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मोदी सरकार के 12 साल: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने गिनाईं उपलब्धियाँ, 25 करोड़ को गरीबी से मुक्ति का दावा

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मोदी सरकार के 12 साल: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने गिनाईं उपलब्धियाँ, 25 करोड़ को गरीबी से मुक्ति का दावा

सारांश

मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 25 करोड़ की गरीबी मुक्ति, 80 करोड़ को मुफ्त अनाज और 40 करोड़ को स्वास्थ्य बीमा जैसे आँकड़े पेश किए — और 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने का संकल्प दोहराया।

मुख्य बातें

26 मई 2026 को मोदी सरकार ने केंद्र में 12 वर्ष पूरे किए; उपराष्ट्रपति सी.पी.
राधाकृष्णन ने उपलब्धियों की विस्तृत समीक्षा की।
25 करोड़ भारतीयों को गरीबी से बाहर निकाला गया; 12 करोड़ घरों तक पाइप से पेयजल पहुँचा।
80 करोड़ लोगों को प्रतिमाह 5 किलो मुफ्त अनाज; आयुष्मान भारत से 40 करोड़ को चिकित्सा बीमा।
3 करोड़ से अधिक महिलाएँ लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी बनीं।
भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा खाद्य उत्पादक और चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बना।
लक्ष्य: 2047 तक 'विकसित भारत' — स्वतंत्रता की शताब्दी तक अग्रणी वैश्विक शक्ति।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 26 मई 2026 को नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश की विकास यात्रा की व्यापक समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने गरीबी उन्मूलन, बुनियादी ढाँचे के विस्तार और जन कल्याण योजनाओं को इस दशक की प्रमुख उपलब्धियाँ बताया। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी उनके एक्स पोस्ट को रिपोस्ट कर इस संदेश को व्यापक रूप से प्रसारित किया।

मुख्य उपलब्धियाँ: संख्याओं में

राधाकृष्णन ने समावेशी विकास के आँकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि 25 करोड़ भारतीयों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया गया है। इसके अतिरिक्त 12 करोड़ घरों तक पाइप से पेयजल पहुँचाया गया है और स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 60 करोड़ से अधिक नागरिकों को स्वच्छता सुविधाएँ मुहैया कराई गई हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत 80 करोड़ लोगों को प्रतिमाह 5 किलोग्राम निःशुल्क अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

आयुष्मान भारत: स्वास्थ्य क्षेत्र में 'गेमचेंजर'

उपराष्ट्रपति ने आयुष्मान भारत योजना को 'गेमचेंजर' की संज्ञा दी, जिसने 40 करोड़ से अधिक लोगों को चिकित्सा बीमा कवर प्रदान किया है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और सामर्थ्य लंबे समय से चुनौती बनी हुई है।

नारी शक्ति और कृषि क्षेत्र

राधाकृष्णन ने अपने आधिकारिक ब्लॉग पोस्ट में लिखा, "3 करोड़ से अधिक महिलाएँ लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी बन चुकी हैं। देशभर में यात्रा के दौरान जब मैं इन महिलाओं से मिलता हूँ तो उनके चेहरों पर आशा की किरण स्पष्ट दिखती है।" कृषि क्षेत्र में उन्होंने कहा कि भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा खाद्य उत्पादक और चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन चुका है।

बुनियादी ढाँचा और सुरक्षा नीति

जम्मू-कश्मीर में चेनाब पुल को उन्होंने नए युग के इंजीनियरिंग चमत्कार के रूप में रेखांकित किया और कहा कि सीमावर्ती एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क-राजमार्गों का विस्तार प्रधानमंत्री की प्रगति योजना के तहत कड़ी निगरानी के कारण संभव हुआ। उन्होंने आतंकवाद और नक्सलवाद के विरुद्ध सरकार के जीरो-टॉलरेंस दृष्टिकोण की भी सराहना की, यह कहते हुए कि पहली बार नक्सल प्रभावित क्षेत्र मुख्यधारा के विकास से जुड़ रहे हैं।

2047 का लक्ष्य: विकसित भारत

स्वामी विवेकानंद, तिरुवल्लुवर और सुब्रमण्यम भारती से प्रेरणा का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा, "हमने लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2047 तक, स्वतंत्रता की शताब्दी के भीतर, भारत एक अग्रणी वैश्विक शक्ति बने और विश्व का मार्गदर्शन करने की स्थिति तक पहुँचे। परिश्रम का यह युग ही 'अमृत काल' है।" उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत 'विश्वगुरु' की भूमिका निभाता है तो उन्हें आश्चर्य नहीं होगा। आने वाले वर्षों में इन दावों की परख उनके ज़मीनी क्रियान्वयन से होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ये सरकारी स्रोतों पर आधारित हैं — स्वतंत्र सत्यापन की गुंजाइश बनी रहती है। '25 करोड़ को गरीबी से मुक्ति' जैसे दावे पद्धतिगत प्रश्न उठाते हैं: किस मानक से गरीबी मापी गई और क्या यह बदलाव टिकाऊ है? आयुष्मान भारत की पहुँच के आँकड़े उत्साहजनक हैं, परंतु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और अस्पताल अवसंरचना की कमी पर चर्चा अभी भी अधूरी है। 2047 का 'विकसित भारत' लक्ष्य राजनीतिक दृष्टि से प्रेरक है, किंतु इसे मापने योग्य वार्षिक मील के पत्थरों से जोड़े बिना यह महज़ एक आकांक्षा बनकर रह सकता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोदी सरकार के 12 साल में सबसे बड़ी उपलब्धि क्या बताई गई है?
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन के अनुसार, 25 करोड़ भारतीयों को गरीबी से बाहर निकालना और 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराना इस दशक की प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। आयुष्मान भारत के तहत 40 करोड़ से अधिक लोगों को स्वास्थ्य बीमा भी इस सूची में शामिल है।
आयुष्मान भारत योजना को 'गेमचेंजर' क्यों कहा गया?
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने आयुष्मान भारत को 'गेमचेंजर' इसलिए बताया क्योंकि इसने 40 करोड़ से अधिक लोगों को चिकित्सा बीमा कवर प्रदान किया है। यह योजना उन वर्गों तक स्वास्थ्य सुरक्षा पहुँचाती है जो पहले महँगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते थे।
लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी योजना से कितनी महिलाएँ जुड़ी हैं?
राधाकृष्णन के अनुसार, देशभर में 3 करोड़ से अधिक महिलाएँ लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं से मिलने पर उनके चेहरों पर आशा की किरण स्पष्ट दिखती है।
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य क्या है?
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य स्वतंत्रता की शताब्दी तक भारत को एक अग्रणी वैश्विक शक्ति बनाना है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने इसे 'अमृत काल' की परिभाषा बताते हुए सभी नागरिकों से इस मिशन में योगदान देने का आह्वान किया।
चेनाब पुल को इंजीनियरिंग चमत्कार क्यों कहा गया?
जम्मू-कश्मीर में स्थित चेनाब पुल को उपराष्ट्रपति ने नए युग के बुनियादी ढाँचे का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह और सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क-राजमार्गों का विस्तार प्रधानमंत्री की प्रगति योजना के तहत कड़ी निगरानी के कारण संभव हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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