में सुधार हुआ।

जल जीवन मिशन और स्वच्छता में प्रगति

अगस्त 2019 में ग्रामीण भारत के केवल 3.23 करोड़ घरों तक नल से पानी पहुँचता था, जो मई 2026 तक बढ़कर 15.84 करोड़ घरों तक पहुँच गया। 'हर घर जल' अभियान के तहत अब तक 2.77 लाख गाँवों में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज हासिल की जा चुकी है और देश में घरेलू नल जल कवरेज 81.87 प्रतिशत हो गई है।

जल जीवन मिशन (JJM) के लिए 2020-21 से 2026-27 के बीच बजटीय आवंटन में करीब 488 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो बढ़कर ₹67,670 करोड़ तक पहुँच गया है। स्वच्छता के मोर्चे पर, पिछले वर्षों में 12.11 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कवरेज 2014 के 39 प्रतिशत से बढ़कर लगभग सार्वभौमिक स्तर तक पहुँच गई।

स्वास्थ्य, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10.57 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वितरित किए गए हैं, जिससे महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार और घरेलू वायु प्रदूषण में कमी आई है। आयुष्मान भारत योजना के ज़रिए आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत 81 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न दिया गया है।

बालिका शिक्षा और लिंगानुपात में सुधार

सरकार के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर 2013-14 में 4.6 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में घटकर केवल 0.3 प्रतिशत रह गई। माध्यमिक विद्यालयों में लड़कियों का नामांकन 2014-15 के 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 80.2 प्रतिशत हो गया है।

'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के परिणामस्वरूप लिंगानुपात 2011 की जनगणना में 943 से बढ़कर 2021 में प्रति 1,000 पुरुषों पर 1,020 महिलाओं तक पहुँच गया। इसके अलावा, आधार-आधारित राशन वितरण जैसी डिजिटल गवर्नेंस पहलों से सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुँचाया गया है।

आकांक्षी जिले और आगे की राह

सरकार ने बताया कि आकांक्षी जिलों और जनजातीय क्षेत्रों में पानी, स्वच्छता और आजीविका से जुड़ी लक्षित योजनाओं के ज़रिए कल्याणकारी सेवाओं का विस्तार किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन की रफ्तार कोविड के बाद धीमी पड़ी है। गौरतलब है कि इन आँकड़ों की स्वतंत्र सत्यापन प्रक्रिया जारी है और विशेषज्ञों का एक वर्ग क्रियान्वयन की गुणवत्ता पर नज़र बनाए हुए है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सरकारी बयान पर आधारित है — स्वतंत्र सत्यापन की प्रतीक्षा है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक के मानक — जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर को एक साथ मापते हैं — तभी विश्वसनीय होते हैं जब सर्वेक्षण पद्धति और नमूना आकार पारदर्शी हों। गौरतलब है कि नल जल कनेक्शन की उपस्थिति और उसकी कार्यशीलता में अंतर होता है — कई रिपोर्टों में 'फंक्शनल' कनेक्शन की दर कम पाई गई है। असली कसौटी यह है कि क्या ये सुधार आय और रोज़गार में टिकाऊ बदलाव में तब्दील हो रहे हैं, या केवल सेवा-वितरण के आँकड़ों तक सीमित हैं।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बहुआयामी गरीबी से 25 करोड़ लोगों के बाहर निकलने का दावा किस आधार पर है?
केंद्र सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह आँकड़ा बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) पर आधारित है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे कई आयामों को एक साथ मापता है। बहुआयामी गरीबी दर 2013-14 के 29.17% से घटकर 2022-23 में 11.28% हो गई।
जल जीवन मिशन की अब तक की प्रगति क्या है?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अगस्त 2019 में केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों में नल जल था, जो मई 2026 तक 15.84 करोड़ घरों तक पहुँच गया। 2.77 लाख गाँवों में 100% कवरेज हासिल की जा चुकी है और देशभर में घरेलू नल जल कवरेज 81.87% हो गई है।
PMGKAY योजना से कितने लोगों को लाभ मिला है?
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत 81 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया है। यह योजना देश के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
बालिका शिक्षा में क्या सुधार हुए हैं?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर लड़कियों का स्कूल छोड़ने की दर 2013-14 के 4.6% से घटकर 2024-25 में 0.3% रह गई। माध्यमिक विद्यालयों में लड़कियों का नामांकन 75.51% (2014-15) से बढ़कर 80.2% (2024-25) हो गया है।
उज्ज्वला योजना का महिलाओं पर क्या असर पड़ा?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10.57 करोड़ से अधिक मुफ्त LPG कनेक्शन वितरित किए गए हैं। सरकार के अनुसार इससे महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और घरों के अंदर होने वाले धुएँ व वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आई है।
राष्ट्र प्रेस
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