जयशंकर अटलांटा पहुंचे: G20 और क्वाड बैठक में समुद्री मार्ग, ऊर्जा व सप्लाई चेन पर होगी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 30 अक्टूबर 2026 को अटलांटा पहुंचे, जहाँ वे 30-31 अक्टूबर को आयोजित जी20 विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में भाग लेंगे। अमेरिका के अनुसार, इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन की मज़बूती और समुद्री मार्गों को बाधा-मुक्त रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा — ये तीनों मुद्दे भारत के तेल, एलएनजी और उर्वरक आयात के लिहाज़ से सीधे अहमियत रखते हैं।
बैठक का एजेंडा और अमेरिकी प्राथमिकताएँ
बैठक की मेज़बानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो कर रहे हैं। बैठक से पहले अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा, 'ज़रूरी संकटों से निपटने और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को बिना किसी खतरे या टोल के व्यापार के लिए खुला रखने का साझा संकल्प है। यह ऊर्जा संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन उतना ही उर्वरक और भोजन के लिए भी।'
उन्होंने आगे कहा, 'क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन ऊर्जा सुरक्षा और उन्नत मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहद ज़रूरी है — खासकर उर्वरक, एलएनजी, तेल और अन्य कच्चे माल के लिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज़ स्ट्रेट के आसपास व्यवधान ने भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक भी होगी
जयशंकर जी20 बैठक के दौरान क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लेंगे, जिसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के उनके समकक्ष शामिल होंगे। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने पुष्टि की कि यह वर्ष की तीसरी क्वाड विदेश मंत्री स्तरीय बैठक होगी। इससे पहले क्वाड विदेश मंत्री 26 मई को नई दिल्ली में मिले थे।
वोंग ने यह भी बताया कि ऑस्ट्रेलिया यूरोपीय संघ के नेतृत्व वाले 'नो फीस / नो टोल्स' संकल्प में शामिल हो गया है, जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर गैरकानूनी शुल्क और टोल का विरोध करता है।
भारत के लिए इस बैठक की अहमियत
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा सप्लाई चेन की स्थिरता दिल्ली की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है। अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, 'ऊर्जा दुनिया भर में आर्थिक विकास की बुनियाद है और इसकी पहुँच सस्ती और भरपूर होनी चाहिए।'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में बुधवार को यात्रा की घोषणा करते हुए कहा था कि जयशंकर इस बैठक के दौरान अपने विभिन्न समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।
कौन-कौन से देश हैं शामिल
इस बैठक में जी20 के प्रमुख देशों के प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखों में हैं, जबकि चीन विदेश मंत्री वांग यी के बजाय कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओक्सू को भेज रहा है। अन्य प्रमुख प्रतिभागियों में जापान के तोशिमित्सु मोटेगी, सऊदी अरब के प्रिंस फैसल बिन फरहान, तुर्की के हाकन फिदान, यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास, ब्राज़ील के मौरो विएरा और कनाडा की अनीता आनंद शामिल हैं।
अमेरिका ने पोलैंड को जी20 का पूर्ण सदस्य बनाने का भी समर्थन किया है। पोलैंड के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की भी बैठक में मौजूद हैं।
आगे का कार्यक्रम
अटलांटा के बाद जयशंकर 1 से 4 नवंबर तक राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक के लिए एंटीगुआ और बारबुडा रवाना होंगे। अगला बड़ा पड़ाव 14-15 दिसंबर को मियामी में होने वाला जी20 लीडर्स समिट होगा, जिसकी मेज़बानी डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। इस पृष्ठभूमि में अटलांटा बैठक को दिसंबर शिखर वार्ता की ज़मीन तैयार करने वाली कूटनीतिक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।