मोदी सरकार के 12 साल: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने गिनाईं उपलब्धियाँ, 25 करोड़ को गरीबी से मुक्ति का दावा
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 26 मई 2026 को नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश की विकास यात्रा की व्यापक समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने गरीबी उन्मूलन, बुनियादी ढाँचे के विस्तार और जन कल्याण योजनाओं को इस दशक की प्रमुख उपलब्धियाँ बताया। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी उनके एक्स पोस्ट को रिपोस्ट कर इस संदेश को व्यापक रूप से प्रसारित किया।
मुख्य उपलब्धियाँ: संख्याओं में
राधाकृष्णन ने समावेशी विकास के आँकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि 25 करोड़ भारतीयों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया गया है। इसके अतिरिक्त 12 करोड़ घरों तक पाइप से पेयजल पहुँचाया गया है और स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 60 करोड़ से अधिक नागरिकों को स्वच्छता सुविधाएँ मुहैया कराई गई हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत 80 करोड़ लोगों को प्रतिमाह 5 किलोग्राम निःशुल्क अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
आयुष्मान भारत: स्वास्थ्य क्षेत्र में 'गेमचेंजर'
उपराष्ट्रपति ने आयुष्मान भारत योजना को 'गेमचेंजर' की संज्ञा दी, जिसने 40 करोड़ से अधिक लोगों को चिकित्सा बीमा कवर प्रदान किया है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और सामर्थ्य लंबे समय से चुनौती बनी हुई है।
नारी शक्ति और कृषि क्षेत्र
राधाकृष्णन ने अपने आधिकारिक ब्लॉग पोस्ट में लिखा, "3 करोड़ से अधिक महिलाएँ लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी बन चुकी हैं। देशभर में यात्रा के दौरान जब मैं इन महिलाओं से मिलता हूँ तो उनके चेहरों पर आशा की किरण स्पष्ट दिखती है।" कृषि क्षेत्र में उन्होंने कहा कि भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा खाद्य उत्पादक और चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन चुका है।
बुनियादी ढाँचा और सुरक्षा नीति
जम्मू-कश्मीर में चेनाब पुल को उन्होंने नए युग के इंजीनियरिंग चमत्कार के रूप में रेखांकित किया और कहा कि सीमावर्ती एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क-राजमार्गों का विस्तार प्रधानमंत्री की प्रगति योजना के तहत कड़ी निगरानी के कारण संभव हुआ। उन्होंने आतंकवाद और नक्सलवाद के विरुद्ध सरकार के जीरो-टॉलरेंस दृष्टिकोण की भी सराहना की, यह कहते हुए कि पहली बार नक्सल प्रभावित क्षेत्र मुख्यधारा के विकास से जुड़ रहे हैं।
2047 का लक्ष्य: विकसित भारत
स्वामी विवेकानंद, तिरुवल्लुवर और सुब्रमण्यम भारती से प्रेरणा का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा, "हमने लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2047 तक, स्वतंत्रता की शताब्दी के भीतर, भारत एक अग्रणी वैश्विक शक्ति बने और विश्व का मार्गदर्शन करने की स्थिति तक पहुँचे। परिश्रम का यह युग ही 'अमृत काल' है।" उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत 'विश्वगुरु' की भूमिका निभाता है तो उन्हें आश्चर्य नहीं होगा। आने वाले वर्षों में इन दावों की परख उनके ज़मीनी क्रियान्वयन से होगी।