जयशंकर ने ओमान और ईरान के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात, होर्मुज स्ट्रेट संकट पर बातचीत
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 26 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर ओमान और ईरान के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग मुलाकात की और होर्मुज स्ट्रेट संकट तथा खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव पर विस्तृत चर्चा की। यह संकट फरवरी में अमेरिका और इजरायल की ईरान पर बमबारी के बाद से वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
मुख्य घटनाक्रम
जयशंकर ने पहले दिन में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से भेंट की, जिसमें खाड़ी संघर्ष से जुड़े ताज़ा घटनाक्रम पर चर्चा हुई। इसके बाद उन्होंने ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमूद अल बुसैदी से मुलाकात की, जिन्होंने खाड़ी क्षेत्र की तनावपूर्ण स्थिति से जुड़ी ताज़ा जानकारी साझा की। जयशंकर ने इन दोनों बैठकों का विवरण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया।
होर्मुज स्ट्रेट पर गतिरोध
होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल की बमबारी के बाद से लगभग ठप हो गई है। इस जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले वैश्विक तेल व्यापार की एक बड़ी हिस्सेदारी प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।
इस दिन एक अहम घटनाक्रम यह रहा कि अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट को सात दिन में खोलने की योजना पेश की और दीर्घकालिक युद्धविराम वार्ता फिर शुरू करने का प्रस्ताव रखा। हालाँकि, रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
ओमान की योजना और ट्रंप की धमकी
इससे पहले ओमान और ईरान के बीच एक वैकल्पिक समाधान पर बातचीत हुई थी, जिसके तहत स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने और दो-लेन आवाजाही की व्यवस्था करने की योजना थी। इस प्रस्ताव के अनुसार, जहाज ईरान की ओर से खाड़ी में प्रवेश करते और ओमान की ओर से बाहर निकलते।
हालाँकि ट्रंप ने ईरान के साथ इस योजना पर बातचीत करने को लेकर ओमान को कथित तौर पर धमकी दी। अंततः ईरान भी इस बातचीत से पीछे हट गया और उसने ओमान के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। गौरतलब है कि कुछ जहाज ओमान के तट के निकट से होकर स्ट्रेट पार करने में सफल रहे हैं, जबकि ईरानी बंदरगाह अमेरिकी घेराबंदी में हैं। तेहरान ने इस रास्ते का उपयोग करने वाले कुछ जहाजों पर हमले भी किए हैं।
भारत की स्थिति और 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स'
जयशंकर ने समुद्री रास्तों को बंद किए जाने और जहाजों तथा नाविकों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने यह बात 25 देशों के राजनयिकों के साथ आयोजित एक विशेष बैठक में कही, जो जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए गठित 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स' की शुरुआत के उपलक्ष्य में बुलाई गई थी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत खाड़ी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर ऊर्जा आयात करता है और इस संकट का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। भारत की सक्रिय कूटनीति यह दर्शाती है कि नई दिल्ली इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान में रचनात्मक भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है।
आगे की राह
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी भी टिकाऊ समाधान के लिए अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों के बीच सहमति ज़रूरी होगी। अराघची के प्रस्ताव की अस्वीकृति और ट्रंप की ओमान को कथित धमकी के बाद कूटनीतिक रास्ता और संकरा दिखता है। जयशंकर की ये मुलाकातें इस बात का संकेत हैं कि भारत आने वाले दिनों में भी संवाद के सभी चैनल खुले रखने की कोशिश जारी रखेगा।