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पीएम-अजय योजना: 47.59 लाख लोगों को लाभ, 16,759 गाँव बने आदर्श ग्राम

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पीएम-अजय योजना: 47.59 लाख लोगों को लाभ, 16,759 गाँव बने आदर्श ग्राम

सारांश

पीएम-अजय योजना के तहत 47,316 गाँव शामिल, 47.59 लाख नागरिक लाभान्वित और 16,759 गाँव आदर्श ग्राम घोषित — ये आँकड़े SC सशक्तिकरण की दिशा में केंद्र सरकार की प्रगति का दावा करते हैं। डिजिटल गवर्नेंस और जियो-टैगिंग से पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश भी जारी है।

मुख्य बातें

पीएम-अजय योजना के आदर्श ग्राम घटक से अब तक 47 लाख 59 हज़ार 399 नागरिक लाभान्वित हुए हैं।
देशभर के 47,316 गाँवों को योजना में शामिल किया गया; 16,759 गाँव आदर्श ग्राम घोषित।
46,782 विकास कार्य पूरे और 24,133 विलेज डेवलपमेंट प्लान (VDP) तैयार।
वित्त वर्ष 2026-27 में ₹22.50 करोड़ से तीन छात्रावास बनेंगे, जिनसे 750 विद्यार्थियों को आवास मिलेगा।
पीएम-अजय पोर्टल और अजय मोबाइल ऐप से जियो-टैग्ड रिपोर्टिंग और रियल-टाइम निगरानी सुनिश्चित।

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तहत देशभर में अनुसूचित जाति (SC) समुदायों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 18 जुलाई को जारी आँकड़ों के अनुसार, योजना के आदर्श ग्राम घटक से अब तक 47 लाख 59 हज़ार 399 नागरिक लाभान्वित हो चुके हैं और 16,759 गाँवों को आदर्श ग्राम घोषित किया जा चुका है। यह योजना गरीबी उन्मूलन, आजीविका संवर्धन और बुनियादी ढाँचे के विकास के ज़रिए SC समुदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखती है।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्रालय के अनुसार, पीएम-अजय के आदर्श ग्राम घटक के अंतर्गत देशभर के 47,316 गाँवों को शामिल किया गया है। इनमें से 46,782 विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जबकि 24,133 विलेज डेवलपमेंट प्लान (VDP) तैयार किए गए हैं। इन आँकड़ों को मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में साझा किया।

गौरतलब है कि 16,759 गाँवों को आदर्श ग्राम का दर्जा मिलने से SC बहुल बस्तियों में मूलभूत सुविधाओं — सड़क, पानी, बिजली और स्वास्थ्य केंद्रों — तक पहुँच में सुधार हुआ है।

छात्रावास और शिक्षा पर निवेश

मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 में तीन छात्रावास परियोजनाओं के निर्माण के लिए ₹22.50 करोड़ आवंटित किए हैं। इनमें से दो छात्रावास छात्राओं के लिए होंगे। इन परियोजनाओं के माध्यम से 750 विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उच्च शिक्षा तक उनकी पहुँच सुगम होगी।

हॉस्टल घटक के तहत SC विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों के निर्माण और मरम्मत हेतु वित्तीय सहायता दी जाती है — यह उन परिवारों के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है जो शिक्षा केंद्रों से दूर दराज़ के गाँवों में रहते हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि पीएम-अजय योजना SC समुदाय के सामाजिक और आर्थिक अंतर को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा, 'यह योजना समुदायों को सशक्त बनाने, जमीनी स्तर की संस्थाओं को मजबूत करने और जनभागीदारी के माध्यम से समावेशी विकास सुनिश्चित करती है।'

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि योजना की कार्यप्रणाली टेक्नोलॉजी आधारित और परिणामोन्मुख है, जिससे संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित होता है।

डिजिटल गवर्नेंस फ्रेमवर्क

मंत्रालय ने योजना के प्रभावी संचालन के लिए पीएम-अजय पोर्टल और अजय मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से एक मज़बूत डिजिटल गवर्नेंस ढाँचा विकसित किया है। यह प्लेटफ़ॉर्म VDP तैयार करने, परियोजनाओं के मूल्यांकन, फंड की निगरानी, लाभार्थियों की मॉनिटरिंग और जियो-टैग्ड रिपोर्टिंग जैसी प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन संचालित करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में डिजिटल पारदर्शिता को प्राथमिकता दे रही है। जियो-टैगिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से फंड के दुरुपयोग की आशंका कम होती है।

आम जनता पर असर

ग्रांट्स-इन-एड घटक के तहत आजीविका सृजन, कौशल विकास और आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को सहायता दी जाती है, जो SC समुदाय की आर्थिक स्वनिर्भरता को बल देती हैं। आदर्श ग्राम घटक में अनुसूचित जाति की अधिक आबादी वाले गाँवों का समग्र विकास समुदाय की भागीदारी से किया जाता है।

आगे चलकर योजना का विस्तार और अधिक गाँवों तक किए जाने की संभावना है, जबकि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ करने की योजना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'आदर्श ग्राम' का दर्जा मिलने के बाद इन गाँवों में दीर्घकालिक बदलाव कितना टिकाऊ है। 46,782 विकास कार्य पूरे होने का दावा तब तक अधूरा है जब तक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष मूल्यांकन सार्वजनिक न हो। डिजिटल गवर्नेंस और जियो-टैगिंग सही दिशा में कदम हैं, लेकिन SC समुदाय की आर्थिक विषमता को मापने के लिए केवल बुनियादी ढाँचे की गिनती पर्याप्त नहीं — आजीविका और आय में वास्तविक वृद्धि के सत्यापन-योग्य आँकड़े भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-अजय योजना क्या है?
प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है जो SC समुदायों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बनाई गई है। इसके तीन मुख्य घटक हैं — आदर्श ग्राम (गाँव का समग्र विकास), ग्रांट्स-इन-एड (आजीविका और कौशल विकास), और हॉस्टल (SC विद्यार्थियों के लिए छात्रावास निर्माण)।
पीएम-अजय योजना से अब तक कितने लोगों को लाभ मिला है?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, 18 जुलाई तक योजना से 47 लाख 59 हज़ार 399 नागरिक लाभान्वित हो चुके हैं। देशभर के 47,316 गाँवों को योजना में शामिल किया गया है।
आदर्श ग्राम घोषित होने का क्या मतलब है?
आदर्श ग्राम वे गाँव हैं जहाँ पीएम-अजय के तहत बुनियादी ढाँचे, मूलभूत सुविधाओं और सामुदायिक विकास के निर्धारित मानक पूरे किए जा चुके हैं। अब तक 16,759 गाँवों को यह दर्जा मिला है, जिससे SC बहुल क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार का दावा किया जा रहा है।
वित्त वर्ष 2026-27 में छात्रावास निर्माण के लिए कितना बजट आवंटित किया गया है?
मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 में तीन छात्रावास परियोजनाओं के लिए ₹22.50 करोड़ आवंटित किए हैं। इनमें से दो छात्रावास छात्राओं के लिए होंगे और इनसे 750 SC विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा मिलेगी।
पीएम-अजय योजना की निगरानी कैसे होती है?
मंत्रालय ने पीएम-अजय पोर्टल और अजय मोबाइल एप्लिकेशन के ज़रिए एक डिजिटल गवर्नेंस ढाँचा तैयार किया है। इस पर VDP तैयार करना, फंड की निगरानी, लाभार्थी ट्रैकिंग और जियो-टैग्ड रिपोर्टिंग — सभी प्रक्रियाएँ ऑनलाइन संचालित होती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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