अंत्योदय मंत्र से बदल रही तस्वीर: ₹24,104 करोड़ की पीएम जनमन योजना से 75 पीवीटीजी समुदायों तक पहुंचा विकास
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार के 'अंत्योदय' दर्शन पर आधारित योजनाओं ने भारत के सबसे अलग-थलग और वंचित जनजातीय समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। 12 जून 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, इन प्रयासों का केंद्र ₹24,104 करोड़ की प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) योजना है, जो विशेष रूप से अत्यंत कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के लिए बनाई गई है। यह उन समुदायों के लिए है जो दशकों से पक्के घर, स्वच्छ पेयजल, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रहे हैं।
पीएम जनमन योजना: दायरा और संरचना
सरकार ने नवंबर 2023 में पीएम जनमन योजना लॉन्च की थी। यह कार्यक्रम 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले 75 पीवीटीजी समुदायों को लक्षित करता है। इसके तहत 9 मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 11 प्रमुख हस्तक्षेप किए जा रहे हैं, जिनमें आवास, सड़क संपर्क, पाइप से पेयजल आपूर्ति, मोबाइल चिकित्सा इकाइयाँ, आंगनवाड़ी केंद्र, छात्रावास, विद्युतीकरण, मोबाइल टावर, बहुउद्देश्यीय केंद्र, वन धन विकास केंद्र और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण शामिल हैं।
गौरतलब है कि यह योजना किसी एक मंत्रालय की पहल नहीं है — इसकी बहु-मंत्रालयी संरचना इसे पिछले एकल-विभागीय प्रयासों से अलग बनाती है।
मुख्य उपलब्धियाँ: आँकड़े क्या कहते हैं
फैक्टशीट के अनुसार, जनजातीय गाँवों में अब तक 7.8 लाख पक्के घर बनाए जा चुके हैं। 28,303 से अधिक गाँवों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाया गया है और 5,89,812 जनजातीय परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत के कई आदिवासी बहुल ज़िलों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे रही है। विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वित दृष्टिकोण से उन दूरस्थ बस्तियों तक भी पहुँच संभव हुई है जिन्हें पहले 'पहुँच से बाहर' माना जाता था।
एकलव्य विद्यालयों से शिक्षा का विस्तार
पिछले 12 वर्षों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के विस्तार ने दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। वर्ष 2018 के बाद इन विद्यालयों का विस्तार तेज़ हुआ। फैक्टशीट के अनुसार, 2026 तक 499 विद्यालयों में 1.56 लाख से अधिक छात्र नामांकित हैं, जबकि 323 नए विद्यालय निर्माणाधीन हैं।
अनुसूचित जनजाति समुदायों को अब आधुनिक आवासीय शिक्षा की सुविधा उनके क्षेत्रों के करीब ही मिल रही है — जो एक दशक पहले तक संभव नहीं था।
पीएम-अजय योजना: अनुसूचित जाति बहुल गाँवों पर फोकस
वर्ष 2021 में शुरू की गई पीएम-अजय योजना अनुसूचित जाति बहुल गाँवों के समग्र विकास पर केंद्रित है। यह योजना 26 राज्यों के 597 जिलों में स्थित 47,334 गाँवों को कवर करती है, जिससे 4 करोड़ से अधिक अनुसूचित जाति नागरिकों और 83 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिल रहा है।
इसके 'आदर्श ग्राम' घटक के तहत क्षेत्र-आधारित विकास किया जा रहा है, जिसमें ग्राम विकास योजनाओं और स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार अतिरिक्त सहायता दी जाती है। 25,000 से अधिक गाँवों में आधारभूत सुविधाओं का आकलन पूरा हो चुका है, जिससे सड़क, जल आपूर्ति, शिक्षा और स्वच्छता की कमियों की व्यवस्थित पहचान संभव हुई है।
आगे की राह: युवा और रोज़गार
सरकार ने युवाओं की भागीदारी और रोज़गार सृजन को इन योजनाओं का अभिन्न हिस्सा बनाया है। कौशल विकास, स्वयं सहायता समूहों में भागीदारी और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे के निर्माण को दीर्घकालिक आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के व्यापक प्रयास से जोड़ा गया है।
फैक्टशीट के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य वंचित समुदायों को स्थायी आर्थिक अवसरों से जोड़ना है — और इसकी सफलता की असली परख आने वाले वर्षों में ज़मीनी स्तर पर दिखेगी।